बी ए - एम ए >> बीए सेमेस्टर-4 गृह विज्ञान बीए सेमेस्टर-4 गृह विज्ञानसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
5 पाठक हैं |
बीए सेमेस्टर-4 गृह विज्ञान - सरल प्रश्नोत्तर
स्मरण रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य
अलेक्जेंडर के अनुसार - “प्रकाश वातावरण का ऐसा तत्व है जो प्रत्येक मानव को प्रभावित करता है"।
पीट, पिकेट तथा अर्नोल्ड के अनुसार - "प्रकाश ऊर्जा का वह स्वरूप है जो दृष्टि को संभव बनाता है।
साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी की एन्साइक्लोपीडिया के अनुसार - “प्रकाश' शब्द प्रायः संचरित विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा के लिए प्रयुक्त किया जाता है, जो कि दृष्टि से संबंधित है। विस्तृत रूप में प्रकाश के अन्तर्गत विकिरण की पूरी सीमा को सम्मिलित किया जाता है जो कि विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम कहलाता है।"
वास्तव में प्रकाश एक प्रकार की विकिरण ऊर्जा है जिससे हमारे लिये देखना संभव हो पाता हैं।
प्रकाश एक तरह की ऊर्जा है जो हमें दृष्टि देती है और तब हम किसी वस्तु अथवा दृश्य को देख पाते हैं।
देखने की क्रिया को अनेक तत्व प्रभावित करते हैं, यथा-
1 प्रकाश की मात्रा
2. प्रकाश की तीव्रता
3. विरोधी प्रभाव
4. आकार
5. समय
6. दूरी
7. चकाचौंध
8. रंग
9. पूरे कमरे में एक समान प्रकाश की मात्रा।
प्रकाश में जहाँ व्यक्ति बहुत अधिक कार्य करता है, वहाँ निम्न लक्षण नहीं होने चाहिए अन्यथा यह हमारी दृष्टि को नुकसान पहुँचायेगा-
1. चमकदार खिड़की।
2. गहरे फर्श के पास चमकदार सफेद दीवार।
3. चमकदार पैड के ऊपर काला टाइपराइटर।
4. अत्यधिक पॉलिस किये हुए मशीन के पार्ट्स।
5. सफेद दीवार पर काली रंग की पैनेल, तथा
6. परावर्तित करने वाला टेबल टॉप।
प्रकाश की आवश्यकता घरों में अनेक कारणों से होती है, जिनमें मुख्य हैं-
1. कार्य या कुछ विशिष्ट प्रकार के कार्यों को करने के लिए।
2. सुरक्षा की दृष्टि से तथा
3. सुन्दरता की दृष्टि से ।
4. कार्य सम्पादन हेतु प्रकाश संयोजन आरामदायक होना चाहिए।
5. दृष्टि प्रदान करने हेतु अथवा किसी वस्तु को देखने हेतु सक्षम बनाने के लिए।
6. नीरसता को दूर करने के लिए तथा
7. बल उत्पन्न करने के लिए।
प्रकाश तीन विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा उत्पादित किया जा सकता है-
1. जलने के द्वारा
2. तापदीप्तं द्वारा।
तापदीप्त प्रकाश के दो स्रोत हैं-
(क) प्राकृतिक प्रकाश अथवा सूर्य का प्रकाश
(ख) तापदीप्त विद्युत प्रकाश।
आन्तरिक स्थानों में उपयोग हेतु केवल दो प्रकार के प्रकाश हैं-
1. फ्लोर सेन्ट प्रकाश जो कि ट्यूबलाइट के माध्यम से प्राप्त होती है जिसमें मरक्यूरी की वाष्प भरी होती है।
2. नियोन प्रकाश को तकनीकी रूप में कोल्ड कैथोड के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार के प्रकाश का सबसे अच्छा उपयोग साइनबोहों को बनाने में किया जाता है।
यह किसी भी स्वरूप में आकार ले सकता है, इसकी लाइफ भी लम्बी होती हैं और इसका रख- रखाव भी आसान होता है।
नियोन प्रकाश का प्रयोग कमरे में अतिरिक्त चमक और उत्तेजना प्रदान करने हेतु भी किया जाता है।
स्रोत भी हैं जो निम्न उपरोक्त के अतिरिक्त कुछ आधुनिक प्रकाश के स्रोत भी हैं जो निम्न हैं-
1. नारंगीपन लिये हुए बल (Orange Bulb)
2. सोडियम तथा पारद लैम्प (Sodium and Vapour Lamp )
3. उच्च दाब मरक्यूरी लैम्प (High Pressure Mercury Lamp)
4. निम्न दाब मरक्यूरी लैम्प (Low Pressure Mercury Lamp )
प्रकाश के अनेक प्रकार भी होते हैं। वास्तव में आधारभूत प्रकाश पाँच प्रकार का होता है-
1. प्रत्यक्ष प्रकाश (Direct Lighting)
2. अप्रत्यक्ष प्रकाश (Indirect Lighting)
3. प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रकाश
4. आंशिक प्रकाश (Semi direct)
5. आंशिक अप्रत्यक्ष (Semi indirect)
जिस प्रकार वातानुकूलन हमारे घर को किसी विशेष मौसम में आराम प्रदान करती है उसी प्रकार लाइट कण्डीशनिंग हमारे घर में दृष्टिगत संतुष्टि प्रदान करती है। घरों में प्रकाश व्यवस्था को दो भागों में बाँटा जा सकता है-
1. दिन की प्रकाश व्यवस्था तथा
2. कृत्रिम प्रकाश तकनीकी व्यवस्था
दिन में जो प्रकाश हमें प्राप्त होता है वह सूर्य की दृष्टिगत विकिरण ऊर्जा होती है। यह प्रकाश या ऊर्जा रंग और तीव्रता में ही नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक प्रभाव में भी भिन्न होती है।
दिन के प्रकाश के उपयोग से शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है।
दिन के प्रकाश की व्यवस्था हेतु सामान्यतः सूर्य के प्रकाश का उपयोग किया जाता है।
कृत्रिक प्रकाश व्यवस्था को घरों में तीन प्रकार से किया जा सकता है-
1. सामान्य प्रकाश व्यवस्था
2. स्थानीय कार्य हेतु प्रकाश व्यवस्था, तथा
3. दबावपूर्ण प्रकाश व्यवस्था ।
प्रकाश का सबसे प्रचलित उपयोग में लाया जाने वाला स्रोत पोर्टेबल लैम्प और स्थापक हैं जिन्हें दीवारों या छतों पर लगाया जाता है।
घर के विभिन्न कमरों के लिए प्रकाश व्यवस्था भिन्न-भिन्न प्रकार से होती है।
|