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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
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प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा
(Primary and Secondary Education)
प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम से आप क्या समझते हैं? इसके गुण व दोषों पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर-
प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को समझने से पहले ये आवश्यक है कि हम इस पाठ्यक्रम की कमियों को देखें। विदेशी शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रमों से इसकी तुलना करने पर हम पाते हैं कि हमारा प्राथमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम अत्यधिक संकुचित व पुराना है। इसका प्रमुख कारण यह है कि ये पाठ्यक्रम लाभदायक कुशलताओं का विकास व उचित प्रकार की रुचियों, अभिवृत्तियों तथा मान्यताओं पर पर्याप्त बल नहीं देता है। इस कारण से यह आधुनिक ज्ञान तथा वर्तमान जीन से अलग-अलग है।
प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम के दोषों को हम निम्न रूप में समझ सकते हैं-
1. पाठ्यक्रम अत्यधिक संकुचित है।
2. पुस्तकीय ज्ञान तथा रटन्त विद्या पर बल देता है।
3. उच्च शिक्षा के प्रतिकूल है।
4. इसका आधार व्यावहारिक न होकर केवल साहित्यिक व सैद्धान्तिक है।
5. जीवन के साथ इसका सम्बन्ध नहीं है।
इस सम्बन्ध में 1960 में प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम के ऊपर एक सम्मेलन हुआ था, जिसमें एशिया के प्रतिनिधि शामिल थे।
इस सम्मेलन में इसमें सुधार करने के उद्देश्य से निम्न विचार व्यक्त किये गये-
1. प्राथमिक स्तर पर आधारभूत उपकरणों पर नियन्त्रण किया जाये।
2. पाठ्यक्रम इस प्रकार का हो जिससे बालक का सर्वांगीण विकास हो।
3. पाठ्यक्रम के अध्ययन से उत्तम नागरिकता का विकास हो।
4. देश की परम्परा तथा संस्कृति का पालन हो।
5. विश्व बन्धुत्व व अन्तर्राष्ट्रीय भाई-चारे का विकास हो।
6. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो।
7. श्रम के प्रति लोगों की रुचि बढ़े।
8. जीवन के सकारात्मक पक्ष का विस्तार हो।
हमारे जीवन से शिक्षा तभी सम्बन्ध स्थापित करेगी जबकि पाठ्यक्रम लचीला हो तथा जीवन से समीपता लिये हुए हो। पाठ्यक्रम को स्थानीय वातावरण के अनुकूल होना चाहिए तथा NCERT को इसके स्तर का निर्धारण करने का प्रयास करना चाहिये।
अच्छे पाठ्यक्रम के गुण - एक अच्छे पाठ्यक्रम में निम्न गुणों का समावेश होना चाहिये-
1. पाठ्यक्रम रचनात्मक से पूर्ण होना चाहिये तथा उसका सम्बन्ध वास्तविकता से होना चाहिए।
2. पाठ्यक्रम इस प्रकार का हो जो व्यक्ति के आगामी जीवन का विकास करे तथा उसे सकारात्मक रूप से प्रभावित करे। पाठ्यक्रम में खेल-कूद तथा कार्य में अन्योन्याश्रित सम्बन्ध होना चाहिए।
3. पाठ्यक्रम इस प्रकार का हो कि उससे बच्चों का आचरण व चरित्र का निर्माण हो तथा स्वास्थ्य, ज्ञान, बुद्धि, विवेक, कौशल आदि गुणों का विकास हो।
4. पाठ्यक्रम से सामुदायिक विकास हो।
5. खेल-कूद व सामाजिक कार्यों में भागीदारी होनी चाहिये।
कोठारी कमीशन ने प्राथमिक शिक्षा के लिए निम्न प्रकार के पाठ्यक्रम को अपनाने का सुझाव दिया है।
1. निम्न प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-कक्षा 4)
(i) एक भाषा (मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा),
(ii) गणित,
(ii) हिन्दी या अंग्रेजी,
(iii) वातावरण का अध्ययन (कक्षा 3-कक्षा 4),
(iv) सजुनात्मक क्रियायें,
(v) कार्यानुभव व समाज सेवा,
(vi) स्वास्थ्य शिक्षा।
2. उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 5 कक्षा 8)
(i) मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा,
(ii) हिन्दी या अंग्रेजी,
(iii) गणित,
(v) सामाजिक अध्ययन,
(vii) कार्यानुभव,
(ix) नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा।
(iv) विज्ञान,
(vi) कला,
(viii) शारीरिक शिक्षा.
पाठ्यक्रम के सम्बन्ध में कोठारी कमीशन के अनुसार- "छात्रों के चरित्र को गढ़ने तथा उनमें दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान की भावना पैदा करने के उद्देश्य से नैतिकता तथा आध्यात्मिकता की शिक्षा देनी चाहिये। इसके लिए सप्ताह में एक या दो घण्टे नियत कर देने चाहिये तथा सामाजिक सेवा के कार्यों में स्थानीय सामाजिक जीवन में भाग लेना सम्भावित होना चाहिये।"
इस प्रकार के पाठ्यक्रमों को अपनाने से प्राथमिक शिक्षा पूर्ण रूप से निर्धारित राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का एक अंग बन जायेगी।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










