लोगों की राय

बी एड - एम एड >> बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :215
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 2702
आईएसबीएन :0

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

प्रश्न- समाज में महिलाओं के लिए किस प्रकार का विरोधाभासी वातावरण अपनी जड़ें जमाए हुए है?

उत्तर-

जहाँ एक पत्नी के रूप में महिलाओं की भूमिका के लिए सख्त निर्देश हैं और उन्हें माता के रूप में अपेक्षाकृत अधिक आँका जाता है, जिससे सामान्यतः भारतीय समाज में महिलाओं के उत्पीड़न और शोषण के कारण के रूप में देखा जाता है। इसी समय समकालीन समाज में पेशों, राजनीति और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व विश्व में अनेक महिलाओं को उपलब्ध सांस्कृतिक स्थान से कहीं अधिक उपलब्ध स्थान में और इंगित करता है। यदि हम भारतीय समाज में महिलाओं की विरोधाभासी पहचान को जांच करें, उदाहरण के लिए हिन्दू महिला की तो यह स्पष्ट है कि धार्मिक ग्रंथों में (लिंग जेंडर) विषयक भूमिकाओं की रुकीबद्ध रचना के लिए एक अभिकर्ता भारतीय महिलाओं की इस विरोधाभास पहचान का आभार है।

महिलाएं चाहे वे देवी हो या मानव को जननी और कृपालु तथा साथ ही उन्हें उतना ही आक्रामक एवं कठोर हृदय माना जाता है। शरण देने वाला या विनाश का द्वैत चरित्र इसे स्पष्ट ही विभाजित करने की शक्ति प्रदान करता है। एक ही व्यक्ति के इन दो विरोधाभासी पहचानों के लिए जो सांस्कृतिक तर्क दिया गया है इस तथ्य से उत्पन्न है कि स्त्री शक्ति (ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करने वाली मूल स्रोत) और प्रकृति (ब्रह्मांड का अभिव्यक्त तत्व) दोनों है।

जहाँ स्त्री प्रकृति और पुरुषों को संस्कृति के रूप में विरोधी ऊर्जा के दृष्टि से पहचाना जाती है, पहचान के द्वारा महिलाओं को पुरुषों की तुलना में गौण समझा जाता है। इस प्रकृति-संस्कृति द्वैत के द्वारा महिलाओं को चंचल, अनियंत्रित शक्ति के रूप में जाना जाता है और पुरुषों को विवेकशील तथा आकार का प्राणी समझा जाता है। इस प्रकार यद्यपि स्त्री मूल तत्व शक्ति और सत्ता धारण करती है, वैचारिक दृष्टि से यह माना जाता है कि सिर्फ पुरुष मूल तत्व को उत्तम परिणयों के प्रयोग के साथ स्त्री शक्ति और सत्ता को निर्देशित करने की क्षमता प्रदान है। संस्कृति प्रकृति पर नियंत्रण करती है और स्त्रियों प्रेरणा लेकर पुरुष महिलाओं को अधिक नियंत्रण करना चाहते हैं और अन्यथा उपरोक्त अव्यवस्थित स्त्री छवि पर नियंत्रण के लिए पितृसत्तात्मक संस्कृति की सामर्थ्य को न्यायसंगत ठहराता है और यह नारी को शक्ति की इस सांस्कृतिक मान्यता के अंदर ही कि कुछ महिलाओं ने अपने बंधन से निकलने का रास्ता निकाल लिया है।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book