इतिहास >> ईजी नोट्स-2019 बी. ए. प्रथम वर्ष प्राचीन इतिहास प्रथम प्रश्नपत्र ईजी नोट्स-2019 बी. ए. प्रथम वर्ष प्राचीन इतिहास प्रथम प्रश्नपत्रईजी नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष प्राचीन इतिहास प्रथम प्रश्नपत्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-पुस्तक।
प्रश्न 2- कुषाणकालीन व्यापार-वाणिज्य की प्रगति को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
कुषाणों के समय व्यापार का विवरण दीजिए।
उत्तर - कुषाणकालीन व्यापार-वाणिज्य की प्रगति
कुषाण युग में आर्थिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है - भारत का मध्य
एशिया तथा पाश्चात्य विश्व के साथ घनिष्ठ व्यापारिक सम्बन्ध की स्थापना।
कुषाणों ने चीन से ईरान तथा पश्चिमी एशिया तक जाने वाले रेशम के मार्ग को
अपने नियंत्रण में रखा क्योंकि यह उनके साम्राज्य से होकर गुजरता था। यह
मार्ग उनकी आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत था क्योंकि इससे जाने वाले व्यापारी
बहुत अधिक कर देते थे। इस सिल्क व्यापार में भारतीय व्यापारियों ने बिचौलियों
के रूप में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया जिसके फलस्वरूप उत्तरी-पश्चिमी भारत एक
अत्यन्त समृद्ध व्यापारिक केन्द्र के रूप में विकसित हो गया। इस समय रोम
साम्राज्य का भी उदय हो रहा था। रोम तथा पार्थिया के बीच सम्बन्ध अच्छे नहीं
- थे। अतः चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्ध रखने के लिये रोमनों को कुषाण
साम्राज्य की मित्रता पर ही निर्भर रहना पड़ता था। भारत के व्यापारी चीन से
रेशम खरीदकर रोम को भेजते तथा उसके बराबर सोना प्राप्त करते थे।
प्लिनी के विवरण से ज्ञात होता है कि रोम प्रतिवर्ष भारत से विलासिता की
सामग्रियाँ माँगने में दस करोड़ सेस्टर्स (Sesosteres) व्यय करता था। इसके
बदले में भारत रोम से बड़ी मात्रा में स्वर्ण मुद्राएँ प्राप्त करता था।
पेरीप्लस के अनुसार भारत से मसाले, मोती, मलमल, हाथीदॉत की वस्तुएँ, औषधियाँ,
चन्दन, इत्र आदि बहुतायत में रोम पहुँचते थे जिसके बदले रोम का सोना भारत आता
था। प्रारम्भ में रोम के साथ व्यापार स्थल-मार्ग से ही होता था परन्तु
कालान्तर में कुषाणों ने बैक्ट्रिया, काबुल तथा कान्धार को विजित कर इस मार्ग
को पुनः चालू करवाया। भारत-रोम थलीय यातायात कुषाणों के इस क्षेत्र पर
अधिपत्य जमा लेने के कारण ही सम्भव हो सका। हिप्पोलस की खोज के बाद समुद्री
व्यापार भी होने लगा।
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