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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन के स्वरूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन का रूप
रेखीय अभिक्रमित - अनुदेशन में पद या फ्रेम का आकार छोटा होता है। वह इतना ही होता है कि एक बार में छात्र उसे पढ़कर आसानी से समझ लें। प्रत्येक पद में उद्दीपन, अनुक्रिया तथा पुनर्बलन की व्यवस्था होना आवश्यक है। फ्रेम या पद की प्रकृति के आधार पर इन्हें निम्न भागों में बाँटा जा सकता है-
प्रस्तावना-पद
(Introductory Frame)
इस प्रकार के पद अभिक्रमित अनुदेशन के प्रारम्भ में होते हैं तथा ये बालक के पूर्व - ज्ञान तथा सीखे जाने वाले पाठ के बीच एक माध्यम का कार्य करते हैं। ये प्रमुख रूप से पाठ की प्रस्तावना से सम्बन्धित होते हैं।
शिक्षण-पद
(Teaching Frame)
ये पद विषय-वस्तु से सम्बन्धित होते हैं। इनसे छात्रों को नया ज्ञान दिया जाता है जो कि इस क्रम में व्यवस्थित होता है कि धीरे-धीरे वह पूरा पाठ समझ लेता है। इस प्रकार के पदों की संख्या अधिक होती है।
परीक्षण-पद
(Testing Frame)
किसी एक उप इकाई को अभिक्रमित अनुदेशन के द्वारा पढ़ाने के पश्चात् यह आवश्यक है कि बालक इसे किस सीमा तक सीख पाए हैं, इसकी जानकारी ली जानी चाहिए। इस हेतु शिक्षण पद के बाद अभिक्रमित अनुदेशन में परीक्षण पद या फ्रेम रखे जाते हैं। इस प्रकार के पदों में अनुबोधक का उपयोग नहीं किया जाता तथा इन पदों का सही उत्तर प्राप्त करने पर यह समझा जाता है कि विद्यार्थी सम्बन्धित उप इकाई को पूर्णत: समझ चुका है।
प्रश्न- रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन की विशेषताएँ
(Characteristics of Linear Programmed Instruction)
रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन का उपयोग बहुत अधिक किया जाता है। इसमें निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. इस प्रकार के अभिक्रमित अनुदेशन का निर्माण करना आसान है।
2. यह मनोविज्ञान के सिद्धान्त पर आधारित है।
3. पाठ्य-वस्तु को छोटे-छोटे फ्रेमों में प्रस्तुत किया जाता है अतः इसको समझना बालक के लिए आसान है।
4. इसमें व्यक्तिगत विभिन्नताओं के अनुरूप शिक्षण सम्भव है।
5. रेखीय-अभिक्रमित-अनुदेशन में विद्यार्थी क्रियाशील होकर सीखता है।
6. यह इस मान्यता पर आधारित है कि बालक कम त्रुटियों से सीखता है। यदि वह त्रुटि करेगा तो उसका पुनर्बलन नहीं हो सकेगा। एक आदर्श रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन में बालक कोई त्रुटि नहीं करेगा, ऐसी उनकी मान्यता है। फिर भी दस प्रतिशत तक की सीमा तक त्रुटियों को रेखीय अभिक्रमित- अनुदेशन में स्वीकार किया जा सकता है।
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