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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- दृश्य-श्रव्य सामग्री से आप क्या समझते हैं? वाणिज्य शिक्षण में इसकी आवश्यकता एवं महत्त्व क्या हैं?
उत्तर-
शिक्षा एक जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है। शिक्षण का उद्देश्य शिक्षा के उद्देश्यों. को प्राप्त करना होता है। शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए अध्यापक विभिन्न प्रकार की सामग्री का प्रयोग करता है जो विषय वस्तु को स्पष्ट बनाने में अध्यापक की सहायता करते हैं। इनको श्रव्य दृश्य इस कारण कहा जाता है क्योंकि वे श्रवण तथा दर्श (देखने) की ज्ञान इन्द्रियों द्वारा प्रभावी होते हैं। अतः श्रव्य-दृश्य सामग्री का अर्थ उस सामग्री से है जो कक्षा में या अन्य शिक्षण परिस्थितियों में लिखित या बोली गयी पाठ्य सामग्री को समझाने में सहायता देती है। उदाहरण के लिए चित्र, फोटोग्राफ, चार्ट, मॉडल, स्लाइड, फिल्म, बुलेटिन बोर्ड, फ्लेनल बोर्ड आदि।
श्रव्य दृश्य सामग्री का वर्गीकरण - इन्द्रियों को प्रयोग के आधार पर निम्नलिखित तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है-
(क) श्रव्य सामग्री
(ख) दृश्य सामग्री
(ग) श्रव्य दृश्य सामग्री
श्रव्य दृश्य सामग्री का शैक्षिक महत्त्व
श्रव्य-दृश्य सामग्री अध्यापकों व छात्रों की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है। इनका शैक्षिक महत्त्व निम्नलिखित है-
(i) ज्ञानेन्द्रियों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग - श्रव्य दृश्य सामग्रियों का प्रयोग होता है और जितना ज्यादा ज्ञानेन्द्रियों का प्रयोग होगा उतना ही अधिगम अधिक होगा।
(ii) सर्वोत्तम प्रेरक - श्रव्य दृश्य साधन छात्रों में रुचि एवं उत्साह उत्पन्न करते हैं और उनके ध्यान को आकर्षित करने में सहायक हैं।
(iii) विषय-वस्तु को स्पष्ट करने में सहायक - इन सामग्रियों की सहायता से विषय से सम्बन्धित बहुत से विचारों, सम्प्रत्यों, क्रियाओं आदि को स्पष्ट किया जा सकता है जिनको हम पुस्तक से पढ़कर आसानी से नहीं समझ पाते हैं। ये विषय-वस्तु को सरल व स्पष्ट बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
(iv) समय व शक्ति की बचत - कक्षा के अन्दर श्रव्य-दृश्य सामग्री का प्रयोग करके अध्यापक अपना व छात्रों के समय व ऊर्जा को बचा सकता है जिसका उपयोग शिक्षण की दूसरी क्रियाओं में किया जा सकता है।
(v) अनुशासनहीनता में कमी - ये शिक्षण सामग्रियाँ छात्रों को अनुशासन में रखने में सहायक है। क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। अतः जब इन श्रव्य दृश्य सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है तो छात्रों का ध्यान व रुचि अध्ययन में बनी रहती है और उनको अनेक प्रकार की क्रियाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और वें अनुशासन में रहते हैं।
(vi) मौखिकता को कम करने में सहायक - श्रव्य दृश्य सामग्री का प्रयोग करके अध्यापक मौखिकता को कम कर सकता है। वह जिस के बारे में बोलकर ज्ञान देता है यदि उसी मॉडल का चित्र दिखाए तो उसे कम बोलना पड़ेगा और छात्र भी आसानी से समझ सकेंगे।
(vii) शिक्षण सूत्रों पर आधारित - श्रव्य दृश्य सामग्री शिक्षण के विभिन्न सूत्रों जैसे 'सरल से कठिन की ओर' 'स्थूल से सूक्ष्म की ओर' 'ज्ञात से अज्ञात की ओर' आदि पर आधारित हैं। अतः ये हमारे शिक्षण को प्रभावशाली बनाने में सहायक हैं।
(viii) सार्थक अनुभव प्रदान करना - इनके द्वारा छात्रों को प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किये जाते हैं। प्रत्यक्ष अनुभव सबसे ज्यादा शिक्षाप्रद होते हैं। इनके माध्यम से संसार की जटिल एवं विशाल वस्तुओं को साकार किया जाता है।
(ix) रटने को कम करने में सहायक - श्रव्य दृश्य सामग्री का प्रयोग करने से पाठ्य वस्तु में रुचि उत्पन्न होती है और छात्रों को प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होते हैं। अतः श्रव्य दृश्य सामग्री छात्रों में रटने की प्रवृत्ति को कम करती है।
(x) विविध अनुभव - इनके प्रयोग से छात्रों को विभिन्न प्रकार के अनुभव प्रदान किये जाते हैं। वे मात्र बात करके तथा चाक द्वारा लिखकर ज्ञान प्राप्त करने के स्थान पर विभिन्न ढंगों से विभिन्न अनुभवों को प्राप्त करते हैं।
(xi) व्यक्तिगत विभिन्नताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति - छात्रों के अन्तर्गत व्यक्तिगत विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। कक्षा में औसत बुद्धिमान व औसत से कम बुद्धि वाले छात्र पाये जाते हैं। अतः इनका प्रयोग करके अध्यापक छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है।
(xii) मानसिक शक्तियों के विकास में सहायक - श्रव्य दृश्य सामग्री का प्रयोग करके छात्रों में विभिन्न मानसिक शक्तियों जैसे कल्पना शक्ति, शक्ति, विचार शक्ति, एकाग्रता, सृजनात्मकता, अन्वेषणशीलता आदि उच्च मानसिक शक्तियों का विकास किया जा सकता है।
(xiii) वैज्ञानिक मनोवृत्ति के विकास में सहायक - श्रव्य दृश्य सामग्री का प्रयोग करने से छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास किया जाता है। छात्रों में निरीक्षण शक्ति व सामान्यीकरण करने की शक्ति का विकास किया जाता है।
(xiv) स्वस्थ अन्तर्क्रियाओं को बढ़ावा - शिक्षण अधिगम की सफलता कक्षा में अन्तर्क्रिया पर निर्भर करता है। जितनी अन्तर्क्रिया अच्छी होगी उतना ही अधिगम ज्यादा होगा। श्रव्य दृश्य सामग्री कक्षा में उचित अन्तर्क्रियाओं को बढ़ावा देती है।
(xv) साधनों की न्यूनताओं या कमी को पूरा करने में सहायक - श्रव्य-दृश्य सामग्री के प्रयोग के द्वारा विद्यालय में विभिन्न साधनों जैसे कक्षा-कक्ष की कमी, अच्छे अध्यापकों की कमी आदि को पूरा किया जा सकता है।
(xvi) अधिगम एवं प्रशिक्षण के सकारात्मक स्थानान्तरण में सहायक - कक्षा-कक्ष में प्राप्त ज्ञान तभी सार्थक है जब इसका प्रयोग दैनिक जीवन में किया जा सके।श्रव्य दृश्य सामग्री छात्रों को इस ज्ञान का उपयोग अपने जीवन की समस्याओं को हल करने में करना सिखाती है। अतः ये अधिगम एवं प्रशिक्षण के सकारात्मक स्थानान्तरण में सहायक हैं।
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