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बी एड - एम एड >> बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाजसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज
प्रश्न- राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण का तर्काधार क्या है?
उत्तर-
जहाँ तक कि तर्क के आधार का संबंध है, आरक्षण औपचारिक के विपरीत वास्तविक समानता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। ये सकारात्मक कार्रवाइयाँ/उपायों की एक श्रृंखला का हिस्सा हैं जिनका मन्तव्य कुछ सदियों से भोगे जा रहे हाशिएबद्धी पूर्वाग्रह जिससे कि उनका वर्तमान पिछड़ापन देखने में आता है, हेतु प्रतिपूर्ति करता है। सामाजिक न्याय, इसलिए, आरक्षणों का मुख्य विषय है।
अधिक स्पष्ट रूप से, चुनावी आरक्षणों से अपेक्षा की जाती है कि पिछड़े रूप से पहचाने गए समूहो का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें। निश्चित रूप से, अनेक लोकतांत्रिक क्षेत्रों की विशेषता, अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के लोगों की उच्च प्रतिनिधित्व हो, जो किसी भी सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की वैधता को प्रभावित कर सकते हैं। वास्तविक रूप से इन सामाजिक वर्गों से आने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या कम-से-कम इस रूप में होगी कि राज्य में उनके जनसांख्यिकीय दबाव के अनुपात में हो होगी। महिला- वर्ग की प्रकृति स्पष्ट: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के अनुपात से स्वाभाविक रूप से भिन्न है। महिलाएं जनसंख्या के आधे भाग का निर्माण करती हैं, पुरुषों से पृथक नहीं रहती हैं, और सभी संभव सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक मानदंडों के अनुसार विभाजित हैं।
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