|
बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
5 पाठक हैं |
||||||
बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- फ्लैण्डर्स की अन्तः क्रिया विश्लेषण प्रणाली विभिन्न वर्गों के अर्थ संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
फ्लैण्डर्स ने कक्षा में होने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों के व्यवहारों को दस वर्गों में बाँटा है। यह विभाजन इस प्रकार है-
(1) शिक्षक वार्ता - 7 वर्ग
(2) विद्यार्थी वार्ता - 2 वर्ग
(3) मौन या विभ्रान्ति- 1 वर्ग
पहले सात वर्ग भी दो भागों में बाँटे गये हैं। पहला प्रत्यक्ष और दूसरा अप्रत्यक्ष।
विभिन्न वर्गों का अर्थ-
(A) अप्रत्यक्ष प्रभाव - शिक्षक इस विधि में प्रथम चार वर्गों में विद्यार्थी को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है जो निम्न है-
वर्ग 1 : भावनाओं को स्वीकार करना - इस वर्ग में अध्यापक विद्यार्थियों की भावनाओं को स्वीकार करता है। इसमें विद्यार्थी को प्रदर्शन का अधिकार है, उन्हें दण्ड नहीं दिया जाता।
वर्ग 2 : प्रशंसा या प्रोत्साहन - शिक्षक विद्यार्थियों की क्रियाओं की प्रशंसा करते 'उत्तम', 'अच्छा' आदि कहता है उन्हें और बताओ। आगे बढ़ो कहकर प्रोत्साहित भी करता है।
वर्ग 3 : विचारों की स्वीकृति का प्रयोग करना - इस वर्ग में शिक्षक विद्यार्थियों के विचारों को ही स्वीकृत करता है। उसके सुझाव को अपने शब्दों या शैली में अथवा संक्षेप में दोहराता है।
वर्ग 4 : प्रश्न पूछना - इसमें केवल प्रश्नों को पूछना ही शामिल है। प्रश्न पूछने के बाद अध्यापक को उत्तर अवश्य मिलना चाहिए।
(B) प्रत्यक्ष प्रभाव-
वर्ग 5 : व्याख्यान - यह एक प्रकार की शाब्दिक अन्तः क्रिया है और इसका प्रयोग सूचनाएँ देने के लिए या विचारों से अवगत कराने के लिए किया जाता है। जब शिक्षक कुछ समझा रहा होता है या विचार-विमर्श करता है अथवा सूचनाएं देनी होती हैं।
वर्ग 6 : निर्देश देना - विद्यार्थियों को कक्षा में कुछ करने के लिए कहना निर्देश देना कहलाता है जैसे सभी विद्यार्थी आगे खड़े होंगे अथवा बैठकर काम करो।
वर्ग 7 : आलोचना तथा अधिकार दिखाना - जब अध्यापक विद्यार्थी के किसी अनुचित व्यवहार के लिए किसी आलोचना का प्रयोग करता है जैसे अध्यापक यह कहे यह मुझे पसन्द नहीं या मैं या मैं तुम्हें कक्षा से बाहर निकाल दूँगा। 'शान्त रहो।'
(C) विद्यार्थी वार्त्ता - इस कथन को दो भागों में बाँटा गया है, प्रथम छात्र कथन अनुक्रिया तथा दूसरा छात्र कथन वार्ता या सोपक्रम कहलाता है।
वर्ग 8 : छात्र कथन अनुक्रिया - जब अध्यापक विद्यार्थी से प्रश्न पूछता है और विद्यार्थी प्रश्न का उत्तर देते हैं अथवा शिक्षक द्वारा दिए गए निर्देशों के प्रति शाब्दिक - प्रतिक्रिया करते हैं इन सभी क्रियाओं को इस वर्ग में अंकित किया जाता है।
वर्ग 9 : छात्र वार्ता में पहल या स्त्रेपक्रम - इसमें विद्यार्थी वार्ता के लिए पहल करते हैं वह स्वयं ही प्रश्न पूछने अथवा कुछ कहने के लिए उत्सुक होते हैं, तब उन व्यवहारों को वर्ग 9 में अंकित किया जाता है। विद्यार्थियों के विचारों की अभिव्यक्ति इसी वर्ग में सम्मिलित की जाती है।
वर्ग 10: मौन या विभ्रान्ति - कक्षा में जब भी किसी मौन या विभ्रान्ति की स्थिति हो तब वर्ग 10 को अंकित किया जाता है। अनेक बार कक्षा में ऐसी परिस्थितियाँ भी उत्पन्न हो जाती हैं जब सभी छात्र एक साथ बोलने लगते हैं और निरीक्षक यह निर्णय नहीं कर पाता कि कक्षा में कौन बोल रहा है। कभी-कभी ऐसी परिस्थिति भी उत्पन्न हो जाती है कि कोई भी नहीं बोलता है अर्थात् किसी भी प्रकार की शाब्दिक अन्तःक्रिया नहीं होती। इन दोनों स्थितियों में वर्ग 19 (मौन विभ्रान्ति)।
|
|||||










