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बी ए - एम ए >> बीए सेमेस्टर-2 चित्रकला - कला के मूल तत्व बीए सेमेस्टर-2 चित्रकला - कला के मूल तत्वसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीए सेमेस्टर-2 चित्रकला - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- अन्तराल विभाजन का स्वर्णिम सिद्धान्त क्या है? चित्र सहित समझाइये?
अथवा
स्वर्णिम सिद्धान्त क्या है? चित्र सहित समझाइये?
अथवा
स्वर्णिम सिद्धान्त क्या है? चित्रभूमि विभाजन में इसके महत्व को समझाइये।
उत्तर -
(Principle of Golden Section)
अथवा
सक्रिय एवं सहायक अन्तराल का आनुपातिक विभाजन
यह अन्तराल विभाजन चित्रकार की शैली पर निर्भर करता है। किसी भी चित्र में सक्रिय अन्तराल का क्षेत्रफल कितना हो, यह पहले से निश्चित नहीं किया जा सकता है। चित्रकार अपनी सूझ-बूझ, चिन्तन व विचार के पश्चात् आकृतियों व पृष्ठभूमि में सन्तुलित अनुपात स्थापित करता है। विषय, भाव तथा कलाकार की विचारधारा के आधार पर ही सक्रिय आधार का निर्धारण किया जाता है। अन्तराल विभाजन में सबसे श्रेष्ठ विभाजन वही माना जाता है जहाँ एकता व रोचकता दोनों ही तत्व समन्वित होते है। इस दृष्टि से स्वर्णिम विभाजन सिद्धान्त की पद्धति श्रेष्ठ कही जा सकती है। सक्रिय व सहायक अन्तराल के आनुपातिक सम्बन्ध को प्राचीन यूनानी कलाकारों स्वर्णिम विभाजन के सिद्धान्त का सूत्र दिया है। स्वर्णिम विभाजन सिद्धान्त कला रचना में उस गणितीय सम्बन्ध (Mathematical Relationship) को कहा जाता है। इसके आधार पर अन्तराल विभाजन इस प्रकार होता है कि यदि सम्पूर्ण धरातल को तीन भागों में बाँटा जाये तो आकृतियों का अन्तराल दो भागों में आना चाहिए।.

यदि आकृतियाँ तीन भागों में है, तो सहायक अन्तराल पाँच भागों में आना चाहिये। इस प्रकार यदि आकृतियाँ आठ भाग में है, तो अन्तराल 13 भाग में होना चाहिये।
सूत्र - 2 : 3 : 5 : 8 : 13
इस प्रकार से स्वर्णिम विभाजन सिद्धान्त को कितने ही भागों में बाँटा जा सकता है।
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