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बी एड - एम एड >> बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाजसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज
प्रश्न- भारतीय सरकार ने आरक्षण की नीति सर्वप्रथम कब अपनाई?
उत्तर-
स्वतंत्र भारत की सरकार ने आरक्षण की नीति सर्वप्रथम 1950 में अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए अपनाई। यह आरक्षण सरकारी नौकरियों, उच्च शिक्षा संस्थानों तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित थी। बाद में, अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए भी आरक्षण की मांग बढ़ी, जिससे यह मुद्दा सर्वसम्मति का विषय बन गया। तीसरी श्रेणी यानी अन्य पिछड़े वर्गों के लिए इसके विस्तार ने बार-बार उठती बहस और बार-बार उठते विवादों को जन्म दिया। "नब्बे के दशक" में 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को प्रभावी बनाने के लिए खासतौर पर स्थानीय निकायों में आरक्षण सुनिश्चित किया गया। आज भी आरक्षण का मुद्दा लगातार बहस और विवाद का कारण बना हुआ है। विशेष रूप से "मुक्त-पिछड़े" वर्ग और उच्च जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान का सवाल, राष्ट्रीय के साथ-साथ राज्यीय स्तरों पर भी आए दिन उठाया जाता रहा है, ताकि उन्हें आरक्षण का लाभार्थी बनाया जा सके।
जहां तक कि आरक्षण के परिणामों का संबंध है, बहस अधिकाधिक: उच्च शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों के क्षेत्रों तक सीमित रहती थी। इस बहस ने एक नई दिशा तब ली जब महिलाओं के लिए राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने हेतु प्रस्ताव पारित किया गया। महिला आरक्षण विधेयक ने आम जनता के बीच एक नए विवाद को जन्म दिया। यह विवाद तब और बढ़ा जब चुनावी आरक्षण के माध्यम से यह मुद्दा राजनीतिक प्रतिनिधित्व की प्राथमिकता एवं परिणामों पर असर डालने लगा और व्यापक समाज भी इससे प्रभावित हुआ।
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