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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- किण्डरगार्टन प्रणाली के गुण-दोषों की व्याख्या करते हुए मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर-
किण्डरगार्टन प्रणाली के गुण (Merits of Kindergarten Method)
किण्डरगार्टन प्रणाली के गुण निम्नलिखित हैं-
1. यह शिक्षा प्रणाली बालक का वैयक्तिक एवं सामाजिक विकास करती है।
2. इसमें खेल द्वारा बालकों को शिक्षा दी जाती है। अतः यह शिक्षण पद्वति छोटे बच्चों के लिए रुचिकर तथा आनन्ददायक है।
3. इस शिक्षण पद्धति में बालक के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर बल दिया जाता है।
4. यह पद्धति विभिन्न प्रकार के खेलों तथा व्यवसायों के द्वारा बालक की ज्ञानेन्द्रियों को प्रशिक्षित करती है।
5. इस शिक्षण पद्धति में बालक के व्यक्तित्व को प्रधानता दी जाती है। बालक की रुचियों का सदैव ध्यान रखा जाता है।
6. इसमें इन्द्रियों के प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाता है। इससे प्रत्यक्षीकरण तथा क्रियाशीलता बढ़ती है।
7. यह शिक्षण पद्धति बालकों को शिक्षा का प्रधान अंग मानने के कारण बाल- केन्द्रित है।
8. यह शिक्षण पद्धति बालक को स्वतन्त्र वातावरण में रखकर उसका स्वाभाविक विकास करती है।
9. इस शिक्षण पद्धति से बालकों में सौन्दर्यानुभूति का विकास होता है। विद्यालय के बगीचे में उन्हें कार्य करने, प्राकृतिक दृश्य देखने तथा प्रकृति निरीक्षण का अवसर मिलता है।
10. यह शिक्षण पद्धति शरीरिक श्रम तथा हस्तशिल्प को महत्व देती है।
11. यह शिक्षण पद्धति 'करके सीखने के सिद्धान्त पर जोर देकर बालक में क्रियाशीलता, आत्मशक्ति तथा आत्मविश्वास के वैयक्तिक गुणों का निर्माण करती है।
12. यह शिक्षण पद्धति मनोवैज्ञानिक है, क्योंकि यह बालकों की प्रवृत्तियों का दमन न करके गीत रचना तथा खेल द्वारा उनको व्यक्त करने का अवसर देती है।
13. यह शिक्षण विधि सामूहिक क्रियाओं पर बल देकर बालक में प्रेम, न्याय, सहयोग, सत्यता, उत्तरदायत्वि आदि के नैतिक और सामाजिक गुणों का विकास करती है।
14. यह पद्धति शिक्षण के दो प्रमुख सूत्रो का अनुसरण करती है - 'सामान्य से जटिल की ओर तथा 'स्थूल से सूक्ष्म की ओर'।
15. यह पद्धति शिक्षक तथा छात्र में घनिष्ठ और व्यक्तिगत सम्बन्ध स्थापित करती है। शिक्षक, मित्र और सहायक के रूप में छात्र का पथ-प्रदर्शन करता है।
16. इस शिक्षण पद्धति में अनुशासन स्थापित करने के लिए दण्ड नहीं दिया जाता है। सामूहिक रूप से कार्य करते हुए उसमें स्व-अनुशासन की भावना जाग्रत होती है।
17. इस पद्धति में प्रयोग किए जाने वाले 'करके सीखने', 'स्वयंक्रिया, 'खेल द्वारा शिक्षा तथा 'शारीरिक श्रम' को आधुनिक युग में शिक्षण के प्रमुख साधनों के रूप में स्वीकार किया जाता है।
18. यह पद्धति शिक्षा को जीवन का अंग तथा विद्यालय को लघु समाज मानने के कारण बालक का बाह्य जीवन से सम्बन्ध स्थापति करती है।
उपर्युक्त गुणों के आधार पर पार्कर महोदय ने इस पद्धति की प्रशंसा करते हुए कहा है - "यह उन्नीसवीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण सुधार है।
किण्डरगार्टन प्रणाली के दोष
(Demerits of Kindergarten Method)
किण्डरगार्टन शिक्षण प्रणाली के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं-
1. इस शिक्षण पद्धति में बालक को पढ़ाये जाने वाले विषयों में किसी प्रकार का सह-सम्बन्ध नहीं है।
2. इस पद्धति में व्यक्तित्व के विकास के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है, क्योकि यह अत्यन्त यान्त्रिक एवं औपचारिक है।
3. इस पद्धति में एकता के सिद्धान्त पर इतना अधिक बल दिया गया है कि वह अस्पष्ट और काल्पनिक हो गया है।
4. इस पद्धति में उपहारों व व्यवसायों में बालक बाँध दिया जाता है और वास्तविक स्वतंत्रता उसे नहीं मिलती।
5. इस पद्धति में बालक से अनुचित अपेक्षा की जाती है कि वह उपहारों से खेलकर फ्रॉबेल के दार्शनिक विचारों को समझ लेगा।
6. इस पद्धति में बालक के विकास के सिद्धान्त पर जोर दिया गया है, परन्तु यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विकास किस प्रकार किया जाए।
7. आर्थिक समस्या के कारण फ्रॉबेल के उपहारों का प्रयोग प्रत्येक विद्यालय में सम्भव नहीं है।
8. कुछ शिक्षाशास्त्रियों का विचार है कि फ्रॉबेल के उपहार व्यर्थ हैं और इनसे समय नष्ट होता है। बालक को बहुत-सी बातों तथा वस्तुओं के रंग-रूप, आकृति का ज्ञान विद्यालय जाने के पूर्व हो जाता है।
9. इस शिक्षण पद्धति द्वारा माना जाने वाला यह विचार अमान्य है कि आन्तरिक विकास के द्वारा ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
10. इस पद्धति में प्रयोग किए जाने वाले खल गीत 'भद्दे' हैं, उनके पदों को याद करना कठिन है उनसे सम्बन्धित संगीत मधुर नहीं है और उनमें क्रमबद्धता नहीं है। गीत के पदों को व्यक्त करने वाले चित्र सुन्दर व आकर्षक नहीं हैं।
इस पद्धति के दोषों की ओर संकेत करते हुए वार्ड ने कहा है, "किण्डरगार्टन प्रणाली की प्रशंसनीय सफलता उस व्यक्ति पर निर्भर करती है जो इसे अच्छी तरह जानता है, लेकिन इसके यन्त्रवत और निष्प्राण होने की भी सम्भावना है। इसमें बालक के व्यक्तित्व के विकास के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है जिसकी प्रारम्भिक वर्षों में आवश्यकता होती है।'
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










