|
बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषण बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषणसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
5 पाठक हैं |
||||||
बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषण
प्रश्न- शासकीय पत्र तथा अर्द्ध-शासकीय पत्र में अन्तर बताइए।
उत्तर -
शासकीय पत्र तथा अर्द्ध-शासकीय पत्र में अन्तर
(Difference between official Letter and Semi-official Letter)
(Difference between official Letter and Semi-official Letter)
| क्र.सं. (Sl.No.) |
शासकीय पत्र (Official Letter) |
अर्द्ध-शासकीय पत्र (Demi-official Letter) |
| 1. | सरकारी पत्र साधारण प्रकृति के होते हैं तथा इन्हें कोई भी ऐसा व्यक्ति खोल सकता है जिसे इसके लिए प्रति नियुक्त किया गया हो। | ये पत्र एक अधिकारी को उसके नाम से सम्बोधित होते हैं तथा वे प्रेषिती द्वारा स्वतःखोले जाते हैं। |
| 2. |
शासकीय पत्र को लिखने की शैली एवं भाषा दोनों परम्परागत होती है। | अर्द्ध-शासकीय पत्र की आलेखन शैली व भाषा शासकीय पत्र से पूर्णता भिन्न होती है। |
| 3. |
इन पत्रों की दशा में प्रमुख लाइन के नीचे पत्रांक लिखा जाता है। | अर्द्ध-शासकीय पत्र में पत्रॉक को बाईं ओर लिखा जाता है। |
| 4. |
शासकीय पत्र पूर्णतया सरकारी एवं औपचारिक होते हैं। सामान्य रूप से ये नीति अथवा सूचना विषय से सम्बन्धित होते हैं। | अर्द्ध-सरकारी पत्र व्यक्तिगत शासकीय पत्र होते हैं तथा वे किसी विशेष विषय-वस्तु के बारे में होते हैं। |
| 5. |
सामान्य रूप से ये पत्र अनुच्छेदों में बँटे होते हैं। | सामान्यतया ये पत्र केवल एक अनुच्छेद वाले होते हैं। |
| 6. |
सामान्य रूप से शासकीय पत्र गुप्त नहीं होते। | सामान्यतया अर्द्ध शासकीय पत्र गुप्त रखे जाते हैं। |
| 7. |
ये पत्र नैत्यिक प्रकृति के होते हैं मित्रवत रूप में नहीं लिखे जाते। | ये पत्र मित्रवत् होते हैं। इन्हें व्यक्तिगत पत्र की भाँति लिखा जाता है। |
| 8. |
शासकीय पत्रों में प्रशंसात्मक बाते नहीं होती। | र्अद्ध शासकीय पत्र प्रायः सस्नेह समाप्त होते हैं। |
| 9. |
शासकीय पत्र के अन्त में पत्र लेखक हस्ताक्षर एवं पदनाम का उल्लेख होता है। | अर्द्ध-सरकारी पत्र के अन्त में लेखक के पदनाम का उल्लेख नहीं होता। |
| 10. |
एक ही लिफाफे में कई शासकीय पत्र रखकर भेजे जाते हैं। | सामान्य रूप से अर्द्ध-शासकीय पत्र को पृथक लिफाफे में बन्द किया जाता है। |
|
|||||
अन्य पुस्तकें
लोगों की राय
No reviews for this book










