बी ए - एम ए >> बीए सेमेस्टर-2 शारीरिक शिक्षा - खेल संगठन एवं प्रबन्धन बीए सेमेस्टर-2 शारीरिक शिक्षा - खेल संगठन एवं प्रबन्धनसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीए सेमेस्टर-2 शारीरिक शिक्षा - खेल संगठन एवं प्रबन्धन - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- बजट तैयार करने की प्रक्रिया एवं बजट निर्माण में विभागीय कर्मियों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर -
बजट तैयार करने की प्रक्रिया
बजट की निर्माण की प्रक्रिया को निम्न चरणों से गुजरना होता है-
(1) प्रशासकीयता
(2) पारस्परिक सहयोग
(3) मूल्यांकन
(4) योजना
(5) सर्वसहमति
(6) संयोजन
खेल-विज्ञान के बजट का निर्माण करते समय निम्न बिन्दुओं को ध्यान में रखा जाता है-
(1) वास्तविक बजट का निर्माण संगठन के मुखिया द्वारा विभागीय कर्मियों की देख-रेख में किया जाता है। इसमें कुल प्राप्त धनराशि कुल व्यय तथा अन्य वित्त सम्बन्धी जानकारी का समावेश किया जाता है।
(2) विद्यालय या कॉलेजों के लिए बजट का निर्धारण प्रधानाचार्य, डीन, शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन या संगठन का प्रतिनिधित्व बजट के प्रति उत्तरदाई होता हैं।
(3) बजट पर अंतिम निर्णय होने पर, इसमें वित्त - प्रबन्धन के लिए कुछ दिशा-निर्देशों का वर्णन किया जाता है।.
बजट के निर्माण में दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखा जाता है। इस दृष्टि से यह मान लेना कि यह एक, दो या तीन में ही तैयार हो जाता है, यह बहुत बड़ी भूल है। बजट का निर्माण पेशेवर व्यक्तियों द्वारा आपसी विचार-विमर्श के उपरान्त समस्त तथ्यों को ध्यान में रखकर किया जाता है। खेल-विज्ञान निदेशक, विभागीय कर्मियों, प्रधानाचार्य, डीन तथा सभी उत्तरदाई प्रशासनिक अधिकारियों से गहन विचार-विमर्श पश्चात् ही बजट का निर्धारण किया जाता है।
अच्छे बजट के लिए निर्धारित मापदण्ड- खेल विज्ञान में अच्छे बजट के लिए निर्धारित मापदण्ड निम्नलिखित हैं-
1. बजट का निर्धारण किसी वित्त वर्ष के प्रारम्भ में ही कर लिया जाए।
2. बजट में आय और व्यय के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया जाए।
3. संगठन के मुखिया से बजट के विषय में सलाह ली जाए।
4. बजट का निर्धारण सभी विद्यार्थियों, अध्यापकों की सुविधाओं, विभागीय कर्मियों एवं प्रशासन की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाए।
5. बजट को लचकदार बनाया जाए ताकि किसी भी प्रकार की आपातकालीन परिस्थितियों में इसमें रद्दोबदल की जा सके।
6. संगठन के मुखिया से बजट के विषय में सलाह ली जाए।
बजट निर्माण में विभागीय कर्मियों की भूमिका- बजट निर्माण-प्रक्रिया में विभागीय कर्मियों की उपस्थिति अहम होती है। विभागीय कर्मी रिकार्ड सम्भाल कर रखते हैं जिसका वर्णन निम्न प्रकार से किया जा रहा है-
(1) अध्यापक, प्रशिक्षक तथा खेल निदेशक को सभी खेलों पर होने वाले तमाम खर्चों का रिकार्ड रखना होता है।
(2) प्रतिवर्ष विद्यालय का कॉलेज द्वारा उपलब्ध कराए गए वित्त का समुचित रिकार्ड विभागीय कर्मियों को ही रखना होता है।
(3) बजट में आपातकाल परिस्थितियों से निपटने के लिए भी कुछ राशि सम्भाल कर रखी जानी चाहिए।
(4) अध्यापक तथा प्रशिक्षकों को उपकरणों की खरीद-फरोख्त सम्बन्धी सभी रिकार्ड अपने पास सम्भाल कर रखने चाहिए, जिससे उन्हें आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय या कॉलेज प्राधिकरण के पास जमा करा सकें।
विद्यालय या कॉलेज में स्थित समस्त विभागों से प्राप्त जानकारियों को एकत्र करके वित्त विभाग को निम्न बिन्दुओं को ध्यान में रखकर कुछ होम वर्क कर लेना चाहिए।
(i) उपकरणों एवं सामग्री का वर्तमान मूल्य।
(ii) कार्यक्रम में यात्रा, भोजन, बीमा तथा चिकित्सा सेवा पर खर्च होने वाला व्यय।
(iii) अध्यापक की सहजता एवं अन्य सामग्री पर व्यय होने वाला धन।
(iv) मीटिंग पर होने वाला खर्च।
(v) कार्यक्रम में कितने विद्यार्थी या अन्य व्यक्ति सम्मिलित थे।
खेल - विज्ञान के लिए बजट निर्माण प्रक्रिया के लिए खेल - विज्ञान से सम्बन्धित अधिकारी को बहुत से रिकार्ड तथा रिपोर्ट की आवश्यकता पड़ती है। उपकरणों की खरीद सम्बन्धी बिल तथा उन बिलों की पूर्व वित्त वर्ष में उसी उपकरणों के लिए दिए गए बिलों से तुलना इत्यादि कार्य करते हैं।
बजट को लचकदार बनाया जाना चाहिए जिससे प्रारम्भिक दौर में भी इसमें फेरबदल किया जा सके। बजट निर्माण में निम्न पाँच बिन्दुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए-
(1) इस वर्ष नया क्या किया जाए तथा पिछले वर्ष अधूरे कार्यों को पूर्ण करने की योजना बनाना।
(2) बीते वर्ष क्या किया गया था? जिससे बीते वर्ष की उपलब्धियों को ध्यान में रखकर आगामी वर्ष के लक्ष्य निर्धारित किये जा सकें।
(3) निर्धारित योजना को कैसे पूरा किया जाए, इस उद्देश्य का विचार, विभाग, उपकरण तथा अन्य आवश्यकताओं के विषय में खाका तैयार करना होता है।
(4) बीते वर्ष की क्या योजना थी? जिससे बजट में बीते वर्ष आने वाली समस्याओं का समाधान किया जा सके।
(5) इस वर्ष क्या आएगा? बीते वर्ष के कार्य से सबक लेते हुए नए वर्ष के लिए कार्ययोजना तैयार करना।
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