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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं के रूपों की विवेचना कीजिए।
उत्तर-
वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं के रूप
स्टेनले तथा रॉस के अनुसार- परीक्षा के निर्माण में चार सोपानों का अनुकरण किया जाता है- नियोजन, रचना, जाँच तथा मूल्यांकन। इनका विवरण निम्न प्रकार दिया गया है-
प्रथम सोपान - नियोजन (Planning)
1. पाठ्य-वस्तु का विश्लेषण करना।
2. उद्देश्यों का निर्धारण करना।
3. विशिष्टीकरण तालिका (Table of Specification) को बनाना, जो द्वितीय सोपान के लिए निर्देशन दे सके।
4. उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में लिखना।
5. प्रश्नों के रूप का निर्धारण करना तथा कुल प्रश्नों की संख्या का निर्धारण करना।
द्वितीय सोपान - पदों की रचना करना (Preparing Test Items)-
1. पदों की रचना करने में विशिष्टीकरण तालिका का अनुसरण किया जाता है।
2. दो प्रकार के पदों की रचना की जाती है-
(अ) प्रत्यास्मरण रूप (Recall Type)-
(i) सामान्य प्रत्यास्मरण (Simple Recall),
(ii) रिक्त स्थान की पूर्ति रूप (Completion Type)।
(ब) अभिज्ञान रूप (Recognition Type) -
(i) बहुचर्चित रूप (Multiple Choice Type),
(ii) एकान्तर-अनुक्रिया रूप (Alternative Response) या सत्य / असत्य रूप (True False
Type),
(iii) समानता रूप (Matching Type),
(iv) सादृश-अनुभव रूप (Analogy Type),
(v) वर्गीकरण रूप (Classification Type)।
(3) प्रत्येक प्रकार के प्रश्नों का अध्ययन निम्न पक्षों में किया जाता है
(अ) रूप का अर्थ एवं परिभाषा।
(ब) उपयोगिता तथा सीमायें।
(स) अनुमान से सही करने के अवसर।
(द) सावधानियाँ |
(य) नियम तथा सुझाव, जिनको पदों के निर्माण के ध्यान में रखना चाहिए।
तृतीय सोपान - परीक्षा की जाँच करना (Try out the Test)
1. परीक्षा की पूर्व जाँच करना (Pre-Try out) यह छोटे समूह पर की जाती है।
2. परीक्षा की सही जाँच करना (Proper Try out)
(i) पद - विश्लेषण (Item Analysis)।
(ii) पदों के चयन के लिए मानदण्डों को निर्धारित करना।
(iii) पद- विश्वसनीयता तथा वैधता की गणना करना।
(iv) परीक्षा का अन्तिम रूप तैयार करना।
(3) परीक्षा की अन्तिम जाँच के लिए वर्ग समूह पर प्रयोग करना।
चतुर्थ सोपान - मूल्यांकन (Evaluation)
(i) विशाल समूह पर परीक्षा का प्रशासन करना।
(ii) अंकन करना और प्राप्त प्रदत्तों की व्यवस्था करना।
(iii) विश्वसनीय गुणक की गणना करना।
(iv) वैधता गुणक की गणना करना।
(v) मानक स्तरों (Norms) का विकास करना।
(vi) अनुसूची (Manual) तैयार करना।
अधिगम - उद्देश्यों के मूल्यांकन में मानदण्ड परीक्षा प्रयुक्त की जाती है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि यह केन्द्रित होती है। मानदण्ड परीक्षा विश्वसनीय तथा वैध होनी चाहिए। एक उत्तम मानदण्ड परीक्षा के निर्माण में उपर्युक्त चारों सोपानों पर अनुसरण किया जाता है। इसमें अधिगम के उद्देश्यों, कार्य-विश्लेषण तथा अधिगम स्वरूपों को विशेष महत्त्व दिया जाता है। वस्तुनिष्ठ परीक्षा का रूप ही साधारणतः मानदण्ड- परीक्षाओं में प्रयुक्त किया जाता है। इसे ज्ञान बोध तथा प्रयोग उद्देश्यों के मूल्यांकन के लिए सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है।
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