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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- वाणिज्य शिक्षण में ग्राफिक्स पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
ग्राफिक्स
(क) चार्ट एवं ग्राफ - ये अध्यापक की पाठ के प्रस्तुतीकरण के विभिन्न चरणों में सहायता करते हैं। इनकी सहायता से संख्यात्मक और गुणात्मक दोनों प्रकार की सूचनाओं, तथ्यों तथा आंकड़ों का भली प्रकार से छात्रों के सामने रखा जा सकता है। इनकी सहायता से उद्योगों एवं कृषि फसलों का उत्पादन, आयात-निर्यात, आय-व्यय, राष्ट्रीय आय आदि से सम्बन्धित आंकड़ों को प्रस्तुत किया जा सकता है। चार्ट कई प्रकार के हो सकते हैं। जैसे— समय चार्ट, समस्या चार्ट, वृक्ष की आकृति वाले चार्ट, तालिका चार्ट आदि। इनके प्रयोग के सम्बन्ध में निम्नं बातें ध्यान में रखनी चाहिये-
(i) चार्ट एवं ग्राफ यथार्थ होने चाहिये।
(ii) चार्ट एवं ग्राफ आकर्षक होने चाहिए।
(iii) एक चार्ट या ग्राफ का केवल एक ही उद्देश्य होना चाहिये।
(iv) जहाँ पर आवश्यकता हो वहीं पर प्रयोग होना चाहिये।
(v) विषय-वस्तु छात्रों की आयु, कक्षा व मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर चुननी चाहिए।
मानचित्र - इतिहास, भूगोल एवं वाणिज्य जैसे विषयों में मानचित्रों का बहुत महत्त्व है। इनका प्रयोग विभिन्न स्थलों की स्थिति का ज्ञान प्रदान करने के लिए किया जाता है। फसल, खनिज, सम्पदा आदि का वितरण भी इनके द्वारा दिखाया जाता है। विभिन्न प्रकार की राजनीतिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक, आर्थिक साधनों की जानकारी मानचित्रों द्वारा दी जाती है। वाणिज्य शिक्षण में व्यापारिक उत्पादन, खनिज सम्पदा, बन्दरगाह, मिट्टी, सिंचाई के साधन आदि के लिए मानचित्रों का प्रयोग किया जाता है। इनके उपयोग में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिये-
(i) इनमें शुद्धता एवं विश्वसनीयता का पूर्ण ध्यान रखना चाहिये।
(ii) इनका आकार कक्षा के आकार के अनुरूप होना चाहिये।
(iii) मानचित्रों की निर्देशिका अवश्य होनी चाहिये।
(iv) मानचित्र को उपयुक्त स्थान पर लटकाया जाना चाहिये।
(v) इनका प्रयोग आवश्यकता पड़ने पर ही किया जाना चाहिये व उपयोग करने के बाद हटा देना चाहिये।
(ग) चित्र - जहाँ पर मॉडल उपलब्ध न हो वहाँ अध्यापक चित्रों का प्रयोग कर सकता है। ये विषयवस्तु को स्पष्ट बनाने में सहायक हैं। इनके द्वारा छात्रों की चिन्तन शक्ति व तर्क शक्ति विकसित होती है। इनका उपयोग इतिहास में विभिन्न राजाओं की वेशभूषा, व्यक्तित्त्व आदि को दिखाने में, विभिन्न प्रकार के सिक्कों आदि के चित्रों से उस समय की संस्कृति के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है।वाणिज्य शिक्षण में चित्रों का बहुत महत्त्व है और ये बाजारों, अखबार, पत्र-पत्रिकाओं, विभिन्न मंत्रालयों तथा छात्रों द्वारा निर्मित कराये जा सकते हैं। अतः चित्र विषयवस्तु को रोचक बनाने तथा स्थायी ज्ञान प्रदान करने में सहायक है। इनका प्रयोग करते समय निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिये-
(i) ये विषय-वस्तु से सम्बन्धित होने चाहिये।
(ii) ये आकर्षक हों लेकिन चटकीले होने चाहिये।
(iii) ये छात्रों की आयु के अनुसार-होने चाहिये।
(iv) चित्र शुद्ध व प्रामाणिक होने चाहिये।
(घ) पत्र-पत्रिकाएँ - वाणिज्य शिक्षण में पत्र-पत्रिकाओं का बहुत महत्त्व है। पत्र-पत्रिकाओं की सहायता से हमें देश विदेश की आर्थिक समस्या का पता चलता है। ये पत्रिकाएँ हमें वाणिज्य से सम्बन्धित ज्ञान देने में बहुत सहायक हैं।
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