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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- लिखित रचना की आवश्यकता एवं महत्त्व को समझाइए। मौखिक रचना एवं लिखित रचना में अन्तर बताइये एवं लिखित रचना- शिक्षण के उद्देश्य भी बताइए।
सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. लिखित रचना की आवश्यकता एवं महत्त्व को समझाइए।
उत्तर-
आवश्यकता एवं महत्त्व
लिखित रचना की आवश्यकता एवं महत्त्व का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा किया गया है-
1. सामाजिक व्यवस्था गठन, सहयोग एवं क्रिया-कलापों का आधार है। लिखित रचनाओं के माध्यम से समाज, परिवार तथा घर में सम्पर्क होता है। लेख तथा पत्र-व्यवहार सामान्य माध्यम हैं। आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा सामाजिक विकास एवं सम्पन्नता के लिए सम्मेलन, समितियों, गोष्ठियों, आयोगों आदि के निर्माण तथा प्रतिवेदन लिखित रूप में ही प्रस्तुत किए जाते हैं। अन्य राष्ट्रों से समझौते भी लिखित रूप में होते हैं। राष्ट्रों के संविधान भी लिखित रूप में होते हैं। लिखित रचना मानव जीवन का अभिन्न अंग है।
2. सृजनात्मक तथा ललित साहित्य के विकास का माध्यम तथा आधार है। भाषा के माध्यम से साहित्यिक रचनाओं; जैसे- गद्य, काव्य, नाटक, जीवनी आदि की रचनाएँ लिखित रूप में ही की जाती हैं। साहित्य के माध्यम से ज्ञानात्मक तथा भावात्मक पक्षों का विकास किया जाता है। साहित्य की विधाओं द्वारा आनन्द की प्राप्ति होती है। लिखित रचनाओं से सृजनात्मक क्षमताओं का विकास होता है।
3. ज्ञान-विज्ञान के सतत् विकास एवं चयन का आधार है। मानव अपने अनुभवों तथा क्रिया-कलापों से अपने ज्ञान में वृद्धि करता रहता है और उसका संचय भी करता है। यह संचित ज्ञान नई पीढ़ी को शिक्षा प्रदान करता है। शिक्षा द्वारा मानवीय ज्ञान का प्रसार एवं संचार किया जाता है।
4. व्यक्ति के विकास तथा सामाजिक क्षमताओं के विकास का आधार है। लिखित रचनाओं के अध्ययन तथा अध्यापन से बालकों के व्यक्तित्त्व का विकास होता है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि कहानी के सुनने से ही जीवन में सार्थक परिवर्तन हुए हैं तथा सद्गुणों का संचार होता है। साहित्य का जीवन से सीधा सम्बन्ध होता है।
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