लोगों की राय

बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषण

बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषण

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2669
आईएसबीएन :0

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषण

प्रश्न- मौखिक प्रस्तुतीकरण को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं? स्पष्टतया समझाइये।

उत्तर -

मौखिक प्रस्तुतीकरण को प्रभावित करने वाले कारक
(Factors Affecting Oral Presentation)

मौखिक प्रस्तुतीकरण को प्रभावित करने वाले कारकों को निम्नलिखित रूप में समझाया जा रहा है -

1. शारीरिक भाषा (Body Language) - श्रोताओं की अपनी सोच वैसी होती है जैसा कि वे देखते हैं। बहुधा उनके द्वारा प्रस्तुतीकरण को शारीरिक भाषा के आधार पर स्वीकार किया जाता है। इस, प्रकार मौखिक प्रस्तुतीकरण में शारीरिक भाषा बहुत महत्वपूर्ण होती है। निम्नलिखित प्रकार की शारीरिक भाषा मौखिक प्रस्तुतीकरण में सहायक होती है -

(i) व्यक्तिगत बाह्याकृति (Personal Apperance) - श्रोताओं द्वारा अपना विचार अपने द्वारा देखे गये दृश्य के आधार पर बनाया जाता है। प्रस्तुतकर्ता को ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो उपयुक्त हो। उसे साफ-सुथरी एवं औपचारिक ड्रेस पहननी चाहिए। अनौपचारिक ड्रेस श्रोताओं के ध्यान को विचलित करती है।

(ii) प्रस्तुतकर्ता की मुद्रा (Posture of the Presenter) - श्रोतागण प्रस्तुतकर्ता को देखते हैं तथा प्रस्तुतकर्ता अपनी मुद्रा को समझ सकता है। प्रस्तुतकर्ता को बोलते समय श्रोताओं पर ध्यान देना चाहिए। उनके चेहरे की अभिव्यक्ति को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

(iii) चेहरे की अभिव्यक्ति (Facial Expression ) - प्रस्तुतकर्ता को बोलते समय अपने श्रोताओं के चेहरे की अभिव्यक्ति पर ध्यान देना चाहिए। नेत्र सम्पर्क को प्रस्तुतीकरण का अत्यन्त शक्तिशाली स्रोत माना जाता है क्योंकि इसी से श्रोताओं द्वारा प्रस्तुतकर्ता की गम्भीरता का अनुमान किया जाता है।

(iv) चहलकदमी (Walking) - यदि प्रस्तुतकर्ता का चलना-फिरना, आत्म-विश्वास से परिपूर्ण हो, तो श्रोताओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव होगा। प्रस्तुतीकरण के दौरान चलना-फिरना स्थिति के अनुसार होना चाहिए।

2. आवाज (Voice) - प्रस्तुतकर्ता को निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए -

(i) मात्रा (Volume ) - आवाज की मात्रा या तीव्रता श्रोताओं के ध्यान को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
(ii) स्वर (Tone) - किसी बिन्दु विशेष पर जोर देते समय स्वर ऊँचा रखना चाहिए।
(iii) स्वरमान (Pitch)- कम एवं अधिक स्वरमान से बिन्दु के परिवर्तन का संकेत मिलता है।
(iv) गति (Speed) - यदि प्रस्तुतकर्ता श्रोताओं की रूचि को बनाए रखना चाहता है, तो उसे अपनी गति को बढ़ाते एवं घटाते रहना चाहिए।

3. वातावरण ( Environment) - प्रस्तुतीकरण पर वातावरण जैसे प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, पार्श्व आदि का प्रभाव पड़ता है।

4. शब्दों का उपयोग (Use of Words) - शब्दों के चयन का अपना महत्व होता है। यह आवश्यक नहीं होता है कि अधिक अलंकारिक शब्दों का उपयोग किया जाये। प्रस्तुतीकरण में आसान शब्दों का उपयोग किया जाना चाहिए।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book