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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन की मान्यताओं एवं सीमाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन की मान्यताएँ
(Assumptions Underlying Branching
Programmed Instruction)
यह चार मान्यताओं पर आधारित है-
1. जो फ्रेम बालक को पढ़ने के लिए प्रस्तुत किया जाता है उसको पढ़ने से छात्र उसे समझ लेगा।
2. त्रुटियाँ सीखने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बालक द्वारा की जाने वाली त्रुटियों को ढूँढना तथा उनका निवारण करने से अधिगम अधिक प्रभावी होगा।
3. शाखीय-अभिक्रमित अनुदेशन पद्धति लचीली होने के कारण सभी स्तर के छात्र इससे लाभान्वित हो सकते हैं।
4. शाखीय-अभिक्रमित अनुदेशन में बालक तुलना करना व भेद करना सीखता है।
शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन की सीमाएँ
(Limitations of Branching Programmed Instruction)
शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन की निम्न सीमाएँ हैं-
1. बालक कभी-कभी बिना पढ़े ही सही उत्तर को छाँट सकता है।
2. इस प्रकार के अनुदेशन का निर्माण किया जाना बहुत कठिन कार्य है।
3. इसमें पृष्ठ की संख्या अधिक होने से यह महँगा व विस्तृत हो जाता है।
4. यह बड़ी कक्षाओं के लिए उपयोगी है।
5. इस प्रकार के अधिगम से पूरी पुस्तक पढ़ाया जाना सम्भव नहीं है।
6. यह मन्द बुद्धि छात्रों के लिए उपयोगी नहीं है।
7. इसमें बार-बार पन्ने पलटने से विद्यार्थी शीघ्र ऊब सकता है।
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