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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

प्रश्न- मानसिक विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।

उत्तर-

मानसिक विकास का उद्देश्य

यह भी शिक्षा का सार्वभौमिक एवं सार्वकालिक उद्देश्य हैं परन्तु इसे भी भिन्न-भिन्न लोग भिन्न-भिन्न अर्थों में लेते हैं। प्राचीन भारत में मानसिक विकास का अर्थ मनुष्य के ज्ञान में वृद्धि से लिया जाता था। हमारे देश में एक समय ऐसा भी आया जब ज्ञान के लिए ज्ञान का नारा बुलन्द हुआ। अन्य देश की भी यही कहानी है। इस युग में शक्ति मनोविज्ञान में विश्वास रखने वाले शिक्षाशास्त्री मानसिक विकास का अर्थ बच्चों की स्मृति, निरीक्षण, कल्पना व तर्क आदि शक्तियों के विकास से लेते हैं। कुछ विद्वान विवेक शक्ति के विकास को ही मानसिक विकास कहते हैं और कुछ उसकी सीमा में बौद्धिक विकास को भी रखते हैं। स्पष्ट ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर तर्क द्वारा सत्य-असत्य का निर्णय करने की शक्ति ही बुद्धि हैं। इससे मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए शिक्षा का नारा बुलन्द हुआ।
आज शिक्षा के क्षेत्र में मानसिक विकास से तात्पर्य बच्चों को विचारों के आदान-प्रदान हेतु भाषा ज्ञान कराने एवं वस्तुगत एवं अध्यात्म जगत को जानने हेतु विविध विषयों का ज्ञान कराने; मानसिक शक्तियों स्मृति निरीक्षण, कल्पना, तर्क, चिन्तन, मनन, सामान्यीकरण, निर्णय आदि का विकास करने, बुद्धि को तर्क आदि की सहायता से सत्य-असत्य में भेद करने में प्रशिक्षण करने, मनुष्य में विवेक शक्ति के विकास करने और बच्चों को मानसिक रोगों (भय, निराशा, हीनता आदि) से बचाने तथा मानसिक प्रेरकों (अभय, आशा. आत्मविश्वास आदि) को उनमें उत्पन्न करने से लिया जाता है और इस सबके लिए हम बच्चों को अभिव्यक्ति के स्वतन्त्र अवसर देते हैं - इसके द्वारा विचारों का आदान-प्रदान और भाषा का विकास, दोनों एक साथ विकसित होते है। विभिन्न विषयों का ज्ञान एवं विभिन्न क्रियाओं में प्रशिक्षण बच्चों के बौद्धिक विकास में सहायक होता है। आज बच्चों को स्वयं करके स्वयं सीखने के अवसर दिये जाते हैं। इससे बच्चों की मानसिक शक्तियों-स्मृति, निरीक्षण, कल्पना, तर्क आदि का विकास होता है। आज बच्चों के साथ प्रेम और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाता है। इससे वे भय से बचते हैं, अभय होते हैं निराशा से बचते हैं. आशावादी होते हैं और हीनता से बचते हैं, आत्मविश्वासी होते हैं।
शिक्षा के मानसिक विकास के उद्देश्य पर दो मत नहीं हो सकते। मनुष्य एक मनोशारीरिक प्राणी है। शिक्षा के द्वारा सर्वप्रथम उसका शारीरिक और मानसिक विकास ही होना चाहिए। बिना मानसिक विकास के हम न तो इस भौतिक जगत को समझ सकते हैं और न आध्यात्मिक जगत को। ज्ञान से ही भौतिक श्री प्राप्त होती है और ज्ञान से ही आध्यात्मिक श्री प्राप्त होती है। ज्ञान के अभाव में मनुष्य पशु से अधिक और कुछ नहीं बन सकता।
अतः केवल ज्ञान के लिए अथवा शोषण के लिए मानसिक शक्तियों के विकास की हम वकालत नहीं कर सकते। आज आवश्यकता एक अच्छे मनुष्य के निर्माण की है। उसके लिए बच्चों को भाषा एवं विभिन्न विषयों तथा क्रियाओं का ज्ञान कराना पहली आवश्यकता है। परन्तु जब तक उसका प्रयोग शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक, नैतिक एवं चारित्रिक तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए नहीं किया जाता, वह व्यर्थ ही है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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