|
बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
5 पाठक हैं |
||||||
बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- रेखीय तथा शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन की तुलना कीजिए।
उत्तर-
रेखीय और शाखीय अनुदेशन की तुलना
(Comparison of Linear and
Branching Programmed Instruction)
रेखीय और शाखीय दोनों प्रकार के अनुदेशनों की तुलना निम्न प्रकार से की जा सकती है-
| क्र. | रेखीय अधिगमित अनुदेशन | शाखीय अधिगमित अनुदेशन |
|---|---|---|
| 1. | इस अनुदेशन में पदों का आकार छोटा होता अपेक्षाकृत है। | शाखीय अनुदेशन में पदों का आकार बड़ा होता है। |
| 2. | रेखीय अनुदेशन में विद्यार्थी को प्रश्न का उत्तर स्वयं बनाना होता है या वह प्रत्यारोपण करता है। | शाखीय अनुदेशन में विद्यार्थी अनुक्रिया के रूप में सही विकल्प का चुनाव करता है। इसमें प्रश्न प्रत्यक्षज्ञा रूप में होता है। |
| 3. | इसमें फ्रेम का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि विद्यार्थी उत्तर देने में या अनुक्रिया करने में त्रुटि न करे। | इसमें त्रुटियों को स्पष्टिकरण देकर अधिगम स्पष्ट और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। |
| 4. | रेखीय अधिगम फ्रेम में स्पष्ट उत्तर में सही उत्तर दिखाने तत्काल प्रतिपुष्टि की व्यवस्था है। | इसमें प्रतिपुष्टि के लिए बालक को स्पष्टिकरण दिया जाता है। इस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिपुष्टि दी जाती है। |
| 5. | रेखीय अधिगमित अनुदेशन में भी पदों को पढ़ना होता है। | शाखीय अधिगमित अनुदेशन में सभी पद पढ़ना आवश्यक नहीं है। |
| 6. | इसमें विविधता एवं नवीनता कम है। अनुबोधकों का प्रयोग रेखीय अधिगम में अधिक किया जाता है। | इसमें विविधता एवं नवीनता अधिक है। इसमें अनुबोध का उपयोग बहुत सीमित है। |
| 7. | इसमें त्रुटियों को महत्व नहीं दिया जाता है। | इसमें त्रुटियों को महत्व दिया जाता है। |
| 8. | विद्यार्थी को उत्तर देने की स्वतंत्रता नहीं है अर्थात् उसे निर्धारित उत्तर ही देना है। | विद्यार्थी उत्तर देने को स्वतंत्र है, वह एक से अधिक उत्तर भी दे सकता है। |
| 9. | यह छोटी कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है। | यह बड़ी कक्षा के लिए अधिक उपयोगी है। |
| 10. | यह एक ही दिशा में विद्यार्थी को आगे बढ़ाता है। | इसमें विद्यार्थी विभिन्न शाखाओं में से होकर गुज़रता है। |
| 11. | इसके प्रवर्तक बी. एफ. स्किनर थे। | इसका सूत्रपात नार्मन ए. क्राउडर ने किया। |
|
|||||
अन्य पुस्तकें
लोगों की राय
No reviews for this book










