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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- वाणिज्य शिक्षण में प्रयुक्त शिक्षण सामग्री का एक संक्षिप्त वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर-
वाणिज्य शिक्षण में उपयोग की गयी सहायक सामग्री
(i) छेद करने का यन्त्र - यह एक छोटी मशीन होती है जो कागजों, पत्रों आदि की नत्थी करने के लिए उनमें गोल छेद करने के काम आती है। छेद करने के बाद फाइलों में टैग आसानी से लगाया जा सकता है।
(ii) नत्थी करने वाली मशीन - यह मशीन विभिन्न प्रकार के कागजों को नत्थी करने के काम आती है यह आमतौर पर दफ्तर, दुकान, घरों आदि में प्रयोग की जाती है।
(iii) शीघ्रगणक पुस्तक - यह यन्त्र शीघ्र गणना करने के काम आता है। यह वेतन, मजदूरी, ब्याज कमीशन आदि की जल्दी गणना करने के काम आती है। इस मशीन के उपयोग के द्वारा श्रम व समय दोनों की बचत होती है।
(iv) तारीख डालने वाली मशीन - इस मशीन का उपयोग दफ्तरों तथा पुस्तकालयों में किया जाता है। इस मशीन को एक बार सैट करके बहुत जल्दी-जल्दी तारीख डाल सकते हैं।
(v) डाक तोलने का यन्त्र - डाक लिफाफों पर टिकट उनके वजन के अनुसार-लगाये जाते हैं और यह मशीन लिफाफों का वजन तोलने के काम आती है और लिफाफों पर उनके वजन के अनुसार-टिकट लगाकर डाकघर में नष्ट होने वाले समय को बचाया जा सकता है।
(vi) टंकण मशीन - यह मशीन पत्रों के टंकण में उपयोगी होती है। पत्रों को टंकण करने से प्राप्तकर्त्ता पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। ये पत्र आकर्षक लगते हैं।
(vii) टेलीफोन - टेलीफोन का उपयोग आजकल हर दफ्तर में, व्यापारियों द्वारा किया जाता है। इसके द्वारा हम घर बैठे-बैठे देश-विदेश में बातें कर सकते हैं और समय व पैसा भी बचा सकते हैं। टेलीफोन आन्तरिक व बाह्य दोनों प्रकार का होता है।
(viii) स्वतः नम्बर डालने वाला यन्त्र - यह यन्त्र रसीदों बहियों, टिकटों व अन्य कागजो पर क्रमानुसार पृष्ठ संख्या डालने में प्रयोग किया जाता है।
(ix) बहुलिपिकरण - यह यन्त्र एक पत्र की अनेक प्रतियाँ निकलाने के लिए काम आता है। इस यन्त्र के द्वारा दो तरह से प्रतियाँ निकाल सकते हैं-
(क) हस्तलिखित
(ख) टाइप की हुई
प्रतिलिपि इसमें स्टेंसिल पेपर, स्टेंसिल स्थाई वह डुप्लीकेटर मशीन की आवश्यकता पड़ती है।
(x) डिक्टोफोन - इसको भाषण यन्त्र भी कहा जाता हैं। जब कार्यालय में स्टेनो नहीं होता और अधिकारी को कुछ बातें लिखवानी हैं, यह उस समय काम आता है। इसमें भाषण व श्रवण दो यन्त्र होते हैं। इसमें टेप कर लिया जाता है और जब स्टेनो को लिखना होता है तो वह श्रवण यन्त्र को खोल कर उसमें टेप किया हुआ भाषण सुन सकता है और टाइप कर सकता है।
(xi) पत्र मोड़ने वाली मशीन - यह मशीन बड़े-बड़े कार्यालयो में उपयोग में लाई जाती है जहां हजारों पत्रों को रोजाना बाहर भेजा जाता है यह मशीन एक घंटे में चार हजार पत्र मोड़ सकती है और समय व ऊर्जा की बचत करती है !
(xii) पता लिखने वाला यन्त्र - इस यन्त्र द्वारा पोस्टकार्डों, लिफाफों एवं लेबिलों पर पता आदि लिखे जाते हैं। इसमें स्टेंसिल पर पता लिखा होता है। लिफाफे, पोस्टकार्डों इत्यादि को मशीन में लगाकर नशीन के लगे हैंडिल को घूमा कर पता छापा जाता है। यह एक घण्टे में 1000 पते आसानी से छाप सकती है।
(xiii) मोहर या सील लगाने वाली मशीन - इस मशीन के द्वारा पत्रों, लिफाफों, पार्सलों आदि पर चमड़े की सील लगाई जाती है!
(xiv) समय लेखन यन्त्र - इस मशीन का उपयोग बड़े-बड़े कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति का समय नोट करने में किया जाता है। प्रत्येक कर्मचारी को एक टिकट दिया जाता है और जब वह काम पर आता है तो वह इसे मशीन में डाल देता है और उस कार्ड पर समय अपने आप अंकित हो जाता है। ठीक समय से आने व जाने का समय नीली स्याही से व देर से आने का व पहले जाने का समय लाल स्याही से अंकित हो जाता है।
(xv) चेक सुरक्षक मशीन - चेक, बिल आदि महत्त्वपूर्ण पूर्ण प्रेलेखों में रकमें, अंकों तथा शब्दों में ही लिखी जाती है। चेक सुरक्षक द्वारा जालसाजी से बचा सकता है। बैंकों आदि में चेक सुरक्षकों का प्रयोग किया जाता है।
(xvi) रोकड़ लेखन यन्त्र - यह वहाँ पर जहाँ हजारों कैशमेमो काटने पड़ते हैं। विशेष रूप से उपयोगी है। इसमें मशीन से छपी हुई रकमों का जोड़ भी स्वतः लगता रहता है और छपता रहता है।
(xvii) हिसाब लगाने का यन्त्र - इस यन्त्र का उपयोग बड़े-बड़े कार्यालयों, बीमा, दफ्तरों, बैंकों, डाकखानों आदि में जोड़ घटाना, गुणा-भाग करने में किया जाता है। मशीन पर कार्य करने वाले को केवल चार चाबियाँ दबानी पड़ती हैं।
(xviii) बहीखाता मशीन - खाते में प्रविष्टियाँ करने, खाने तैयार करने, बैलेंस सीट बनाने, जोड़-घटाना करने में किया जाता है। इनके अतिरिक्त वाणिज्य शिक्षण में और भी बहुत-सी मशीनों जैसे सिक्के छाँटने वाला यन्त्र, इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर तथा विभिन्न प्रपत्र जैसे डाकघर, रेलवे, बीमा के प्रपत्र तथा आवक जावक रजिस्टर, डाक व्यय रजिस्टर, विभिन्न प्रकार के लिफाफे, टेलीफोन निर्देशिका, बैंक सम्बन्धी पुस्तकों आदि का उपयोग किया जाता है।
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