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प्राचीन भारतीय और पुरातत्व इतिहास >> बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2794
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति के विकास का वर्णन कीजिए।

अथवा
उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विवेचन कीजिए।

उत्तर-

उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति प्रतिनूतन काल के अन्तिम चरण को प्रदर्शित करती है एवं मध्यपाषाण काल के उपरान्त विकसित होती है। अल्पावशेष होने के कारण भारत में इस संस्कृति की उत्पत्ति एवं विकास के विषय में विद्वानों में मतभेद था किन्तु पिछले तीन दशकों से विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण के फलस्वरूप इस संस्कृति के अवशेष प्रकाश में आए, तदुपरान्त यह संस्कृति भली भाँति प्रस्थापित हुई। अनेक स्थलों पर उत्खनन करने पर इस संस्कृति के उपकरण मध्यपुरापाषाण काल एवं मध्यपाषाण कालीन सतहों के मध्य अलग-अलग स्तर से प्राप्त होते हैं। ये अवशेष इस संस्कृति की प्रमाणिकता को सिद्ध करते हैं। मध्य प्रदेश में भीम बैठक, महाराष्ट्र में पाटने एवं आन्ध्र प्रदेश में नदी पाल्ले प्रमुख उल्लेखनीय स्थल हैं। इस संस्कृति के प्रमाण देश की प्रमुख नदियों के किनारे भी प्राप्त हुए हैं, जहाँ पर ये उपकरण सतह पर तृतीय ग्रैवेल (सैण्डी ग्रैवेल एवं उच्चस्तरीय ग्रैवेल) से प्राप्त होते हैं। उपकरणों के अतिरिक्त अन्य कई प्रकार की सामग्रियाँ इस सांस्कृतिक जमाव से उपलब्ध होती हैं जिससे प्रतिनूतन काल के अन्तिम चरण की तिथि के साथ-साथ जलवायु, रहन-सहन आदि के विषय में पर्याप्त जानकारी मिलती है।

भारत में उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति के अवशेषों की खोज पिछली शताब्दी में की जा चुकी थी। आन्ध्र प्रदेश विलासरगम एवं कुरनूल की गुफाओं के उत्खनन के परिणामस्वरूप आर. वी. फूट को इस संस्कृति के प्रमाण प्राप्त हुए थे। कालान्तर में देश के ही समुद्री क्षेत्र में स्थित कुरनूल जिले में नदियों के किनारों से कैमियड एवं वरकिट द्वारा संस्कृतियों से युक्त जमाव प्रकाश में लाये गये।

उन्होंने इन संस्कृतियों का नामकरण सिरीज I, II, III एवं IV किया जोकि यूरोपिय निम्न, मध्य, उत्तर पुरापाषाण एवं मध्यपाषाण कालीन संस्कृतियों के समकक्ष थी। टॉड द्वारा बम्बई के कांदीवली बोरीविलि से क्रमशः तीन संस्कृतियों मध्य, उत्तर पुरापाषाण काल एवं मध्यपाषाण कालीन स्तर खोजे गए। सौन्दरा राजन को गिछलर के कैमियड की तुलना के सिरीज तीन के उपकरण प्राप्त हुए। अनेक क्षेत्रों में तत्कालीन संस्कृति को दृष्टिगत रखते हुए गोर्डन ने इस संस्कृति की समीक्षा इन शब्दों में की थी- 

" In India elsewhere there was a late upper. Palaeolithic blade and burin industry corresponding to late Megdalenian followed in succession by larger less geometric and smaller more geometric microlithic ”

( मूर्ति 1981-83 से उद्धृत) कालान्तर में उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति की सम्भावना को ध्यान में रखकर भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण किए गए जिसके परिणामस्वरूप इस संस्कृति के अवशेष गोराहिल (आसाम), पालमू क्षेत्र (बिहार), इन्द्रावली घाटी (उड़ीसा), बेलन घाटी एवं बरियारी, बाँदा क्षेत्र (उत्तर प्रदेश), बैन गंगा, महानदी, बाजनेर नदी, भीम बैठका एवं सोन घाटी (मध्य प्रदेश), बुधा पुष्कर क्षेत्र (राजस्थान), प्रवरा नदी पाटने, इनाम गाँव, भोकर क्षेत्र (महाराष्ट्र), नागार्जुन, कूरनूल, रेनीगुण्टा, कडप्पा, पेलरू घाटी (आन्ध्र प्रदेश) एवं सालवडगी, मेरालभावी क्षेत्र (कर्नाटक) से अनेक उत्तर पुरापाषाण कालीन स्थल प्रकाश में आयें और अतंतः यह संस्कृति विधिवत् प्रस्थापित हुई।

स्तरीकरण - विभिन्न स्तरीकृत जमावों में भी इस संस्कृति के अवशेष प्राप्त होते हैं। सतही स्थलों के अतिरिक्त यह संस्कृति तृतीय गैवेल (जैसे वेलन घाटी, सगीलरू बेसिन) उच्चस्तरीय ग्रैवेल (महानदी घाटी) से संबन्धित हैं। घाटी से यह द्वितीय ग्रैवेल से भी प्राप्त होती है। अनेक स्थलों में उत्खनन के फलस्वरूप इस संस्कृति की स्थिति अधिक स्पष्ट होती है। यह संस्कृति अलग स्तरीकरण के मध्य पुरापाषाण के ऊपर एवं मध्यपाषाण काल के नीचे भिन्न स्तर से प्राप्त होती है जिससे इस संस्कृति की स्वायत्तता प्रदर्शित होती है।

उपकरण: प्रकार एवं सांस्कृतिक प्रसार - इस संस्कृति से सम्बन्धित उपकरण भी प्राप्त होते हैं। मध्य पुरापाषाण कालीन उपकरण की तुलना में ये उपकरण अधिक विकसित हैं। ये उपकरण अपेक्षाकृत अधिक लम्बे व पतले हैं। कोर से निकाले गये ब्लेड अधिक मात्रा में हैं। इन पर उत्तम प्रकार की रिटचिंग एवं ब्लांटिंग इस संस्कृति की तकनीकी विशेषताएँ हैं। ब्लेड एवं. ब्यूरिन इस काल के प्रमुख उपकरण हैं। रिटचिंग के उपरान्त कई प्रकार के उल्लेखनीय ब्लेड उपकरणों का निर्माण किया गया, जिसमें एकपक्षीय, द्विपक्षीय ब्लंटेड ब्लेड एवं ओवलिक रिटच्ड ब्लंटेड मुख्य हैं। ब्लंटिग के अतिरिक्त अन्य उपकरण भी प्राप्त होते हैं, जैसे- लूनेट, ट्रायंगल आदि उपकरणों के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के प्वाइण्ट एवं स्क्रैपर भी प्राप्त होते हैं। इस संस्कृति में दण्ड स्क्रैपर की मात्रा अधिक हो जाती है। कभी-कभी ये ब्लेड के समकक्ष दिखते हैं एवं इन्हें फ्लेक ब्लेड की संज्ञा दी गयी है। जहाँ स्तरीकृत जमाव से संस्कृतियाँ प्राप्त हुई हैं वहाँ मध्य पुरापाषाण काल के उपरान्त इस संस्कृति जमाव से संस्कृति का विकास दृष्टिगोचर होता है।

अन्य देशों की तरह भारत में भी विभिन्न स्थलों से उत्तर पाषाण कालीन संस्कृति के प्रमाण प्राप्त होते हैं। ये उपलब्धियाँ इस संस्कृति के क्रमबद्ध विकास को दर्शाती हैं। भारत में प्राप्त इस संस्कृति के अवशेषों में विविधता दिखाई देती है। इस काल में विभिन्न प्रकार के पाषाण द्वारा उपकरणों का निर्माण किया गया है। कहीं-कहीं पर मुख्यतः चर्ट चाल्सी डोनी, अगेट, जैस्पर आदि मुलायम पाषाणों का उपयोग किया गया है तो कहीं-कहीं पर क्वार्टजाइट का प्रयोग मिलता है। जहाँ पर पेबुल का प्रयोग किया गया है वहाँ उपकरणों के आकार छोटे हैं एवं जहाँ पर पाषाण खण्ड से बनाये गए हैं वहाँ उपकरणों का आकार अपेक्षाकृत बड़ा है। अतः उपकरणों के आकार- प्रकार में विविधता है। उपकरण के प्रकार के आधार पर डॉ. मूर्ति द्वारा इस संस्कृति में तीन भिन्न समूह पहचाने गये हैं- (1) फ्लेक-ब्लेड उपकरण समूह, (2) ब्लेड उपकरण समूह, एवं (3) ब्लेड या ब्यूरिन उपकरण समूह। इस सन्दर्भ में यह विशेष उल्लेखनीय है कि समूह किसी समय या क्रम को प्रदर्शित नहीं करते और न ही किसी क्षेत्रीय विभाजन के विषय में इनसे जानकारी मिलती है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- पुरातत्व क्या है? इसकी विषय-वस्तु का निरूपण कीजिए।
  2. प्रश्न- पुरातत्व का मानविकी तथा अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  3. प्रश्न- पुरातत्व विज्ञान के स्वरूप या प्रकृति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  4. प्रश्न- 'पुरातत्व के अभाव में इतिहास अपंग है। इस कथन को समझाइए।
  5. प्रश्न- इतिहास का पुरातत्व शस्त्र के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
  6. प्रश्न- भारत में पुरातत्व पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  7. प्रश्न- पुरातत्व सामग्री के क्षेत्रों का विश्लेषण अध्ययन कीजिये।
  8. प्रश्न- भारत के पुरातत्व के ह्रास होने के क्या कारण हैं?
  9. प्रश्न- प्राचीन इतिहास की संरचना में पुरातात्विक स्रोतों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  10. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में पुरातत्व का महत्व बताइए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  12. प्रश्न- स्तम्भ लेख के विषय में आप क्या जानते हैं?
  13. प्रश्न- स्मारकों से प्राचीन भारतीय इतिहास की क्या जानकारी प्रात होती है?
  14. प्रश्न- पुरातत्व के उद्देश्यों से अवगत कराइये।
  15. प्रश्न- पुरातत्व के विकास के विषय में बताइये।
  16. प्रश्न- पुरातात्विक विज्ञान के विषय में बताइये।
  17. प्रश्न- ऑगस्टस पिट, विलियम फ्लिंडर्स पेट्री व सर मोर्टिमर व्हीलर के विषय में बताइये।
  18. प्रश्न- उत्खनन के विभिन्न सिद्धान्तों तथा प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
  19. प्रश्न- पुरातत्व में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज उत्खननों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  20. प्रश्न- डेटिंग मुख्य रूप से उत्खनन के बाद की जाती है, क्यों। कारणों का उल्लेख कीजिए।
  21. प्रश्न- डेटिंग (Dating) क्या है? विस्तृत रूप से बताइये।
  22. प्रश्न- कार्बन-14 की सीमाओं को बताइये।
  23. प्रश्न- उत्खनन व विश्लेषण (पुरातत्व के अंग) के विषय में बताइये।
  24. प्रश्न- रिमोट सेंसिंग, Lidar लेजर अल्टीमीटर के विषय में बताइये।
  25. प्रश्न- लम्बवत् और क्षैतिज उत्खनन में पारस्परिक सम्बन्धों को निरूपित कीजिए।
  26. प्रश्न- क्षैतिज उत्खनन के लाभों एवं हानियों पर प्रकाश डालिए।
  27. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  28. प्रश्न- निम्न पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  29. प्रश्न- उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति के विकास का वर्णन कीजिए।
  30. प्रश्न- भारत की मध्यपाषाणिक संस्कृति पर एक वृहद लेख लिखिए।
  31. प्रश्न- मध्यपाषाण काल की संस्कृति का महत्व पूर्ववर्ती संस्कृतियों से अधिक है? विस्तृत विवेचन कीजिए।
  32. प्रश्न- भारत में नवपाषाण कालीन संस्कृति के विस्तार का वर्णन कीजिये।
  33. प्रश्न- भारतीय पाषाणिक संस्कृति को कितने कालों में विभाजित किया गया है?
  34. प्रश्न- पुरापाषाण काल पर एक लघु लेख लिखिए।
  35. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन मृद्भाण्डों पर टिप्पणी लिखिए।
  36. प्रश्न- पूर्व पाषाण काल के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  37. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन शवाशेष पद्धति पर टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- मध्यपाषाण काल से आप क्या समझते हैं?
  39. प्रश्न- मध्यपाषाण कालीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।।
  40. प्रश्न- मध्यपाषाणकालीन संस्कृति का विस्तार या प्रसार क्षेत्र स्पष्ट कीजिए।
  41. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र के मध्यपाषाणिक उपकरणों पर प्रकाश डालिए।
  42. प्रश्न- गंगा घाटी की मध्यपाषाण कालीन संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  43. प्रश्न- नवपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिये।
  44. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- दक्षिण भारत की नवपाषाण कालीन संस्कृति के विषय में बताइए।
  46. प्रश्न- मध्य गंगा घाटी की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  47. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति से आप क्या समझते हैं? भारत में इसके विस्तार का उल्लेख कीजिए।
  48. प्रश्न- जोर्वे-ताम्रपाषाणिक संस्कृति की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  49. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  50. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  51. प्रश्न- आहार संस्कृति का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- जोर्वे संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  54. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के औजार क्या थे?
  55. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालिए।
  56. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता के नामकरण और उसके भौगोलिक विस्तार की विवेचना कीजिए।
  57. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता की नगर योजना का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  58. प्रश्न- हड़प्पा सभ्यता के नगरों के नगर- विन्यास पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  59. प्रश्न- सिन्धु घाटी के लोगों की शारीरिक विशेषताओं का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  60. प्रश्न- पाषाण प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी लिखिए।
  61. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के सामाजिक संगठन पर टिप्पणी कीजिए।
  62. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के कला और धर्म पर टिप्पणी कीजिए।
  63. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के व्यापार का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
  64. प्रश्न- सिंधु सभ्यता की लिपि पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  65. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के पतन के कारणों पर प्रकाश डालिए।
  66. प्रश्न- लौह उत्पत्ति के सम्बन्ध में पुरैतिहासिक व ऐतिहासिक काल के विचारों से अवगत कराइये?
  67. प्रश्न- लोहे की उत्पत्ति (भारत में) के विषय में विभिन्न चर्चाओं से अवगत कराइये।
  68. प्रश्न- "ताम्र की अपेक्षा, लोहे की महत्ता उसकी कठोरता न होकर उसकी प्रचुरता में है" कथन को समझाइये।
  69. प्रश्न- महापाषाण संस्कृति के विषय में आप क्या जानते हैं? स्पष्ट कीजिए।
  70. प्रश्न- लौह युग की भारत में प्राचीनता से अवगत कराइये।
  71. प्रश्न- बलूचिस्तान में लौह की उत्पत्ति से सम्बन्धित मतों से अवगत कराइये?
  72. प्रश्न- भारत में लौह-प्रयोक्ता संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  73. प्रश्न- प्राचीन मृद्भाण्ड परम्परा से आप क्या समझते हैं? गैरिक मृद्भाण्ड (OCP) संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  74. प्रश्न- चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (PGW) के विषय में विस्तार से समझाइए।
  75. प्रश्न- उत्तरी काले चमकदार मृद्भाण्ड (NBPW) के विषय में संक्षेप में बताइए।
  76. प्रश्न- एन. बी. पी. मृद्भाण्ड संस्कृति का कालानुक्रम बताइए।
  77. प्रश्न- मालवा की मृद्भाण्ड परम्परा के विषय में बताइए।
  78. प्रश्न- पी. जी. डब्ल्यू. मृद्भाण्ड के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  79. प्रश्न- प्राचीन भारत में प्रयुक्त लिपियों के प्रकार तथा नाम बताइए।
  80. प्रश्न- मौर्यकालीन ब्राह्मी लिपि पर प्रकाश डालिए।
  81. प्रश्न- प्राचीन भारत की प्रमुख खरोष्ठी तथा ब्राह्मी लिपियों पर प्रकाश डालिए।
  82. प्रश्न- अक्षरों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  83. प्रश्न- अशोक के अभिलेख की लिपि बताइए।
  84. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में अभिलेखों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
  85. प्रश्न- अभिलेख किसे कहते हैं? और प्रालेख से किस प्रकार भिन्न हैं?
  86. प्रश्न- प्राचीन भारतीय अभिलेखों से सामाजिक जीवन पर क्या प्रकाश पड़ता है?
  87. प्रश्न- अशोक के स्तम्भ लेखों के विषय में बताइये।
  88. प्रश्न- अशोक के रूमेन्देई स्तम्भ लेख का सार बताइए।
  89. प्रश्न- अभिलेख के प्रकार बताइए।
  90. प्रश्न- समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति के विषय में बताइए।
  91. प्रश्न- जूनागढ़ अभिलेख से किस राजा के विषय में जानकारी मिलती है उसके विषय में आप सूक्ष्म में बताइए।
  92. प्रश्न- मुद्रा बनाने की रीतियों का उल्लेख करते हुए उनकी वैज्ञानिकता को सिद्ध कीजिए।
  93. प्रश्न- भारत में मुद्रा की प्राचीनता पर प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- प्राचीन भारत में मुद्रा निर्माण की साँचा विधि का वर्णन कीजिए।
  95. प्रश्न- मुद्रा निर्माण की ठप्पा विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  96. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्कों) की मुख्य विशेषताओं एवं तिथिक्रम का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- मौर्यकालीन सिक्कों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत कीजिए।
  98. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्के) से आप क्या समझते हैं?
  99. प्रश्न- आहत सिक्कों के प्रकार बताइये।
  100. प्रश्न- पंचमार्क सिक्कों का महत्व बताइए।
  101. प्रश्न- कुषाणकालीन सिक्कों के इतिहास का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  102. प्रश्न- भारतीय यूनानी सिक्कों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
  103. प्रश्न- कुषाण कालीन सिक्कों के उद्भव एवं प्राचीनता को संक्षेप में बताइए।
  104. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का परिचय दीजिए।
  105. प्रश्न- गुप्तकालीन ताम्र सिक्कों पर टिप्पणी लिखिए।
  106. प्रश्न- उत्तर गुप्तकालीन मुद्रा का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  107. प्रश्न- समुद्रगुप्त के स्वर्ण सिक्कों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  108. प्रश्न- गुप्त सिक्कों की बनावट पर टिप्पणी लिखिए।
  109. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का ऐतिहासिक महत्व बताइए।
  110. प्रश्न- इतिहास के अध्ययन हेतु अभिलेख अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। विवेचना कीजिए।
  111. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में सिक्कों के महत्व की विवेचना कीजिए।
  112. प्रश्न- प्राचीन सिक्कों से शासकों की धार्मिक अभिरुचियों का ज्ञान किस प्रकार प्राप्त होता है?
  113. प्रश्न- हड़प्पा की मुद्राओं के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  114. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  115. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत के रूप में सिक्कों का महत्व बताइए।

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