बी ए - एम ए >> बीए बीएससी बीकाम सेमेस्टर-2 प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य बीए बीएससी बीकाम सेमेस्टर-2 प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीए बीएससी बीकाम सेमेस्टर-2 प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य - सरल प्रश्नोत्तर
महत्वपूर्ण तथ्य
त्वचा मानव का सबसे बड़ा तथा भारी अंग है जिसका फैलाव लगभग 20 वर्गफुट का होता है। त्वचा का सबसे स्पष्ट कार्य हमारे शरीर के आन्तरिक भागों को खुलने से बचाना और पर्यावरण के दुष्प्रभावों से इसकी रक्षा करना है।
त्वचा मुख्यतः तीन परतों से मिलकर बनी होती है-
(1) एपिडर्मिस
(2) डर्मिस तथा
(3) हाइपोडर्मिस
एपिडर्मिस त्वचा की सबसे बाहरी परत है जिसका मुख्य कार्य त्वचा की नई कोशिकाओं का निमार्ण करना, उसको टोन देना तथा शरीर के आन्तरिक अंगों को बाह्य वातावरण के दुष्प्रभावों से बचाना है।
त्वचा की दूसरी परत डर्मिस कहलाती है जो संयोजी ऊतकों से बनी होती है और शरीर को तनाव से बचाने के साथ-साथ, यह त्वचा को मजबूती और लोच प्रदान करती है। डर्मिस बाल उगाने तथा पसीने और तेल उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी है।
बेसमेंट मेम्ब्रेन एपिडर्मिस को डर्मिस से अलग करती है।
डर्मिस परत में कई प्रकार के रिसेप्टर्स पाये जाते हैं जो दबाव, दर्द और गर्मी का पता लगाते हैं। डर्मिस दो भागों में विभाजित होती है -
(1) पैपिलरी क्षेत्र (2) जालीदार क्षेत्र
हाइपोडर्मिस त्वचा को हड्डियों तथा माँसपेशियों से जोड़ने में मदद करती है।
रोगाणुओं से बचाव, वसा तथा पानी का भण्डारण करना तथा तापमान, दबाव, कम्पन, स्पर्श और चोट की जानकारी देना त्वचा का मुख्य कार्य है।
त्वचा को रंग देने का कार्य मेलेनिन करता है।
जिन लोगों में फोमेलैनिन अधिक होता है उनकी त्वचा का रंग पीला और जिनमें यूमेलालिन अधिक होता है उनकी त्वचा का रंग गहरा होता है।
एटोपिक डर्माटाइटिस या एक्जीमा, मुंहासे, मैलोनेमा, रोसेशिया, सोरायसिस, स्कैवी दाद-खाज तथा लाइकेन प्लेनस त्वचा के मुख्य रोग हैं।
त्वचा के जल जाने को अंग्रेजी में बर्न (Burn) कहा जाता है।
जलना मामूली चिकित्सीय समस्या से लेकर जानलेवा समस्या भी हो सकती है।
जब हमारी त्वचा किसी ठंडी चीज के सम्पर्क में सीधे और लम्बे समय के लिए आती है तो स्किन डैमेज हो जाती है। इसी को कोल्ड बर्न (Cold Burn) कहा जाता है।
एसिड बर्न को केमिकल बर्न या कास्टिक बर्न भी कहा जाता है।
सल्फ्यूरिक एसिड शरीर के आन्तरिक अंगों को भी जला देता है।
जलना मुख्यतः तीन प्रकार का होता है-
(1) फर्स्ट डिग्री बर्न
(2) सेकेण्ड डिग्री बर्न
(3) थर्ड डिग्री बने
इनमें से फर्स्ट डिग्री बर्न सबसे मामूली प्रकार का तथा थर्ड डिग्री बर्न सबसे घातक प्रकार का बर्न होता है।
सनबर्न एक प्रकार का रेडियेशन बर्न है। लम्बे समय तक एक्स-रे तथा रैडियेशन थिरेपी के अन्दर रहने पर भी रेडियेशन बर्न हो जाता है।
जलने के इलाज के रूप में वीटाडीन साल्युशन या पाउडर का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा दशांग लेप, चन्दनादि तेल तथा श्री श्री तत्वा तेलम का भी प्रयोग किया जा सकता है।
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