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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2760
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- मौखिक रचना एवं लिखित रचना की तुलना कीजिए।

उत्तर-

मौखिक रचना एवं लिखित रचना की तुलना

मौखिक रचना लिखित रचना
(1) मौखिक रचना में ध्वनि-विज्ञान की विशेष भूमिका रहती है। अशुद्धियों की पकड़ कम होती है। लिखित रचना में वाक्य विज्ञान तथा वाक्य- विन्यास का विशेष महत्त्व होता है। अशुद्धियों की पकड़ अधिक होती है।
(2) मौखिक रचना का जीवन काल में तथा व्यावहारिक दिन-प्रतिदिन के जीवन में विशेष महत्त्व होता है। लिखित रचना का अपेक्षाकृत उतना महत्त्व नहीं होता है, परन्तु बाद में व्यक्ति को जीवित रखती है।
(3) मौखिक रचना से व्यक्तित्त्व का विकास, सामाजिक क्षमताओं का विकास और समाज में स्थान बनाता है। लिखित रचना से ज्ञानात्मक पक्ष का विकास होता है। चिन्तन का अधिक क्षेत्र होता है।
(4) मौखिक रचना की शक्ति नैसर्गिक है। भावों एवं विचारों की अभिव्यक्ति की कला है। लिखित रचना अर्जित क्षमता व कौशल है। भावों एवं विचारों की अभिव्यक्ति लिखित रूप में की जाती है।
(5) मौखिक अभिव्यक्ति का विकास बोलने से आरम्भ हो जाता है। मातृभाषा से मौखिक रचना आरम्भ हो जाती है और मानक भाषा में परिष्कृत होती जाती है। व्याकरण की विशेष भूमिका नहीं होती है। लिखित रचना में लिपि का ज्ञान प्रशिक्षण तथा अभ्यास से विकास किया जाता है। लिखित रचना की वर्तनी का विशेष महत्त्व होता है। इसमें व्याकरण का उपयोग होता है।

 

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