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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- मौखिक रचना के लाभों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
मौखिक रचना-शिक्षण के लाभ
मनुष्य को अपने भावों एवं विचारों की मौखिक अभिव्यक्ति करने से निम्नलिखित लाभ भी होते हैं-
1. मौखिक अभिव्यक्ति में मानक भाषा के प्रयोग को महत्त्व दिया जाता है जिससे व्याकरण की शुद्धता आती है।
2. मौखिक भाषा में शुद्ध उच्चारण, ध्वनि पदबन्ध और वाक्य के स्वरूप पर शुद्धता आती है।
3. सम्प्रेषण में स्वाभाविक एवं स्पष्ट भाषा को धारा प्रवाह बोलने की क्षमता का विकास होता है।
4. छात्रों में बोलने की झिझक कम होती है। निःसंकोच विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेता है।
5. मौखिक, रचना की कला नैसर्गिक है। यह ईश्वर प्रदत्त क्षमता है। यह शक्ति केवल मानव मात्र को ही दी गई है।
6. प्रकरण अथवा प्रसंग के अनुरूप भाव के लिए अनुकूल भाषा के प्रयोग की कुशलता का विकास होता है।
7. यह कहा जाता है कि 'मधुर बोलना' उत्तम विनियोग है। मीठी वाणी से बड़े-बड़े कार्य सिद्ध हो जाते हैं। तुलसीदास जी ने लिखा है-
"तुलसी मीठे वचन से सुख उपजत चहुँ ओर।"
भाषा में मधुरता एवं शीतलता बोलने के अभ्यास से आती है।
8. मौखिक भाषा की अभिव्यक्ति में हृदय की मर्मस्पर्शिता भी होनी चाहिए। किन्हीं व्यक्तियों की वाणी में जादू होता है। एक शब्द या वाक्य सम्पूर्ण व्यक्ति ही बदल देता है। तुलसीदास जी के जीवन के लिए इसी गुण का महत्त्व है। उनकी पत्नी ने कहा-
तैसी होती श्रीराम में होत न तौ भव-भीति।।"
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