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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2758
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न अभिक्रमित अनुदेशन का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

अथवा
अभिक्रमित अनुदेशन क्या है? इसके सिद्धान्तों एवं लाभों का वर्णन कीजिए।
अथवा
अभिक्रमित अनुदेशन पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-

सही शिक्षण का अर्थ है कि बालक को प्रेरित कर नये व्यवहारों को अर्जित करने में सहायता प्रदान करना। यह सहायता मुख्यतः अध्यापक द्वारा प्रदान की जाती है। अध्यापक पर कार्य - भार (Work-load) बढ़ जाने के कारण इस कार्य को शिक्षक के स्थान पर विशेष शिक्षण सामग्री को कुछ सीमा तक सौंपा जा रहा है, यह विशेष प्रकार की सामग्री जिसमें बालक स्वयं की सीखने की गति से सीखता है, उसे स्वयं अध्ययन करना होता है तथा उसके उत्तरों की जाँच तुरन्त की जाती है, अभिक्रमित अनुदेशन कहलाता है।

अभिक्रमित अनुदेशन का अर्थ एवं परिभाषाएँ
(Meaning and Definition of
Programmed Instruction)

अभिक्रमित अनुदेशन के अर्थ को समझने से पहले कुछ महत्त्वपूर्ण प्रत्यय जैसे शिक्षण व अनुदेशन को जानना आवश्यक होगा। शिक्षण एक वृहत् प्रत्यय है जिसमें अनुदेशन निहित है। इस अनुदेशन को जब अधिगम के सिद्धान्तों पर आधारित कर पूर्व नियोजित कर लिया जाता है कि कौन-कौन से प्रश्न पूछे जाने हैं, कौन-कौन सी क्रियाएँ करानी हैं तथा बालक जब इन सबको अपनी सीखने की रफ्तार से सीखने को स्वतन्त्र होता है, यह अभिक्रमित अनुदेशन कहलाता है। पाठ-योजना तथा अभिक्रमित अनुदेशन में निम्नलिखित अन्तर हैं-

1. पाठ-योजना से अध्यापक समूह-शिक्षण करता है जबकि अभिक्रमित अनुदेशन में हर बालक अपनी-अपनी सीखने की रफ्तार से सीखता है। कोई बालक तीव्र गति से सीखता है तथा कोई बालक धीमी गति से सीखता है। पाठ-योजना में सभी बालक चाहे जो भी उनकी सीखने की गति हो, एक रफ्तार से सीखने को बाध्य रहते हैं।

2. पाठ-योजना अध्यापक की शिक्षण करने में सहायता करती है। अध्यापक स्वयं निर्णय करता है कि कौन-सी शैक्षिक क्रिया कब करनी है जबकि अभिक्रमित अनुदेशन पर आधारित सामग्री से बालक स्वयं सीखता है, उसे सीखने में अध्यापक की कोई विशेष आवश्यकता नहीं पड़ती है।

इस प्रकार पाठ-योजना को अभिक्रमित अनुदेशन नहीं कहा जा सकता है।

अभिक्रमित अनुदेशन सक्रिय अनुबन्ध-अनुक्रिया - सिद्धान्त (Operant Conditioning Theory) पर आधारित एक ऐसी प्रविधि है जिसमें निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं-

1. अनुदेशन सामग्री को एक तार्किक क्रम (Logical Sequence) में विद्यार्थी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

2. छात्र की सही अनुक्रिया को पुनर्बलित (Reinforce) किया जाता है।

3. प्राप्त - उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में लिखा जाता है।

4. अनुदेशन- सामग्री का स्तर आसान होता है ताकि कमजोर छात्र भी इसे समझ सकें।

5. पाठ्य वस्तु छोटे-छोटे पदों में छात्र के समक्ष प्रस्तुत की जाती है।

6. छात्र स्वयं की सीखने की गति से विषय-वस्तु को सीख सकता है।

7. इससे ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रत्येक छात्र को अनुक्रिया करनी पड़ती है जिससे वह सदैव क्रियाशील रहता है।

8. अभिक्रमित - अनुदेशन से छात्रों की कमजोरियों का पता लगाकर उनका उपचारात्मक शिक्षण किया जा सकता है।

इस प्रकार अभिक्रमित अनुदेशन एक प्रविधि है जिसमें अधिगम - अनुभवों को तार्किक क्रम में व्यवस्थित कर विद्यार्थी को स्वयं को सीखने की गति से पढ़ने तथा सीखे ज्ञान की प्रतिपुष्टि करने का प्रावधान होता है।

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