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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2758
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- फ्लैण्डर्स अन्तःक्रिया विश्लेषण की इनकोडिंग और डिकोडिंग का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर-

अन्तःक्रिया विश्लेषण की दो प्रमुख प्रक्रियाएँ होती हैं-

(1) अंकन प्रक्रिया
(2) अंकन अर्थापन प्रक्रिया

(1) अंकन प्रक्रिया - अंकन प्रक्रिया से पहले अध्यापक को दस वर्गों का अच्छी तरह से ज्ञान होना आवश्यक है। अध्यापक को कक्षा के शाब्दिक व्यवहारों का अभ्यास होना चाहिए। इसके लिए अनुभवी निरीक्षक का निर्देशन तथा पर्यवेक्षण भी आवश्यक होता है। अंकन के अभ्यास में अनुभवी निरीक्षक को भी साथ रखना चाहिए, जिससे कठिनाई होने पर वह सुझाव प्रदान कर सके। अभ्यास के समय सही वर्ग का अंकन तथा वर्ग को तीन सेकेण्ड के अंदर अंकित करने के लिए कौशलों का विकास करना आवश्यक है। कक्षागत अन्तः क्रिया विश्लेषण से पूर्व निरीक्षक को अपने विश्वसनीय गुणक की गणना करनी चाहिए।

अंकन प्रक्रिया के लिए निरीक्षक को कक्षा में उस स्थान पर बैठना चाहिए जहाँ से वह कक्षा में घटित होने वाली प्रत्येक घटना अथवा अनुक्रिया को अच्छी तरह देख सके। उसको समझ सके क्योंकि निरीक्षक ने हर घटना को किसी वर्ग की संज्ञा देनी है। एक घटना या क्रिया का अंकन हर तीन सेकेण्ड के बाद किया जाता है। इस प्रकार एक मिनट से कम से कम 20 वर्गों की संख्याओं को अंकित किया जाता है। अंकन की शुद्धता पर अधिक ध्यान दिया जाता है। 40 मिनट के समय में पहले 5 मिनट तक कुछ भी अंकित नहीं किया जाता, क्योंकि उस समय अव्यवस्था बनी रहती है। वर्गों के अंकन का आलेख लम्बवत् रूप से तैयार किया जाता है। आलेख पत्र पर शिक्षक का नाम, कक्षा, विषय, संदर्भ तथा दिनांक को भी अंकित किया जाता है।

कक्षा की घटनाओं को अंकित करने के बाद उनकी व्याख्या के लिए आव्यूह रचना तैयार की जाती है। इसकी घटनाओं से घटनाओं के क्रम-शिक्षक, छात्र व्यवहार की जाती है। इस आव्यूह में दस स्तम्भ तथा दस पंक्तियाँ होती हैं। दो क्रमागत वर्गों के लिए आवृत्ति अंकित की जाती है। आव्यूह रचना के बनाने से पूर्व आलेख पत्र के आरम्भ में वर्ग 10 तथा अन्त में वर्ग 10 को अंकित किया जाता है। दो वर्गों का लगातार युग्म बना लिया जाता है। युग्म का पहला वर्ग पंक्ति तथा दूसरा वर्ग स्तम्भ में जहाँ वह मिलते हैं उस कक्षिका में एक आवृत्ति अंकित की जाती है। एक आव्यूह में 10 कक्षिकाएँ होती हैं।

कक्षा की सभी अनुक्रियाओं को इन्हीं दस वर्गों में विभाजित किया जाता है-

(2) अन्तर्क्रिया विश्लेषण का अर्थापन करना - कक्षा अन्तःक्रिया की व्याख्या के लिए निरीक्षण आव्यूह तालिका की रचना की जाती है। इस तालिका की सहायता से कक्षा शिक्षण व्यवहार की व्याख्या की जाती है। आरम्भ में फ्लैण्डर्स ने आव्यूह तालिका को व्यवहार क्षेत्रों में विभाजित किया बाद में इन क्षेत्रों को व्यवहार अनुपात का नाम दिया। इस आव्यूह तालिका से दो प्रकार का अर्थापन किया जाता है-

(अ) परिमाणात्मक अर्थापन- 

(i) वर्ग अनुपात
(ii) व्यवहार अनुपात
(iii) अन्तःक्रिया चर।

(ब) गुणात्मक अर्थापन-

(i) घड़ी के अनुसार प्रवाह चार्ट
(ii) प्रवाह रेखा चित्र
(iii) अन्तः क्रिया प्रतिमान।

इस प्रकार अन्तःक्रिया मैट्रिक्स की इस प्रकार की व्याख्या को अंकन अर्थापन कहते हैं। इसमें हमें एक और महत्त्वपूर्ण पहलू के बारे में ज्ञान होता है कि शिक्षक का कक्षा व्यवहार प्रजातांत्रिक है या प्रभुत्ववादी व्यवहार है।

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