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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- भारत में प्राथमिक शिक्षा के विकास को समझाइये।
उत्तर-
प्राथमिक शिक्षा का विकास मानव सभ्यता के इतिहास जितना ही पुराना है।
प्राचीनकाल में प्राथमिक शिक्षा- प्राचीनकाल में शिक्षा का परिचय गुरुकुलों में प्राप्त होता है। विद्या का आरम्भ संस्कार "ओम नमः सिद्धम" के उच्चारण से किया जाता था। उपनयन संस्कार की आयु 8,11,12 वर्ष थी। पाठ्यक्रम में वेद वेदाग, व्याकरण, साहित्य, छन्द, निरुक्त कल्पज्योतीष, गणित, चिकित्सा आदि विषय थे। याद करना व सीखना दोनों प्रणाली प्रचलित थी। गुरु दक्षिणा के रूप शुल्क दिया जाता था। कहीं-कही सहशिक्षा के बारे मे भी पता चलता है। शिक्षा के सत्र का प्रारम्भ श्रवण मास की पूर्णिमा को प्रारम्भ होता था तथा पौष के माह में छन्दमास उर्त्सजन होता था। स्त्री शिक्षा के लिए उपाध्याया होती थी। शिक्षा समापवर्तन के समय कमण्डल से जल विसर्जित किया जाता था। बाद में लगभग 450 ई. पूर्व तक तख्ती, रटन्ट, खेल आदि पद्धति का समावेश हो चुका था
मुस्लिम युग में प्राथमिक शिक्षा- मुस्लिम काल में शिक्षा का मूलभूत उद्देश्य धर्म की साधना था। मकतबों में प्रवेश से पूर्व "मकतब रस्म" की अदायगी करनी होती थी। मदरसों में प्राथमिक से प्रारम्भ होकर उच्च स्तर तक शिक्षा की व्यवस्था थी। मुस्लिम काल में अरबी तथा फारसी का प्रयोग माध्यम भाषा के रूप में होता था। मुस्लिम काल में जीवन को आध्यात्मिक व सैद्धान्तिक रूप के स्थान पर व्यावहारिक व सांसारिक बातों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
ब्रिटिश युग में प्राथमिक शिक्षा
ब्रिटिश काल में ईस्ट इण्डिया कम्पनी से लेकर ब्रिटिश शासन तक सभी के काल में भारत में शिक्षा पद्धति ने नवीन दिशा ग्रहण की। ईसाई धर्म के प्रचार के लिए आई हुई मिशनरियों के द्वारा ईसाई धर्म के प्रचारक भारत में शिक्षा का प्रसार करना चाहते थे। 1813 में आज्ञा-पत्र के अनुसार, भारतवासियों को शिक्षा का प्रावधान किया गया। 1835 में लार्ड मैकाले ने नयी शिक्षा नीति की घोषणा की तथा शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी भाषा को रखा तथा उसका यह मानना था कि अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने से भारत में जो पीढ़ी पैदा होगी वह कुछ समय बाद रंग, नस्ल, खून व राष्ट्रीयता से तो भारतीय होगी परन्तु विचारों, स्वामि-भक्ति में अंग्रेज होंगे।
एडम्स ने 1835, 1836, 1839 में शिक्षा के प्रचार के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत किये अपने प्रथम प्रतिवेदन में एडम्स ने बंगाल व बिहार में 1,00,000 विद्यालय बताये अर्थात् लगभग चार सौ भारतीयों पर एक विद्यालय था।
1931 में सर हटांग ने कहा था कि प्राथमिक शिक्षा का प्रसार उस समय से 50 वर्ष की तुलना अधिक है। प्राथमिक शिक्षा के सन्दर्भ में सर हटींग ने निम्न तथ्य प्रस्तुत किये-
1. प्राथमिक विद्यालयों का पाठ्यक्रम अधिक विस्तृत नहीं था।
2. उस काल में एक अध्यापक विद्यालय का प्रचलन अधिक था।
3. शिक्षा की पद्धति परम्परागत थी उसमें नवीनता का कोई प्रयास नहीं किया गया था।-
4. शिक्षण पद्धति को देखते हुये पाठ्य-पुस्तकें उपयुक्त नहीं थीं।
5. पढ़ाई में दण्ड का भय अधिक था। बालकों में शिक्षा के प्रति रुचि नहीं थी तथा विद्यालयों में कठोर दण्ड का प्रावधान था।
6. उपस्थिति तथा शिक्षण में व्यतिक्रम था।
ईसाई मिशनरियों द्वारा किये गये कार्य- ईसाई धर्म प्रचारक अपने धर्म के प्रचार के लिए भारत में आये थे तथा इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने विद्यालय खोले थे।
उन मिशनरियों के कार्य निम्न थे-
1. प्राथमिक पाठशालायें स्थापित की गई।
2. धार्मिक शिक्षा बाईबिल के माध्यम से प्रदान की जाती थी जो अनिवार्य भी थी।
3. इनके पाठ्यक्रम में व्याकरण, इतिहास व भूगोल का समावेश था।
4. छपी हुई पाठ्य-पुस्तकें भारत में प्रथम बार भारत में प्रथम बार प्रचलित की गई थीं।
5. नियमित कक्षाओं की व्यवस्था थी। रविवार छुट्टी का दिन होता था।
6. भाषा का माध्यम मातृभाषा थी।
ब्रिटिश शासन व्यवस्था- जब 1859 में कम्पनी का शासन समाप्त हो गया तब भारत की नियति का विधाता ब्रिटिश राजसत्ता हो गयी।
उनके काल में शिक्षा की निम्न प्रकार से व्यवस्था हुई-
1. 1859 में स्टेनली डिस्पेच ने माना कि शिक्षा के लिए धन की आवश्यकता है।
2. 1864 में लोकल सैंस एक्ट प्राथमिक शिक्षा के लिए पास किया गया
3. भारतीय रियासतों, राज्यों व सरकार के नियन्त्रण में प्राइवेट विद्यालय काम करने लगे।
4. 1884 में प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था स्वराज्य को सौंप दी गई परन्तु आर्थिक कठिनाइयों से स्थानीय प्रशासन इस कार्य को अंजाम न दे सका।
धीमी प्रगति के कारण- ब्रिटिश शासन काल में शिक्षा का प्रसार निम्न कारणों से धीमा रहा-
1. भारतीय शिक्षा पद्धति को नष्ट करने का हर सम्भव प्रयत्न किया गया।
2. जनशिक्षा देने वाली संस्थाओं को समाप्त कर दिया गया।
3. ब्रिटिश सरकार ने शिक्षा को वर्ग विशेष के लिए सीमित कर दिया।
प्रान्तों के प्रयत्न- प्रान्तों के प्रयत्न में शिक्षा का प्रसार निम्न कारणों से धीमा रहा-
1. 1880 में मुम्बई में सभी के लिए शिक्षा की घोषणा हुई तथा 1885 में कांग्रेस के गठन के बाद इब्राहिम रहमतुल्ला, चिमनलाल सीतलवाड़ आदि के प्रयत्नों से शिक्षा का प्रसार हुआ।
2. बड़ौदा में 1893 में अमरेली तथा 1906 में सम्पूर्ण रियासत में अनिवार्य शिक्षा व्यवस्था की गई।
3. गोखले ने सबसे पहले 6 से 10 वर्ष के बालकों के लिए अनिवार्य शिक्षा पर एक बिल पेश किया जो पास न हो सका।
4. 1918 में प्रान्तीय परिषदों ने शिक्षा के विषय में कानून पास किये। मुम्बई नगरपालिका की प्रान्तीय परिषदों ने शिक्षा के सन्दर्भ में कानून बनवाया लेकिन कोई आर्थिक व्यवस्था नहीं की गयी थी।
5. 1919 में हींग समिति ने इस सम्बन्ध में अपने सुझावों को पेश किया।
6. भारत के प्रान्तों में कांग्रेस का शासन आने पर शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक कार्य किये गये। 1939 में कांग्रेस ने प्रान्तीय सरकारों से इस्तीफा दे दिया तो शिक्षा का विकास रुक गया।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










