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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन
(Branching Programmed Instruction)
रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन में विद्यार्थी को प्रत्येक फ्रेम को पढ़ना पड़ता था। इसकी आवश्यकता न हो तो इसे रेखीय न कह कर शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन कहते हैं। इस प्रकार की व्यवस्था में विद्यार्थी को एक फ्रेम पढ़ने को कहा जाता है। फिर प्रश्न का उत्तर तीन या चार विकल्पों में से एक को चुनना होता है, चूँकि केवल एक उत्तर ही सही उत्तर होता है, विद्यार्थी को गलत उत्तर चुनने पर उसका निदान करने के लिए शाखाओं में होकर पढ़ना पड़ता है। सही उत्तर चुनने पर वह अगले फ्रेम पर पहुँच जाता है। यह अग्र उदाहरण से स्पष्ट हो सकेगा-

उक्त चित्र से यह स्पष्ट है कि फ्रेम संख्या-1 में पूछे गये प्रश्न के तीन उत्तर क्रमशः ए, बी व सी हैं। इनमें ए और बी विकल्प गलत हैं। यदि छात्र इसमें से कोई एक चुनता है तो वह एक के लिए 1 (ए) फ्रेम तथा बी के लिए 1 (बी) फ्रेम को पढ़ेगा तथा वहाँ यह समझेगा कि उसका यह उत्तर ठीक क्यों नहीं है? वह पुन: फ्रेम-1 को पढ़ सही उत्तर ढूँढ़ेगा। यदि वह सी अर्थात् सही उत्तर को चुनता है तो उसे शाखाओं में जाने की आवश्यकता नहीं है, वह सीधे ही फ्रेम संख्या-2 पर आ जाता है। इस प्रकार वह त्रुटि करने पर बार-बार उपचारात्मक शिक्षण के लिए शाखाओं के फ्रेम में पढ़ता है। चूँकि इसमें शाखाओं (Branching) की व्यवस्था है, इसलिए इसे शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन कहते हैं।
शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन के प्रतिपादक नार्मन ए० क्राउडर (Norman A. Crowder) हैं। इस कारण इसे कभी-कभी क्राउडेरियन अनुदेशन भी कहते हैं। इसमें विद्यार्थी अपने पढ़ने की दिशा स्वयं निर्धारित करता है अर्थात् त्रुटि करने पर वह शाखाओं में तथा न करने पर अगले फ्रेम का अध्ययन करता है चूँकि यह निर्णय आन्तरिक ( Instrinsic) है अतः इसे आन्तरिक अनुदेशन (Instrinsic Instruction) भी कहते हैं।
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