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बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-4 पर्यटन एवं यात्रा प्रबन्ध बीकाम सेमेस्टर-4 पर्यटन एवं यात्रा प्रबन्धसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीकाम सेमेस्टर-4 पर्यटन एवं यात्रा प्रबन्ध - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- पर्यटन के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
पर्यटन के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव
किसी समुदाय या एक निश्चित क्षेत्र में रहने वाले लोगों का व्यापक समूह है, जिसकी परंपरा, संस्था, गतिविधियाँ और रुचियाँ समान होती हैं, उसे समाज कहा जाता है। वास्तव में समान पहचान रखने वाले लोगों के समूह के बीच संबंध की प्रणाली को समाज कहा जाता है। यह एक परिवार / इलाके की तरह छोटा या एक पूरे राष्ट्र की तरह बड़ा हो सकता है। संस्कृति उस समाज की प्रथाएँ हैं। यह समाज के लोगों को एक साथ बाँधे रखती है। इसमें इनके आचार, नैतिकता, मान्यताएँ, मूल्य और मानक शामिल हैं।
एक अच्छा आचरण, सामाजिक संबंध निर्माण का स्वीकार्य मार्ग है। इसमें दूसरों के लिए सम्मान, देखभाल और विचार शामिल होते हैं। नैतिकता लोगों के एक समूह या एक समाज द्वारा स्वीकार्य नियमों, सिद्धांतों और कर्तव्यों का एक समूह है, जो सामान्यतः धर्म से स्वतंत्र है। विश्वास व्यवसाय की नींव है। व्यवहार एक व्यक्ति और समाज के दृष्टिकोण और सोच की प्रक्रिया को निर्धारित करता है। व्यवहार वह तरीका है, जिसमें कोई व्यक्ति या समाज के सदस्य व्यवहार करते हैं या कार्य करते हैं। इसे आयोजन, घटना या एक प्रतिक्रिया के संदर्भ के साथ देखा जाता है। इसलिए यह सदस्यों की एक प्रतिक्रिया है। मानदंड समाज के औपचारिक नियम होते हैं। यह सद्भाव बनाए रखने में समुदाय, समूह या समाज के `सदस्यों को विनियमित करते हैं। मूल्य वे आदर्श हैं, जो समाज में सभी के ऊपर समान रूप लागू होते हैं, जैसे- ईमानदारी, सम्मान, करुणा ये मूल्य मानदण्डों की नींव की ईंटें हैं। ये सामाजिक व्यवहार और समाज के लोगों के आचरण के कुछ बुनियादी नियम हैं।
जब अधिकांश लोग सुदूर स्थानों से आते हैं और किसी भी क्षेत्र के स्थानीय निवासियों के साथ बातचीत करते हैं, तो वे वहाँ के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते हैं। पारस्परिक क्रियाओं के कारण मूल्य प्रणाली, व्यवहार, स्वदेशी पहचान में बदलाव दिखाई पड़ते हैं। समुदाय संरचना, पारिवारिक संबंध सामूहिक परंपरागत जीवन-शैली, समारोहों और नैतिकता में विचलन देखे जाते हैं। इसके अलावा कुछ सकारात्मक प्रभाव भी देखे जाते हैं।
पर्यटन के नकारात्मक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव
विशेष गंतव्य स्थानों पर पर्यटन के कई नकारात्मक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव पड़ते हैं। उनमें से महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं-
(1) पारिवारिक संरचना का बंधन / संपर्क को कम करता है और एकाकी परिवार की मान्यता पर बल देता है।
(2) यह शहरीकरण को प्रोत्साहित करता है।
(3) भीड़-भाड़ और स्थानीय लोगों के लिए मनोरंजन सुविधाओं की कमी के कारण पर्यटकों से टकराव और असंतोष होता है।
(4) कुछ पर्यटन स्थलों पर मादक पदार्थों का सेवन और वेश्यावृत्ति बढ़ता हुआ दिखाई पड़ सकता है।
(5) पर्यटन उद्योग में वृद्धि के कारण बच्चों, युवा और महिलाओं का व्यावसायिक लैंगिक शोषण, दुनिया के कई भागों में बढ़ा है। बच्चों को वेश्यालय में अवैध रूप से फंसाया जाता है और सेक्स गुलामी में धकेल दिया जाता है।
(6) विदेशी पर्यटकों के साथ बदसलूकी और बलात्कार पर्यटन को बाधित करता है।
(7) पर्यटकों का कुछ स्थानों और होटलों / हवाई अड्डों पर परंपरागत रूप से स्वागत किया जाता है। कभी-कभी, पारंपरिक स्वागत और आतिथ्य मानदंडों का व्यवसायीकरण भी दिखलाई पड़ता है, जो उन चीजों का मजाक ज्यादा लगता है।
(8) विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के लोगों के साथ मेल-जोल होने से गंतव्य क्षेत्र की अपनी संस्कृति में ह्रास परिलक्षित होता है। बाद में, यह सांस्कृतिक पहचान हेतु लोगों में संघर्ष की भावना पैदा करता है।
(9) पर्यटक स्थानीय अकुशल लोगों की तुलना में अधिक धनी होते हैं। यह पैसे कमाने और पर्यटकों द्वारा लाए गए उपकरणों को पाने के लिए लालच को जन्म देता है। इस तरह का लालच स्थानीय लोगों को अपराध करने के लिए मजबूर कर सकता है।
(10) स्थानीय लोगों के नैतिक आचरण में गिरावट की प्रवृत्ति दिखाई देती है और विशेष रूप से स्थानीय युवा विदेशी की नकल करने का प्रयास करते हैं। वे धूम्रपान, शराब पीने, जुआ खेलने, लड़की का हाथ पकड़कर चलने या खुले में चुंबन करने का प्रयास करने आदि पर्यटकों जैसी आदतों को अपनाने की कोशिश करते हैं।
(11) विदेशी पर्यटकों द्वारा स्थानीय नियमों और रूढ़ियों का उल्लंघन करना मेजबान और मेहमान के बीच संघर्ष को जन्म देता है।
(12) स्थानीय भाषा और बोली अपनी शुद्धतायुक्त पहचान खो रही है, एक नई मिश्रित भाषा का जन्म हो रहा है।
(13) सांस्कृतिक भिन्नता के कारण सांस्कृतिक टकराव हो रहे हैं। जातीयता, धर्म, मूल्यों, व्यवहार, जीवन शैली और समृद्धि के स्तर में अंतर के कारण भी टकराव का जन्म हो रहा है।
(14) कई पर्यटक विभिन्न जीवन-शैलियों के साथ विभिन्न समाजों से आते हैं। वे हर तरह के सुख की तलाश करते हैं और अधिक पैसा खर्च करते हैं। कभी-कभी उनका व्यवहार भी बहुत ही अहंकारपूर्ण होता है। यहाँ तक कि कभी-कभी उनके अपने समाज में भी वे व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता, जहाँ से वे आए हैं।
(15) आर्थिक रूप से कम विकसित देशों में विशेषकर 'संपन्न' और 'वंचितों के बीच अंतर बढ़ रहा है। यह सामाजिक तनाव और कई बार जातीय तनाव को जन्म देता है।
(16) अज्ञानता या लापरवाही के कारण, पर्यटक अक्सर स्थानीय रूढ़ियों और नैतिक मूल्यों का सम्मान करने में असफल होते हैं। यह स्थानीय लोगों में क्रोध उत्पन्न कर सकता है।
पर्यटन के सकारात्मक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव
पर्यटन के सकारात्मक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव भी हैं, विशेष रूप से गंतव्य स्थानों पर। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
(1) पर्यटन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मूलों के कई सांस्कृतिक समूहों के लोगों के साथ परिचित होने के लिए एक उपयुक्त अवसर प्रदान करता है।
(2) पर्यटन में शिक्षा का एक घटक भी शामिल होता है। शिक्षा के माध्यम से पर्यटन एक साथ दो या अधिक सांस्कृतिक समूहों के लोगों के बीच समझ को संवर्धित करता है। यह मेजबानों और मेहमानों के बीच सांस्कृतिक विनिमय की पेशकश करता है।
(3) सांस्कृतिक विनिमय के कारण लोग एक-दूसरे के प्रति परस्पर सहानुभूति और समझ विकसित करते हैं और यह उनके पूर्वाग्रहों को कम करता है।
(4) अंततः सहानुभूति और समझ दो समुदायों / देशों के बीच तनाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। इस तरह शांति के साथ अच्छे संबंध प्रगाढ़ होने की संभावना बढ़ जाती है।
(5) पर्यटन सामुदायिक सुविधाओं और सेवाओं के विकास का समर्थन करता है। ये सुविधाएँ और सेवाएँ लोगों द्वारा भी उपयोग की जाती हैं, इस प्रकार बेहतर जीवन शैली का नेतृत्व करती हैं।
(6) पर्यटन प्राकृतिक, सांस्कृतिक, पुरातात्विक या ऐतिहासिक स्थलों के महत्व और मूल्य के बारे में जागरूकता उत्पन्न करता है। यह स्थानीय और राष्ट्रीय विरासत पर गर्व की भावना को बढ़ाता है। यह उनके संरक्षण के लिए नेतृत्व करता है।
(7) पर्यटक अपने साथ यादगार के रूप में ले जाने के लिए एक विशेष क्षेत्र / राष्ट्र की कई कलाओं और शिल्पों को खरीदने में रुचि रखते हैं। निवासियों के लिए मौद्रिक लाभ इन कलाओं और शिल्पों को हमेशा के लिए जीवित रखने के विचार को भी बढ़ावा देता है।
(8) वर्ष के कुछ भागों में आयोजित पर्व, पर्यटकों द्वारा बड़े उत्साह के साथ देखे जाते हैं। स्थानीय युवाओं के सुशिक्षित होने ओर व्यापक दृष्टिकोण और समझ रखने के बावजूद ये लोगों को स्थानीय संस्कृति को जीवित रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
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