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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- दृश्य-सामग्री के चयन एवं प्रयोग के मुख्य सिद्धान्त कौन-कौन से हैं?
अथवा
वाणिज्य विषय के शिक्षण के सामग्री के उपयोग के कौन-कौन सिद्धान्त हैं?
उत्तर-
वाणिज्य शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए अध्यापक विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री व शिक्षण उपकरणों का प्रयोग करता है लेकिन यदि इनका चुनाव व प्रस्तुतीकरण उपयुक्त ढंग से नहीं किया जाता तो शिक्षण को प्रभावशाली बनाने की अपेक्षा अध्यापक व छात्रों के लिए मुसीबत खड़ी कर देती है। अतः इनका चुनाव व उपयोग बड़ी सावधानीपूर्वक करना चाहिए। इसके अच्छे उपयोग के लिए निम्नलिखित सिद्धान्तों का ध्यान रखना चाहिये-
(क) चुनाव का सिद्धान्त - वाणिज्य का चुनाव करते समय निम्न बातें ध्यान में रखनी चाहिए-
(i) सहायक सामग्री छात्रों की आयु, कक्षा व मानसिक योग्यता के अनुसार-होनी चाहिए।
(ii) इन सामग्रियों का शैक्षिक मूल्य होना चाहिए और वाणिज्य शिक्षण के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
(iii) जहाँ तक सम्भव हो शिक्षण सामग्री वस्तु का वास्तविक ( Substitute) होना चाहिए।
(ख) तैयारी का सिद्धान्त - अध्यापक को चाहिए कि वह शिक्षण सामग्री का प्रयोग करने से पहले पूरी तरह से तैयार कर लेनी चाहिए। यदि हम पहले से तैयार कर लेते हैं तो प्रस्तुतीकरण उतना ही प्रभावशाली होता है। अतः अध्यापक निम्न बातों का ध्यान रखे-
(i) अध्यापक को शिक्षण सामग्री की प्रकृति व प्रयोग करने के तरीकों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
(ii) कक्षा में प्रस्तुत करने से पहले सामग्री का पहले अभ्यास करके देख लेना चाहिए।
(iii) छात्रों को पहले से ही मनोवैज्ञानिक दृष्टि से तैयार कर देना चाहिए ताकि वे ज्यादा रुचि लेकर इसके प्रस्तुतीकरण का फायदा उठा सकें।
(ग) भौतिक नियन्त्रण का सिद्धान्त - अध्यापक को भौतिक सुविधाओं का ध्यान भी रखना चाहिए जैसे शिक्षण सामग्री के प्रयोग के लिए जिस प्रकार की भौतिक सुविधाओं की आवश्यकता होती है वे कक्षा में उपलब्ध होनी चाहिए। अध्यापक को यह पता होना चाहिए कि विभिन्न शिक्षण सामग्रियों को किस प्रकार से नियन्त्रित करना है।
(घ) उपयुक्त प्रस्तुतीकरण का सिद्धान्त - यदि हम शिक्षण सामग्री का चुनाव व तैयारी ठीक ढंग से कर लेते हैं लेकिन उसका प्रस्तुतीकरण ठीक तरह से नहीं कर पाते हैं तो उसका उपयोग निरर्थक है। अतः शिक्षण सामग्री के प्रस्तुतीकरण में निम्न बातें ध्यान में रखें-
(i) अध्यापक को पहले से यह योजना बना लेनी चाहिए कि सामग्री का प्रयोग कहाँ और कब करना है।
(ii) प्रस्तुतीकरण इस प्रकार किया जाए कि यह शैक्षणिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
(iii) प्रस्तुतीकरण इस ढंग से किया जाये कि सभी छात्र इसका फायदा उठा सकें। प्रस्तुतीकरण पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए।
(iv) प्रस्तुतीकरण प्रभावशाली ढंग से किया जाना चाहिए।
(च) क्रिया का सिद्धान्त - यह सिद्धान्त हमें यह बताता है कि शिक्षण सामग्री का प्रयोग करते समय छात्रों को भी उसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उनसे बीच-बीच में प्रश्न पूछने चाहिए और अपनी अनुक्रियाओं को व्यक्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
(छ) मूल्यांकन का सिद्धान्त - वाणिज्य शिक्षण में शिक्षण सामग्री के उपयोग के लिए इस सिद्धान्त का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह हमें बताता है कि-
(i) क्या शिक्षण सामग्री रुचिकर बच्चों की आयु व मानसिक योग्यता के अनुसार-थी।
(ii) ये शिक्षण उद्देश्यों को प्राप्त करने में कितनी सहायक हुईं।
(iii) क्या शिक्षण सामग्री का प्रस्तुतीकरण ठीक ढंग से हुआ या नहीं।
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