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बीए सेमेस्टर-4 गृह विज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2740
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-4 गृह विज्ञान - सरल प्रश्नोत्तर

स्मरण रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य

 

अधिगम मनोवैज्ञानिक एवं स्वभाविक प्रकार की प्रक्रिया है।

अधिगम का अर्थ है - सीखना।

गिलफोर्ड के अनुसार - “व्यवहार के कारण ही व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम है। "

क्रो एवं क्रो के अनुसार - "ज्ञान और अभिवृत्ति की प्राप्ति ही अधिगम है।"

सीखने की खेल विधि बाल्यावस्था के लिए उपयोगी है।

थार्नडाइक के अनुसार - "अधिगमकर्ता निष्क्रिय एवं तटस्थ होता है।"

प्रसार शिक्षण में सीखने की क्रिया में अभिप्रेरणा आवश्यक है। अधिगम के 'सामान्यीकरण सिद्धान्तवाद' के प्रतिपादक जड़ हैं।

अधिगम हेतु 'प्रभाव के नियम' का प्रतिपादन थार्नडाइक ने किया था।

मनु के अनुसार - "सीखना व्यवहार का अपेक्षाकृत स्थायी प्रगतिपूर्ण रूपान्तरण है।”

“अभिप्रेरणा सीखने का राजमार्ग है।" यह कथन स्किनर का है।

सीखने में पठार का मुख्य कारण उत्साहावरोध है।

समान तत्वों के सिद्धान्त के प्रवर्तक थार्नडाइक थे।

सीखना व्यक्तिगत, सामाजिक एवं व्यावहारिक गतिविधि है।

आधुनिक विचारधारा के अनुसार सीखने की सर्वश्रेष्ठ विधि मिश्रित विधि है।

अधिगम की प्रक्रिया का मूल स्वरूप एकांगी है।

तर्क और चिन्तन ही दोनों ही एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

सीखने के वक्र चार प्रकार के होते हैं।

प्राणी के समस्त व्यवहार के पीछे निहित कारक को अभिप्रेरणा कहते हैं।

अभिप्रेरणा अधिगम का सहायक अंग है।

अभिरुचि अर्जित अभिप्रेरक है।

प्रत्येक व्यक्ति में सीखने की क्षमता अलग-अलग होती है।

एच. जी. वेल्स का कथन है- “शिक्षक वास्तविक इतिहास का निर्माता है।"

प्रेरकों को दो भागों में बाँटा गया है।

जेम्स ने कहा है- "स्मृति सीखी हुई वस्तु का सीधा उपयोग है।"

सीखने का मुख्य नियम के प्रतिपादक कोहलर थे।

अभिप्रेरक एक आन्तरिक शक्ति है।

थॉमसन का कथन है- “अभिप्रेरणा आरम्भ से लेकर अन्त तक मानव व्यवहार के स्रोत के प्रत्येक कारक को शामिल करता है।"

प्रेरणा का अनुमान व्यवहार से होता है।

वुडवर्थ के शब्दों में - “सीखना विकास की प्रक्रिया है ।"

गुड का कथन है- "प्रेरणा कार्य को आरम्भ करने, जारी रखने और नियमित करने की प्रक्रिया है।"

सामाजिक प्रेरक आत्मगौरव है।

प्रशंसा एवं निन्दा दो ऐसी प्रेरणाएं हैं जो बालक में अनुशासन की वृद्धि करती है।

हल का कथन है- "सीखना आवश्यकता की पूर्ति की प्रक्रिया द्वारा होता है।"

जब सीखने की प्रक्रिया में कोई उन्नति नहीं होती है तो उसे सीखने का पठार कहते हैं।

सर्वप्रथम सीखने वाले को उद्देश्य का ज्ञान होना चाहिए।

प्रसार शिक्षक नवीन वैधानिक पद्धतियों का विकास करके ग्रामीणों को नवीन कार्य प्रणालियों की जानकारी देता है।

प्रसार कार्यकर्ता ही शिक्षक और प्रशिक्षक होता है।

सीखने के पठार, सीखने में स्थिरता प्रदर्शित करते हैं।

सिम्पसन, जोन्स तथा ब्लेअर का कथन है - “अभिप्रेरणा एक प्रक्रिया है, जिसमें अधिगमकर्ता की आन्तरिक शक्तियों अथवा आवश्यकताएँ उसके परिवेश में भिन्न-भिन्न उद्देश्यों की ओर निर्देशित करती हैं।"

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