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प्राचीन भारतीय और पुरातत्व इतिहास >> बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2794
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- भारत की मध्यपाषाणिक संस्कृति पर एक वृहद लेख लिखिए।

अथवा
मध्य पाषाणकालीन संस्कृति पर विस्तृत निबन्ध लिखिए।
अथवा
मध्य पाषाणकालीन संस्कृति पर एक निबंध लिखिए।

उत्तर-

मध्य पाषाणकालीन संस्कृति

मध्य पाषाणकालीन संस्कृति के विषय में सर्वप्रथम जानकारी 1867 ई. में सी. एल. कार्लाइल द्वारा विन्ध्य क्षेत्र से लघु पाषाण उपकरण खोजने के दौरान हुई। इसके बाद देश के विभिन्न स्थलों से इस प्रकार के पाषाण उपकरण खोज निकाले गये। इन उपकरणों के विस्तृत भू-भाग पर फैले होने के कारण यह स्पष्ट है कि इस काल का मानव अपेक्षाकृत एक विस्तृत भू-भाग में निवास करता था।

मानव-जीवन - मध्य पाषाण काल के लोगों का जीवन पूर्व-पाषाण काल के लोगों की अपेक्षा कुछ भिन्न था। यद्यपि अब भी वे अधिकांश रूप में शिकार पर ही निर्भर थे तथापि इस काल के लोग गाय, बैल, भेड़, बकरी, जंगली घोड़े तथा भैंसे आदि का शिकार भी करने लगे थे। उन्होंने थोड़ी-बहुत कृषि भी करना सीख लिया था। अपने अस्तित्व के अन्तिम चरण तक उन्होंने बर्तनों को निर्माण करना भी सीख लिया था। पशुओं से धीरे-धीरे उनका परिचय बढ़ रहा था। सरायनाहर राय तथा महदाहा की समाधियों से इस काल के लोगों की अन्त्येष्टि संस्कार विधि के विषय में कुछ जानकारी मिलती है। ऐसा अनुमान है कि ये अपने मृतकों को समाधियों में गाड़ते थे तथा उनके साथ खाद्य सामग्रियाँ, औजार- हथियार भी रख देते थे।

उपकरण - मध्य पाषाण काल के उपकरण अत्यन्त छोटे आकार के प्राप्त हुए हैं। ये लगभग आधे इंच से लेकर पौन इंच के बराबर हैं। इनमें टेढ़े ब्लेड, छिद्रक, स्क्रेपर, ब्यूरिन, बेधक, चान्द्रिक आदि प्रमुख हैं। कुछ स्थानों से हड्डी तथा सींग के बने हुए उपकरण भी मिले हैं। पाषाण उपकरण चर्ट, चाल्सेडनी, जैस्परं, एगट, क्वार्टजाइट, फ्लिन्ट जैसे कीमती पत्थरों के हैं। कुछ उपकरण त्रिभुज तथा समलम्ब चतुर्भुज के आकार के हैं।

मध्य पाषाणकालीन संस्कृति के विभिन्न पुरास्थल

भारत में मध्य पाषाण काल के पुरास्थल राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागों में स्थित हैं जहाँ से पुरातत्ववेत्ताओं ने उत्खनन के फलस्वरूप पाषाण के लघु उपकरण प्राप्त किये हैं। मध्य पाषाण काल के जिन स्थानों की खुदाइयाँ हुई हैं उनमें कब्रिस्तानों की संख्या अधिक है। यह एक उल्लेखनीय तथ्य है कि भारत में मानव अस्थिपंजर मध्य पाषाण काल से ही सर्वप्रथम प्राप्त होने लगते हैं।

राजस्थान - राजस्थान का सबसे प्रमुख स्थल भीलवाड़ा जिले में स्थित बागोर है। यहाँ वी. एन. मिश्र ने 1968 से 1970 तक उत्खनन कार्य करवाया था। यहाँ से मध्य पाषाणकालीन उपकरणों के अतिरिक्त लौह काल के उपकरण भी प्राप्त हुए हैं। यहाँ से एक मानव कंकाल भी मिला है।

गुजरात - गुजरात प्रान्त में स्थित लंघनाज सबसे महत्वपूर्ण पुरास्थल है जहाँ एच. डी. संकालिया, बी. सुब्बाराव, ए. आर. कनेडी आदि पुराविदों द्वारा व्यापक उत्खनन कार्य करवाया गया था। यहाँ से पाषाण के लघु उपकरणों के अतिरिक्त पशुओं की हड्डियाँ, कब्रिस्तान तथा कुछ मिट्टी के बर्तन भी प्राप्त हुए हैं। पाषाण के उपकरणों में फ्लेक ही अधिक हैं। यहाँ से चौदह मानव कंकाल मिले हैं।

आन्ध्र प्रदेश व कर्नाटक - आन्ध्र प्रदेश में नागार्जुनकोण्ड, गिद्दलूर तथा रेनिगुन्टा प्रमुख स्थल हैं जहाँ से मध्यपाषाणिक उपकरण प्रकाश में आये हैं। इसी प्रकार कर्नाटक में बेल्लारी जिले में स्थित संगनकल्लू नामक स्थान पर सुब्बाराव तथा संकालिया द्वारा क्रमशः 1946 तथा 1969 में खुदाइयाँ करवायी गयीं जिसके फलस्वरूप अनेक उपकरण प्राप्त हुए।

मध्य प्रदेश - आर. वी. जोशी ने 1964 ई. में होशंगाबाद जिले में स्थित आदमगढ़ शैलाश्रय से लगभग 25 हजार पाषाण के लघु उपकरण प्राप्त किये थे। इसी प्रकार रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका के शैलाश्रयों और गुफाओं से मध्य पाषाण काल के उपकरण प्राप्त हुए यहाँ से मानव अन्त्येष्टि के भी प्रमाण मिले हैं।

बिहार तथा पश्चिम बंगाल - बिहार प्रान्त के रांची, पलामू, भागलपुर, राजगीर आदि जिलों से अनेक पाषाण के लघु उपकरण मिले हैं। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में स्थित बीरभानपुर एक महत्वपूर्ण मध्यपाषाणिक पुरास्थल है जहाँ 1954 से 1957 ई. तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से बी. बी. लाल ने उत्खनन कार्य करवाया था। यहाँ से लगभग 282 लघु उपकरण मिले हैं जिनमें ब्लेड, बेधक, ब्यूरिन, चान्द्रिक, स्क्रेपर, छिद्रक आदि मुख्य हैं।

उत्तर प्रदेश - उत्तर प्रदेश का विन्ध्य तथा ऊपरी एवं मध्य गंगा घाटी वाला क्षेत्र मध्य पाषाणकालीन उपकरणों के लिये अत्यन्त समृद्ध है। विन्ध्य क्षेत्र के अन्तर्गत वाराणसी जिले की चकिया तहसील, मिर्जापुर जिला, इलाहाबाद की मेजा, करछना, तथा बारा तहसीलों के साथ-साथ बुन्देलखण्ड क्षेत्र को शामिल किया जाता है। इन स्थानों से बहुसंख्यक पाषाण के लघु उपकरणों के साथ-साथ नर कंकाल भी मिले हैं जिनमें से अधिकांश के सिर पश्चिम दिशा में हैं। मिर्जापुर जिले से प्राप्त पाषाण के लघु उपकरणों में एक विकास-क्रम देखने को मिलता है। यहाँ के उपकरण क्रमशः लघुतर होते गये हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ की खुदाई से झोपड़ियों के भी प्रमाण मिलते हैं। प्रतापगढ़ जिले में स्थित सरायनाहर राय, महदाहा तथा दमदमा नामक मध्यपाषाणिक पुरास्थलों का उत्खनन जी. आर. शर्मा तथा उनके सहयोगियों द्वारा करवाया गया। सरायनाहर राय के पाषाण के लघु उपकरण कुण्ठित ब्लेड, स्क्रेपर, चान्द्रिक, बेधक, समबाहु एवं विषमभाहु त्रिभुज आदि हैं जिनके निर्माण में चर्ट, चाल्सिडनी, एगेट, जैस्पर आदि पत्थरों का प्रयोग हुआ है। कुछ . अस्थि - निर्मित तथा कुछ सींग-निर्मित उपकरण भी मिलते हैं। उपकरणों के अतिरिक्त यहाँ की खुदाई में 14 शवाधान तथा 8 गर्त चूल्हे भी प्राप्त हुए हैं। शवाधानों से तत्कालीन मृतक - संस्कार पर प्रकाश पड़ता है। समाधिस्थ शवों का सिर पश्चिम तथा पैर पूर्व की ओर मिले हैं जिनके साथ लघु उपकरण भी रखे गये हैं। चूल्हों से पशुओं की अधजली हड्डियों के मिलने से अनुमान लगाया जाता है कि इनका उपयोग मांस भूनने के लिये किया जाता था।

इस प्रकार स्पष्ट है कि मध्यपाषाणिक संस्कृति राजस्थान से लेकर मेघालय तक और उत्तर प्रदेश से लेकर कृष्णा नदी तक प्राप्त हुई है। बागोर तथा तिलवार (राजस्थान) इस युग के प्रमुख स्थल हैं।। बागोर में मध्य पाषाण युग में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। गुजरात में लंघनाज, बलसाआ तथा आदमगढ़ (मध्य प्रदेश) से भी पशुपालन के साक्ष्य मिले हैं। संगनकल (कर्नाटक), रेणीगुंटा (आन्ध्र प्रदेश), तिन्नेवेली (तमिलनाडु), मयूरभंज (बिहार) तथा सेबालगिरि (मेघालय) से इस संस्कृति के पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- पुरातत्व क्या है? इसकी विषय-वस्तु का निरूपण कीजिए।
  2. प्रश्न- पुरातत्व का मानविकी तथा अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  3. प्रश्न- पुरातत्व विज्ञान के स्वरूप या प्रकृति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  4. प्रश्न- 'पुरातत्व के अभाव में इतिहास अपंग है। इस कथन को समझाइए।
  5. प्रश्न- इतिहास का पुरातत्व शस्त्र के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
  6. प्रश्न- भारत में पुरातत्व पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  7. प्रश्न- पुरातत्व सामग्री के क्षेत्रों का विश्लेषण अध्ययन कीजिये।
  8. प्रश्न- भारत के पुरातत्व के ह्रास होने के क्या कारण हैं?
  9. प्रश्न- प्राचीन इतिहास की संरचना में पुरातात्विक स्रोतों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  10. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में पुरातत्व का महत्व बताइए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  12. प्रश्न- स्तम्भ लेख के विषय में आप क्या जानते हैं?
  13. प्रश्न- स्मारकों से प्राचीन भारतीय इतिहास की क्या जानकारी प्रात होती है?
  14. प्रश्न- पुरातत्व के उद्देश्यों से अवगत कराइये।
  15. प्रश्न- पुरातत्व के विकास के विषय में बताइये।
  16. प्रश्न- पुरातात्विक विज्ञान के विषय में बताइये।
  17. प्रश्न- ऑगस्टस पिट, विलियम फ्लिंडर्स पेट्री व सर मोर्टिमर व्हीलर के विषय में बताइये।
  18. प्रश्न- उत्खनन के विभिन्न सिद्धान्तों तथा प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
  19. प्रश्न- पुरातत्व में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज उत्खननों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  20. प्रश्न- डेटिंग मुख्य रूप से उत्खनन के बाद की जाती है, क्यों। कारणों का उल्लेख कीजिए।
  21. प्रश्न- डेटिंग (Dating) क्या है? विस्तृत रूप से बताइये।
  22. प्रश्न- कार्बन-14 की सीमाओं को बताइये।
  23. प्रश्न- उत्खनन व विश्लेषण (पुरातत्व के अंग) के विषय में बताइये।
  24. प्रश्न- रिमोट सेंसिंग, Lidar लेजर अल्टीमीटर के विषय में बताइये।
  25. प्रश्न- लम्बवत् और क्षैतिज उत्खनन में पारस्परिक सम्बन्धों को निरूपित कीजिए।
  26. प्रश्न- क्षैतिज उत्खनन के लाभों एवं हानियों पर प्रकाश डालिए।
  27. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  28. प्रश्न- निम्न पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  29. प्रश्न- उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति के विकास का वर्णन कीजिए।
  30. प्रश्न- भारत की मध्यपाषाणिक संस्कृति पर एक वृहद लेख लिखिए।
  31. प्रश्न- मध्यपाषाण काल की संस्कृति का महत्व पूर्ववर्ती संस्कृतियों से अधिक है? विस्तृत विवेचन कीजिए।
  32. प्रश्न- भारत में नवपाषाण कालीन संस्कृति के विस्तार का वर्णन कीजिये।
  33. प्रश्न- भारतीय पाषाणिक संस्कृति को कितने कालों में विभाजित किया गया है?
  34. प्रश्न- पुरापाषाण काल पर एक लघु लेख लिखिए।
  35. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन मृद्भाण्डों पर टिप्पणी लिखिए।
  36. प्रश्न- पूर्व पाषाण काल के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  37. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन शवाशेष पद्धति पर टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- मध्यपाषाण काल से आप क्या समझते हैं?
  39. प्रश्न- मध्यपाषाण कालीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।।
  40. प्रश्न- मध्यपाषाणकालीन संस्कृति का विस्तार या प्रसार क्षेत्र स्पष्ट कीजिए।
  41. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र के मध्यपाषाणिक उपकरणों पर प्रकाश डालिए।
  42. प्रश्न- गंगा घाटी की मध्यपाषाण कालीन संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  43. प्रश्न- नवपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिये।
  44. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- दक्षिण भारत की नवपाषाण कालीन संस्कृति के विषय में बताइए।
  46. प्रश्न- मध्य गंगा घाटी की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  47. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति से आप क्या समझते हैं? भारत में इसके विस्तार का उल्लेख कीजिए।
  48. प्रश्न- जोर्वे-ताम्रपाषाणिक संस्कृति की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  49. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  50. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  51. प्रश्न- आहार संस्कृति का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- जोर्वे संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  54. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के औजार क्या थे?
  55. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालिए।
  56. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता के नामकरण और उसके भौगोलिक विस्तार की विवेचना कीजिए।
  57. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता की नगर योजना का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  58. प्रश्न- हड़प्पा सभ्यता के नगरों के नगर- विन्यास पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  59. प्रश्न- सिन्धु घाटी के लोगों की शारीरिक विशेषताओं का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  60. प्रश्न- पाषाण प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी लिखिए।
  61. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के सामाजिक संगठन पर टिप्पणी कीजिए।
  62. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के कला और धर्म पर टिप्पणी कीजिए।
  63. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के व्यापार का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
  64. प्रश्न- सिंधु सभ्यता की लिपि पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  65. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के पतन के कारणों पर प्रकाश डालिए।
  66. प्रश्न- लौह उत्पत्ति के सम्बन्ध में पुरैतिहासिक व ऐतिहासिक काल के विचारों से अवगत कराइये?
  67. प्रश्न- लोहे की उत्पत्ति (भारत में) के विषय में विभिन्न चर्चाओं से अवगत कराइये।
  68. प्रश्न- "ताम्र की अपेक्षा, लोहे की महत्ता उसकी कठोरता न होकर उसकी प्रचुरता में है" कथन को समझाइये।
  69. प्रश्न- महापाषाण संस्कृति के विषय में आप क्या जानते हैं? स्पष्ट कीजिए।
  70. प्रश्न- लौह युग की भारत में प्राचीनता से अवगत कराइये।
  71. प्रश्न- बलूचिस्तान में लौह की उत्पत्ति से सम्बन्धित मतों से अवगत कराइये?
  72. प्रश्न- भारत में लौह-प्रयोक्ता संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  73. प्रश्न- प्राचीन मृद्भाण्ड परम्परा से आप क्या समझते हैं? गैरिक मृद्भाण्ड (OCP) संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  74. प्रश्न- चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (PGW) के विषय में विस्तार से समझाइए।
  75. प्रश्न- उत्तरी काले चमकदार मृद्भाण्ड (NBPW) के विषय में संक्षेप में बताइए।
  76. प्रश्न- एन. बी. पी. मृद्भाण्ड संस्कृति का कालानुक्रम बताइए।
  77. प्रश्न- मालवा की मृद्भाण्ड परम्परा के विषय में बताइए।
  78. प्रश्न- पी. जी. डब्ल्यू. मृद्भाण्ड के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  79. प्रश्न- प्राचीन भारत में प्रयुक्त लिपियों के प्रकार तथा नाम बताइए।
  80. प्रश्न- मौर्यकालीन ब्राह्मी लिपि पर प्रकाश डालिए।
  81. प्रश्न- प्राचीन भारत की प्रमुख खरोष्ठी तथा ब्राह्मी लिपियों पर प्रकाश डालिए।
  82. प्रश्न- अक्षरों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  83. प्रश्न- अशोक के अभिलेख की लिपि बताइए।
  84. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में अभिलेखों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
  85. प्रश्न- अभिलेख किसे कहते हैं? और प्रालेख से किस प्रकार भिन्न हैं?
  86. प्रश्न- प्राचीन भारतीय अभिलेखों से सामाजिक जीवन पर क्या प्रकाश पड़ता है?
  87. प्रश्न- अशोक के स्तम्भ लेखों के विषय में बताइये।
  88. प्रश्न- अशोक के रूमेन्देई स्तम्भ लेख का सार बताइए।
  89. प्रश्न- अभिलेख के प्रकार बताइए।
  90. प्रश्न- समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति के विषय में बताइए।
  91. प्रश्न- जूनागढ़ अभिलेख से किस राजा के विषय में जानकारी मिलती है उसके विषय में आप सूक्ष्म में बताइए।
  92. प्रश्न- मुद्रा बनाने की रीतियों का उल्लेख करते हुए उनकी वैज्ञानिकता को सिद्ध कीजिए।
  93. प्रश्न- भारत में मुद्रा की प्राचीनता पर प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- प्राचीन भारत में मुद्रा निर्माण की साँचा विधि का वर्णन कीजिए।
  95. प्रश्न- मुद्रा निर्माण की ठप्पा विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  96. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्कों) की मुख्य विशेषताओं एवं तिथिक्रम का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- मौर्यकालीन सिक्कों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत कीजिए।
  98. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्के) से आप क्या समझते हैं?
  99. प्रश्न- आहत सिक्कों के प्रकार बताइये।
  100. प्रश्न- पंचमार्क सिक्कों का महत्व बताइए।
  101. प्रश्न- कुषाणकालीन सिक्कों के इतिहास का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  102. प्रश्न- भारतीय यूनानी सिक्कों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
  103. प्रश्न- कुषाण कालीन सिक्कों के उद्भव एवं प्राचीनता को संक्षेप में बताइए।
  104. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का परिचय दीजिए।
  105. प्रश्न- गुप्तकालीन ताम्र सिक्कों पर टिप्पणी लिखिए।
  106. प्रश्न- उत्तर गुप्तकालीन मुद्रा का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  107. प्रश्न- समुद्रगुप्त के स्वर्ण सिक्कों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  108. प्रश्न- गुप्त सिक्कों की बनावट पर टिप्पणी लिखिए।
  109. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का ऐतिहासिक महत्व बताइए।
  110. प्रश्न- इतिहास के अध्ययन हेतु अभिलेख अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। विवेचना कीजिए।
  111. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में सिक्कों के महत्व की विवेचना कीजिए।
  112. प्रश्न- प्राचीन सिक्कों से शासकों की धार्मिक अभिरुचियों का ज्ञान किस प्रकार प्राप्त होता है?
  113. प्रश्न- हड़प्पा की मुद्राओं के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  114. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  115. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत के रूप में सिक्कों का महत्व बताइए।

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