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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- अन्तः क्रिया विश्लेषण के अर्थ को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
शिक्षण-व्यवहार एक सामाजिक अन्तः क्रिया है। अध्यापक और शिक्षार्थियों के बीच पारस्परिक अन्तःक्रिया 'शिक्षण' कहलाती है। अध्यापक और शिक्षार्थी, शिक्षार्थी एवं उनके बीच शाब्दिक सम्प्रेषण के निरीक्षण और अंकन विधि को ही कक्षा अन्तःक्रिया विश्लेषण प्रविधि कहा गया है। इसे ओबर ने इन शब्दों में परिभाषित किया है- "निरीक्षण प्रणाली वह उपयोगी साधन है जिसमें अधिगम की स्थितियों के चरों की अन्तः क्रिया को पहचानना, वर्गीकरण, मापन और अध्ययन किया जाता है।"
अन्तः क्रिया विश्लेषण प्रविधि एक विशिष्ट शोध प्रक्रिया के साथ-साथ कक्षा में घटित घटना क्रमबद्ध घटनाओं के अध्ययन की एक वैज्ञानिक विधि भी है। इस विधि के माध्यम से कक्षा की सभी क्रियाओं एवं व्यवहारों का निरीक्षण के द्वारा अंकन किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से कक्षा शाब्दिक सम्प्रेषण को गुणात्मक और परिणामात्मक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से अध्यापक प्रभाव का मापन किया जा सकता है, क्योंकि यह धारणा बन गई है कि कक्षा में अध्यापक का अधिकांशतः प्रभाव उसके शाब्दिक कथनों से संबंधित होता है। अध्यापक एवं शिक्षार्थियों की शाब्दिक अन्तः क्रिया कक्षा के सामाजिक और संवेगात्मक वातावरण से प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित रहती है।
इस प्रक्रिया में विषयवस्तु के शिक्षण का मापन नहीं किया जाता है। विषय-वस्तु शुद्ध है अथवा अशुद्ध है, इसका ज्ञान इस प्रक्रिया से सम्भव नहीं है। शाब्दिक सम्प्रेषण का विषय सामग्री से मुक्त रखकर ही अध्ययन सम्भव है। यह कक्षा के सामाजिक एवं भावात्मक वातावरण का ही मापन कर सकती है।
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