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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2758
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- श्रव्य दृश्य सामग्री के प्रकार लिखिए।

उत्तर -

श्रव्य दृश्य सामग्री के प्रकार
(Types of Audio-Visual Aids)

श्रव्य-दृश्य उपकरणों / सामग्रियों को तीन वर्गों में रख सकते हैं जो निम्नलिखित हैं-

1. श्रव्य उपकरण (Audio Aids) - रेडियो, ग्रामोफोन, टेपरिकार्डर आदि।

2. दृश्य उपकरण (Visual Aids) - वास्तविक पदार्थ एवं नमूने, मॉडल्स, चित्र, रेखाचित्र, चार्ट, मानचित्र तथा ग्लोब, श्यामपट्ट, बुलेटिन बोर्ड, फ्लेनेल बोर्ड, समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएँ, संग्रहालय आदि।

3. श्रव्य-दृश्य उपकरण (Audio Visual Aids) - प्रोजेक्टर (जादुई लालटेन, अपारचित्रदर्शी, पारचित्रदर्शी, ओवर हैड प्रोजेक्टर), चलचित्र, टेलीविजन, विडियो एवं कम्प्यूटर आदि।

उपर्युक्त श्रव्य-दृश्य सामग्रियों का विस्तृत विवरण निम्न प्रकार से है-

1. श्रव्य उपकरण (Audio Aids) - श्रव्य उपकरणों को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है-

(i) रेडियो (Radio) - शिक्षण जगत में रेडियो का प्रयोग 20वीं शताब्दी से हो रहा है। इसका श्रव्य उपकरणों में सर्वाधिक महत्व है। यह शिक्षण का एक ऐसा शक्तिशाली साधन है जिससे छात्रों के मानसिक विकास में वृद्धि की जा सकती है।

(ii) ग्रामोफोन ( Gramophone) - कक्षा शिक्षण में रेडियो प्रत्येक पाठ को समझने के लिये उपयोगी नहीं होता, अतः इस कमी की पूर्ति हेतु कुछ रिकार्ड तैयार किये जाते हैं जिन्हें ग्रामोफोन अथवा रिकार्ड प्लेयर पर बजाकर छात्रों को सुनाया जाता है और छात्र उपयोगी विषय-वस्तु नोट करते जाते हैं।

(iii) टेपरिकार्डर (Tape Recorder) - टेपरिकार्डर अत्यधिक उपयोगी शैक्षिक उपकरण है। इसके माध्यम से वैज्ञानिकों के जीवन-वृतान्त, अनुसन्धान कार्य, नियम, सिद्धान्त आदि को टेप करके शिक्षक उनका पाठ्यानुकूल उपयोग कर सकता है और शिक्षण को रोचक एवं प्रभावपूर्ण बना सकता है।

2. दृश्य उपकरण (Visual Aids) - ये निम्नलिखित हैं-

(i) वास्तविक पदार्थ एवं नमूने (Real Objects and Specimens) - शिक्षण में वास्तविक पदार्थ एवं नमूनों का विशेष महत्व है। छात्र इन्हें स्वयं देखकर एवं छूकर यथार्थ ज्ञान प्राप्त करते हैं। इनसे छात्रों की निरीक्षण शक्ति का विकास होता है।

(ii) मॉडल (Models) - बहुत-सी वस्तुएँ ऐसी होती हैं जिन्हें कक्षा में दिखाया जाना असम्भव होता है। इसके लिये उन वस्तुओं का निश्चित अनुपात में बना हुआ मॉडल दिखाया जाता है जिसे देखकर छात्र यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। इस प्रकार मॉडल वास्तविक वस्तुओं के निश्चित अनुपात में बने हुये लघु रूप होते हैं।

(iii) चित्र (Pictures) - सामाजिक विज्ञान शिक्षण में चित्रों का प्रयोग प्रमुख रूप से होता है। चित्र किसी भी प्रकरण को अधिक स्पष्ट एवं रोचक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वर्तमान समय में फोटोग्राफी अत्यन्त विकसित दशा में है। यथार्थ वस्तु के अभाव में चित्र शिक्षण कार्य में विशेष सहायता पहुँचाते हैं।

(iv) रेखाचित्र (Sketches) - रेखाचित्र का उपयोग किसी स्थान की स्थिति, जन्म-दर, मृत्यु-दर, जनसंख्या वृद्धि, विभिन्न बीमारियों एवं उपचार आदि को स्पष्ट करने के लिये किया जाता है। यह शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों के लिये उपयोगी है क्योंकि इसे बनाने / खींचने में बहुत कम समय लगता है। शिक्षक द्वारा श्यामपट्ट पर रेखाचित्र बनता हुआ देखकर विद्यार्थी सरलता से इसे बनाना सीख लेते हैं।

(v) चार्ट (Chart) - सामाजिक अध्ययन शिक्षण में चार्ट का विशेष महत्व है। यह एक ऐसी शिक्षण सामग्री है जो तथ्यों तथा विचारों की संकेतों में व्याख्या करती है। सामाजिक अध्ययन के लगभग सभी प्रकरणों को चार्टों के माध्यम से कुशलतापूर्वक पढ़ाया जा सकता है।

(vi) मानचित्र तथा ग्लोब (Map and Glob) - मानचित्र तथा ग्लोब का प्रयोग विभिन्न स्थानों की स्थिति का ज्ञान प्रदान करने हेतु किया जाता है। भूगोल शिक्षण में ग्लोब की सहायता से पृथ्वी की रूपरेखा, उसकी स्थिति, उसकी गति, विभिन्न देशों की सीमाएँ आदि बातों को बड़े सरल ढंग से बताया जा सकता है।

(vii) श्यामपट्ट (Black Board) - यह शिक्षा का एक महत्वपूर्ण दृश्य उपकरण है। यह पाठ्य-वस्तु के प्रस्तुतीकरण तथा शिक्षण को रोचक एवं प्रभावपूर्ण बनाने में शिक्षक की सहायता करता है। शिक्षक द्वारा चित्र, रेखाचित्र, चार्ट आदि श्यामपट्ट पर बनाने से वे छात्रों को सरलता से समझ में आ जाते हैं।

(viii) बुलेटिन बोर्ड (Bulletin Board) - बुलेटिन बोर्ड एक प्रकार का ऐसा बोर्ड होता है, जिस पर छात्रों के अवलोकनार्थ अध्ययन सामग्री लगाई जाती है। इस पर दृष्टान्तों तथ्यों एवं घटनाओं को सूचित करने वाले प्रपत्र, समाचार-पत्रों की कतरनें, चित्र आदि लगा दिये जाते हैं जिन्हें छात्र अवकाश के समय देखते अथवा पढ़ते हैं। इस प्रकार छात्रों के समक्ष रचनात्मक कार्यों को प्रदर्शित करने के लिये यह अत्यन्त उपयुक्त साधन है।

(ix) फ्लेनेल बोर्ड (Flannel Board) - यह लकड़ी का एक ऐसा बोर्ड होता है जिस पर फ्लेनेल चढ़ा रहता है। इस पर चित्र व रेखाचित्र को थोड़ा दबाकर चिपका देते हैं जिनके नीचे रेगमाल लगा होता है। दो तथ्यों की तुलना एवं चित्रों को एक क्रम में प्रदर्शित करने में यह बहुत लाभदायक है।

(x) समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएँ (News-papers and Journals) - समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ शिक्षण को रोचक एवं प्रभावपूर्ण बनाने में विशेष सहायक होते हैं। इनसें छात्रों एवं शिक्षकों को महत्वपूर्ण एवं उपयोगी तथ्य और सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। इनमें सामयिक, सामाजिक विज्ञानीय तथा वैज्ञानिक तथ्यों एवं घटनाओं आदि का विवरण रहता है। इनके माध्यम से छात्र एवं शिक्षक देश-विदेश में घटित होने वाली घटनाओं से भी परिचित होते हैं जिसके परिणामस्वरूप उनमें अन्तर्राष्ट्रीय अवबोध एवं सहानुभूति विकसित होती है।

(xi) संग्रहालय (Museum) - संग्रहालय शिक्षण की दृश्य सामग्री का प्रमुख साधन है। इसमें विभिन्न घटनाओं एवं दृश्यों के चित्र, वैज्ञानिकों के चित्र, मॉडल्स आदि संग्रहित किये जाते हैं, जहाँ छात्र निरीक्षण करके अपने ज्ञान की वृद्धि करते हैं।

3. श्रव्य दृश्य उपकरण (Audio Visual Aids) - श्रव्य दृश्य उपकरण निम्नलिखित हैं-

(i) प्रोजेक्टर (Projector) - शिक्षा जगत में प्रोजेक्टर को विज्ञान की एक नवीन देन माना जाता है। वर्तमान में भारतीय विद्यालयों में प्रोजेक्टर का उपयोग तीव्र गति से बढ़ रहा है। इसमें फिल्म, फिल्म-पट्टी एवं स्लाइडें प्रयुक्त होती हैं। इन पर अंकित चित्रों, रेखाचित्रों, मानचित्रों, चार्ट आदि को प्रोजेक्टर द्वारा पर्दे पर प्रक्षेपित किया जाता है। आवश्यकतानुसार स्थिर रखकर इनसे सम्बन्धित समस्त जानकारी शिक्षक छात्रों को करा सकता है।

(ii) जादुई लालटेन (Magic Lantern) - यह एक चित्र प्रदर्शक यन्त्र है । सामाजिक अध्ययन का शिक्षक अपने विषय की विभिन्न स्लाइडों को बनाकर इसके माध्यम से अमूर्त तथ्यों तथा जटिल समस्याओं को छात्रों को सरलतापूर्वक समझा सकता है।

(iii) अपारचित्रदर्शी (Episcope) - यह आधुनिक प्रोजेक्टर हैं। इसमें कागज पर छपी तस्वीरें, पुस्तक के पृष्ठ, प्रेस की कतरनें तथा चट्टान जैसी ठोस वस्तुएँ भी सरलता से प्रदर्शित की जा सकती हैं। यह प्रतिबिम्बों को प्रक्षेपित करने का एक व्यवस्थित साधन है।

(iv) पारचित्रदर्शी (Epidiascope) - यह नवीनतम प्रोजेक्टर है। इसमें छोटे-छोटे चित्रों, मानचित्रों, पोस्टरों, पुस्तक के पृष्ठों आदि को कमरे में अंधेरा करके पर्दे पर बड़ा करके दिखाया जाता है। इस उपकरण ने नागरिकशास्त्र, इतिहास, भूगोल आदि विषयों को सरलतापूर्वक पढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।

(v) ओवर हैड प्रोजेक्टर (Over Head Projector) - इसका प्रयोग सेमिनार, सिम्पोजियम एवं वर्कशाप आदि में व्यापक रूप से देखा जा सकता है परन्तु अब कक्षा शिक्षण में भी इसका प्रयोग किया जाने लगा है। इसके माध्यम से छात्रों को किसी भी प्रकरण की विषय-वस्तु आसानी से समझायी जा सकती है।

(vi) चलचित्र (Cinema) - चलचित्र श्रव्य दृश्य उपकरणों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सामाजिक अध्ययन शिक्षण के लिये यह एक महत्वपूर्ण साधन है। इसके प्रयोग से किसानों की हीन दशा, ग्रामीण समस्याएँ, भारत की फसलें, खनिज पदार्थ, विकास योजनाएँ, भारत के उद्योग, भारतीय रहन-सहन के स्तर आदि बहुत से प्रकरणों की शिक्षा प्रदान की जा सकती है।

(vii) टेलीविजन (Television) - वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में टेलीविजन सर्वाधिक महत्वपूर्ण दृश्य-श्रव्य उपकरण है। इसमें रेडियो एवं चलचित्र दोनों के गुणों का समावेश है। टेलीविजन द्वारा बालक अपने देखने तथा सुनने की दोनों इन्द्रियों का प्रयोग करने के कारण किसी भी तथ्य को शीघ्रता से सीख लेता है। यह उपकरण योग्यतम शिक्षकों को देश की शिक्षण संस्थाओं तक पहुँचाता है और शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाने में सहायक होता है।

(viii) विडियो (Video) - यह श्रव्य दृश्य उपकरणों के अन्तर्गत उपयोगी उपकरण है। शिक्षा के क्षेत्र में यह उपकरण एक आन्दोलन के रूप में उभरकर सामने आया है। इसके माध्यम से विद्यार्थी घर पर ही रहकर दृश्य-श्रव्य कैसेटों के आधार पर शिक्षा ग्रहण कर सकता है। इसमें किसी घटना, भाषण या पाठ को बार-बार रोककर चलाया जा सकता है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT), केन्द्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न शिक्षण विषयों पर विडियो कैसेट तैयार कराये गये हैं जिन्हें अध्ययन केन्द्रों द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है।

(ix) कम्प्यूटर (Computer) - कम्प्यूटर का प्रयोग सभी क्षेत्रों में हो रहा है। यह व्यक्तिगत शिक्षण एवं समूह शिक्षण दोनों के लिये उपयोगी है। इसके उपयोग से शिक्षण में विभिन्न योग्यता रखने वाले छात्र अपनी गति से ज्ञानार्जन करते हुये आगे बढ़ते हैं। कम्पयूटर के व्यापक उपयोग, महत्व एवं उपयोगिता के कारण वर्तमान समय को 'कम्प्यूटर युग' कहा जाने लगा है।

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