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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

प्रश्न- शारीरिक विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।

उत्तर-

शारीरिक विकास का उद्देश्य

शारीरिक विकास शिक्षा का सार्वभौमिक एवं सार्वकालिक उद्देश्य है, यह बात दूसरी है कि भिन्न- भिन्न समाजों में भिन्न-भिन्न समय पर इसे भिन्न-भिन्न रूप में स्वीकार किया जा रहा है। उदाहरणार्थ, भौतिक्रवादी समाज शरीर को साध्य मानते हैं, उनका विश्वास है कि स्वस्थ शरीर मनुष्य का सबसे पहला सुख है। इसके विपरीत अध्यात्मवादी समाज शरीर को साधन मानते हैं, उनका विश्वास है कि स्वस्थ शरीर उच्च साधना एवं आत्मानुभूति का साधन है।
आज शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के शारीरिक विकास से तात्पर्य उनकी मांसपेशियों को सशस्त बनाने कर्मेन्द्रियों एवं ज्ञानेन्द्रियों के विकास एवं प्रशिक्षण और जन्मजात शक्तियों के विकास एवं उदात्तीकरण से लिया जाता है और इस सबके लिए उन्हें उत्तम स्वास्थ्य के नियम बताये जाते हैं, उनके लिए आसन, व्यायाम और खेल-कूद की व्यवस्था की जाती है, उन्हें इन्द्रियों के प्रयोग के अधिक से अधिक अवसर दिये जाते हैं, उन्हें रोगों से बचने के उपाय बताये जाते हैं और रोगग्रस्त होने पर उसके उचित उपचार के लिए जागरूक किया जाता है।
शिक्षा के शारीरिक के उद्देश्य की महत्ता पर दो मत नहीं हो सकते। शरीर सब धर्मों (कार्यो) का साधन है (शीर माध्यम खलु धर्म साधनम्)। चाहे भौतिक उपलब्धियों की बात सोचें और चाहे आध्यात्मिक उपलब्धियों की, सबकी प्राप्ति शरीर से ही की जाती है। इतना ही नहीं अपितु स्वस्थ मनुष्य प्रसन्न रहता है और उसमें कार्य करने का उत्साह रहता है। स्वस्थ मनुष्य के हाथों में ही देश सुरक्षित रह सकता है। मनोवैज्ञानिक खोजों के परिणाम यह बताते हैं कि स्वस्थ मस्तिष्क के लिए स्वस्थ शरीर आवश्यक होता है। अस्वस्थ मनुष्य प्रायः चिड़चिडे होते हैं, उनमें किसी प्रकार का उत्साह नहीं होता। शक्तिहीन होने पर वे अध्ययन, चिन्तन और मनन, कुछ भी नहीं कर पाते। अस्वस्थ मनुष्य रोटी भी नहीं कमा सकता। वह न तो अपना हित कर सकता है, न समाज का और न राष्ट्र तथा संसार का। उसका जीवन एक भार-स्वरूप होता है। अतः प्रारम्भ से ही हमें बच्चों के शारीरिक विकास पर ध्यान देना चाहिए। यह कार्य शिक्षा के द्वारा ही पूरा किया जा सकता है, अतः शिक्षा का एक उद्देश्य बच्चों का शारीरिक विकास होना चाहिए।
इन सब विवेचन से हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि शारीरिक विकास के उद्देश्य को हमें स्वीकार तो करना चाहिए, परन्तु न तो उसे शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य मानना चाहिए और न ही मुख्य उद्देश्य। हमें तो मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक एवं चारित्रिक, व्यावसायिक और आध्यात्मिक, सभी प्रकार के विकास पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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