|
बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
5 पाठक हैं |
||||||
बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- मौखिक रचना की आवश्यकता एवं महत्त्व को समझाइए।
उत्तर-
मौखिक रचना की आवश्यकता एवं महत्त्व - मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण उसकी मधुर तथा सुसंस्कृत वाणी है। मनुष्य की वाणी में ही अमृत होता है तथा वाणी ही व्यक्तियों में विष घोलती है। मनुष्य की वाणी ही एकमात्र आभूषण है जो सदैव धारण किए रहता है।.
इस प्रकार मौखिक रचना या वाणी की आवश्यकताएँ निम्नलिखित हैं-
1. बालक के विकास क्रम में सर्वप्रथम मौखिक भाषा का ही विकास होता है। मातृभाषा का विकास मौखिक ही अधिक होता है।
2. मौखिक रचना तथा अभिव्यक्ति से मनुष्य समाज में अपना स्थान बनाता है। अच्छे वक्त को जीवन काल में अधिक ख्याति मिलती है।
3. मौखिक रचना व्यक्तित्त्व के विकास का एक उत्तम साधन है।
4. व्यक्ति की मौखिक अभिव्यक्ति से उसके भावों एवं विचारों का ही सम्प्रेषण नहीं होता है अपितु उसके व्यक्तित्त्व का भी आभास होता है।
5. जॉन डीबी के अनुसार- 'सामाजिक क्षमताओं' के विकास में मौखिक अभिव्यक्ति की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
6. नित्यप्रति के व्यावहारिक जीवन में मौखिक रूप की भाषा का प्रयोग सबसे अधिक होता है। लिखित रूप औपचारिक होती है।
7. लिखित अभिव्यक्ति का क्षेत्र उतना व्यापक नहीं है जितना मौखिक अभिव्यक्ति का।
8. बालक को मातृभाषा मौखिक रूप में सीखने का अवसर मिलता है। बालक के शब्द भण्डार में वृद्धि होती है। मौखिक रचना शिक्षण से ध्वनि, लिपि, शब्द, लय, आरोह-अवरोह तथा उतार-चढ़ाव का अवसर मिलता है।
9. मौखिक अभिव्यक्ति से मनोवैज्ञानिक ग्रन्थियों तथा हीन भावनाओं को दूर करने में सहायता मिलती है।
10. भाषा शिक्षण का मूल आधार मौखिक रचना तथा अभिव्यक्ति है।
|
|||||










