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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :160
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2762
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- वाणिज्य शिक्षा में श्रव्य दृश्य उपकरण पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-

रेडियो - आधुनिक युग में शिक्षा के क्षेत्र में रेडियो का विशेष महत्त्व है। रेडियो पर विभिन्न कक्षाओं के लिए तथा विभिन्न विषयों के लिए कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। ये कार्यक्रम छात्रों तथा शिक्षकों दोनों के लिए बहुत लाभदायक हैं। अतः शिक्षा के क्षेत्र में रेडियो के महत्त्व को निम्नलिखित बातों द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-

(i) रेडियो के द्वारा हम दूर-दराज के लोगों को शिक्षा दे सकते हैं।

(ii) रेडियो के द्वारा देश-विदेश की योजनाओं, बाजार भाव की जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं।

(iii) रेडियो प्रसारण के द्वारा विख्यात शिक्षाशास्त्रियों, अर्थशास्त्रियों, कलाकारों तथा विचारकों के विचारों को सुना जा सकता है।

(iv) रेडियो के कार्यक्रम रोचक एवं बोधगम्य होते हैं।

रेडियो के प्रयोग में सावधानियाँ एवं सुझाव

(i) रेडियो प्रसारण से पहले छात्रों को उस पाठ के उद्देश्यों के बारे में स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए।

(ii) पाठ प्रसारण के दौरान नोट्स बनाने चाहिए।

(iii) प्रसारण के तुरन्त बाद अनुवर्ती कार्यक्रम होना चाहिए।

(iv) प्रसारण सरल व आसान भाषा में होना चाहिए व इसका मूल्यांकन करना चाहिए।

टेपरिकार्डर - शिक्षा के क्षेत्र में टेप रिकार्डर का भी विशेष महत्त्व है। वाणिज्य शिक्षण में इसका मुख्य उपयोग आशुलिपि शिक्षण में किया जाता है। टंकित करने की सामग्री भी इसमें टेप कर लिया जाता है वाणिज्य से सम्बन्धित विभिन्न कौशलों को हम टेप रिकार्डर की सहायता से सीख लेते हैं। इसका उपयोग निम्नलिखित रूप से भी कर सकते हैं-

(i) इसके द्वारा उच्चारण में गलती को सुधारा जा सकता है।

(ii) सामान्य विषयों के साथ-साथ संगीत, नाटक, अभिनय आदि सीखने में सहायक है।

(iii) छात्रों को पुनर्बलन प्रदान करने हेतु इसका प्रयोग किया जा सकता है।

(iv) रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रमों को टेप करने में सहायक है।

(v) विद्यालयों में आयोजित सम्मेलनों, कार्यशालाओं, गोष्ठियों व अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों को रिकार्ड किया जा सकता है।

(vi) फिल्म पट्टियाँ तथा स्लाइडों के लिए व्याख्यात्मक वर्णन तैयार करने में इनकी सहायता ली जाती है।

दूरदर्शन - टेलीविजन नवीनतम श्रव्य दृश्य उपकरण है जिसका शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग किया जाता है। इसके प्रयोग में हमारी देखने व सुनने की दोनों इन्द्रियाँ काम करती हैं तथा यह जीवन्त होता है। जहाँ रेडियो व टेप रिकार्डर पर हम केवल सुनते हैं, वहीं दूरदर्शन पर हम सुन व देख दोनों प्रकार से प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करते हैं। यह संप्रेषण संचार क्रिया का एक शक्तिशाली माध्यम है। छात्रों के ज्ञान को स्पष्ट, स्थायी, शिक्षा को रुचिकर बनाने के लिए तथा शिक्षा के विस्तार के लिए दूरदर्शन का प्रयोग किया जाता है।

(i) दूरदर्शन पर नये-नये कार्यक्रम प्रसारित होते हैं।

(ii) इनकी सहायता से सुदूर अध्यापकों की सेवाएँ ली जा सकती हैं।

(iii) दूरदर्शन के द्वारा छात्रों को नवीनतम ज्ञान प्रदान किया जा सकता है।

(iv) यह पाठ्यक्रम को विस्तृत करने तथा शैक्षिक कार्यक्रमों को सफल बनाने में सहायक है।

(v) देश व विदेश की वास्तविकता को स्क्रीन पर दिखाया जाता है और छात्रों के ज्ञान में वृद्धि होती है।

(vi) दूरदर्शन पर विभिन्न शिक्षाशास्त्रियों, वैज्ञानिकों, अध्यापकों, उद्योगपतियों आदि के कामों को देखा जा सकता है और उनके विचार सुने जा सकते हैं।

चित्र विस्तारक यन्त्र - यह यन्त्र एपोस्कोप तथा डायास्कोप दोनों का मिश्रित रूप है। यह पारदर्शी स्लाइडों के अतिरिक्त अपारदर्शी पदार्थों को भी प्रक्षेपित करने के काम आता है। इस यन्त्र की सहायता से चित्रों को पुस्तक से निकाले बिना ही बड़े आकार के रूप में छात्रों के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके प्रयोग के लिए कक्षा-कक्ष में अन्धेरा रखना पड़ता है। इस यन्त्र का प्रयोग कक्षा में चित्र, मानचित्र, चार्ट आदि बनाने में भी किया जाता है। प्रक्षेपण के साथ-साथ अध्यापक को चित्र का वर्णन व टिप्पणी करनी चाहिए। यह यन्त्र वाणिज्य शिक्षण में बहुत उपयोगी है।

शिरोपरि प्रक्षेपी - यह प्रोजेक्टर अन्य प्रोजेक्टर की अपेक्षा अधिक उपयोगी है क्योंकि इसका प्रयोग करते समय अध्यापक कक्षा-कक्ष के सम्मुख खड़ा रहता है। इस प्रोजेक्टर में जिस चित्र को प्रतिबिम्बित किया जाता है उसे दर्शकों के पीछे रखते हैं और प्रतिबिम्ब सिर के ऊपर से होता हुआ पर्दे पर फोकस होता है। इस प्रोजेक्टर की सहायता से विभिन्न ग्राफ, चित्र, मानचित्र आदि दिखा सकते हैं। अध्यापक पारदर्शी सीटों पर कक्षा में रंगीन चित्र बना सकता है। इसका प्रयोग करते समय हिलाना नहीं चाहिए। यंत्र का प्रयोग लम्बे समय तक नहीं करना चाहिए तथा लैंसों को समय-समय पर साफ करना चाहिए।

जादू की लालटेन - इस यन्त्र की सहायता से शिक्षण का सजीव व प्रभावशाली बनाया जाता है। इसे डाइस्कीप भी कहते हैं।इसके द्वारा पारदर्शी स्लाइडों को प्रक्षेपित किया जाता है। इसका प्रयोग करते समय निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-

(1) स्लाइड दिखाने से पहले छात्रों को उनके बारे में बता देना चाहिए।

(2) स्लाइडों को दिखाने के साथ-साथ उनकी व्याख्या भी करनी चाहिए।

(3) स्लाइडों को सावधानी से प्रयोग करना चाहिए तथा स्लाइड कैरियर पर रखना चाहिए।

चलचित्र या फिल्म - वाणिज्य शिक्षण में फिल्मों का बहुत महत्त्व है। ये श्रव्य दृश्य सामग्री के अन्तर्गत आती हैं क्योंकि पर्दे पर चित्रों के साथ-साथ आवाज भी सुनाई देती है। ये ग्रामीणों की समस्याओं भारत की फसलें, खनिज पदार्थ तथा विभिन्न भागों के लोगों के रहन-सहन को दिखाने के काम आता है। इसके अतिरिक्त फिल्मों द्वारा भूतकाल व सामाजिक घटनाओं को बड़ी अच्छी प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है। ये छात्रों को वास्तविक ज्ञान प्रदान करते हैं तथा छात्रों के ध्यान को आकर्षित करने में सहायक होती हैं। ये सामान्य बुद्धि व मन्द बुद्धि दोनों प्रकार के छात्रों के लिए उपयोगी हैं। चलचित्रों का ध्यान अध्यापक को स्वयं करना चाहिए तथा इनका प्रस्तुतीकरण बहुत ही सुचारु रूप से करना चाहिए।

स्लाइड एवं फिल्म पट्टिकाएँ - स्लाइड व फिल्म पट्टिकाएँ वाणिज्य शिक्षण में बहुत उपयोगी हैं। इनकी सहायता से क्रय-विक्रय, बहीखाता, टंकण, सचिवालय पद्धति आदि का अध्ययन बड़ी सरलता एवं सुगमता से किया जा सकता है। ये छात्रों के प्रकरण को समझने में मदद करती हैं।

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