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बीएड सेमेस्टर-2 चतुर्थ (A) प्रश्नपत्र - पर्यावरणीय शिक्षा

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2759
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 चतुर्थ (A) प्रश्नपत्र - पर्यावरणीय शिक्षा - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- पर्यावरण शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

पर्यावरणीय शिक्षा के कुछ प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन इस प्रकार है-

1. उत्तम नागरिकता का विकास - उत्तम नागरिकों का निर्माण सामाजिक अध्ययन के माध्यम से ही सम्भव हो सकता है। इसलिए यही पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य माना गया है।

2. सामाजिक भावनाओं का विकास - किसी भी देश के नागरिकों की समृद्धि वहाँ के जनसमुदाय की सामाजिक भावनाओं का विकास पर आधारित रहती है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का समाधान छात्रों तथा जनता के मिले-जुले प्रयासों से ही किया जा सकता है, क्योंकि पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से सच्ची सामाजिक भावनाओं का विकास होता है। इसलिये इसे दूसरा उद्देश्य अथवा लक्ष्य माना जाता है।

3. वायु प्रदूषण की समस्याओं से परिचित कराना - पर्यावरण शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को वायु प्रदूषण से उत्पन्न भयंकर समस्याओं से परिचित कराना है, जिससे कि छात्र वायु को प्रदूषित होने से रोकने में अपना सक्रिय योगदान कर सकें और इसके आगामी खतरों से सचेत तथा सावधान रहें।

4. जल प्रदूषण की समस्या - छात्रों को जल प्रदूषण के कारणों तथा समस्याओं से परिचित कराना चाहिये तथा इसके उपचार अर्थात् समाधान के उपाय बताने चाहिये, तभी वे इसके समाधान में योगदान कर सकते हैं।

5. भू-प्रदूषण की समस्याओं से परिचित कराना - पर्यावरण - शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को भू-प्रदूषण की समस्याओं के कारणों तथा भयंकर प्रभावों से अवगत कराना है, जिससे कि वह जगह-जगह कूड़ा-करकट न डालें, क्योंकि इससे भू-प्रदूषण की समस्या जटिल रूप धारण कर लेती है। जगह-जगह थूकने तथा गन्दगी डालने से बदबू फैलती है। अनेक रोगाणुओं का जन्म होता है तथा प्रदूषण फैलता है। इसी प्रकार जगह-जगह मकान बनाने से भी भू-प्रदूषण होता है, क्योंकि सटे हुए मकान बनाने से प्रदूषण को रोकने हेतु वहाँ वृक्षारोपण के लिये खाली स्थान नहीं रह पाता है । इस प्रकार भू-प्रदूषण की समस्याओं का समाधान पर्यावरण-शिक्षा के माध्यम से किया जा सकता है।

6. ध्वनि प्रदूषण की समस्याओं से परिचित कराना - पर्यावरण शिक्षा का उद्देश्य छात्र को तेज ध्वनि करने वाले वाहनों, रेडियो, दूरदर्शन, स्टीरियो टेपरिकार्डर आदि से होने वाली ध्वनि प्रदूषण के खतरों से परिचित कराना है, जिससे कि वे अपने पास-पड़ोस के वातावरण में होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोक सकें तथा स्वयं भी इस प्रदूषण में हिस्सेदार बनने से बच सकें।

7. पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना - पर्यावरण शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रेरित करना है। इसलिये छात्रों को राष्ट्रीय तथा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण व वनों के संरक्षण के लिये बनाये गये नियमों का कड़ाई से पालन करने की शिक्षा प्रदान की जानी चाहिये, जिससे कि वनों का विनाश न हो सके और पर्यावरण का संरक्षण हो सके।

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