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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

प्रश्न- पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए पूर्व प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम एवं शिक्षण विधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्य

पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के मुख्य उद्देश्य शिशु का बहुमुखी विकास करना है जो कि बालक तथा समाज में उनके भावी जीवन के लिए उपयोगी है।
कोठारी आयोग ने पूर्व प्राथमिक शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए जो कि इस प्रकार है-
(1) स्वस्थ आदतों का विकास करना।
(2) बौद्धिक जिज्ञासा को विकसित करना।
(3) शारीरिक गामक एवं इन्द्रियों के विकास के अवसर।
(4) सामाजिक अभिवृत्तियों एवं व्यवहार के प्रतिमानों का विकास।
(5) सौन्दर्यात्मक बोध का विकास।
(6) भावों व विचारों को शुद्ध स्पष्ट एवं प्रभावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करने का कौशल विकसित करना।
(7) शिक्षा के अन्तर्गत आत्माभिव्यक्ति के अवसर प्रदान करने के साथ स्वतन्त्रता व सृजनात्मकता हेतु प्रोत्साहित करना।

पूर्व प्राथमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम एवं शिक्षा पद्धति

पूर्व प्राथमिक शिक्षा का आयोजन ढाई से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए किया जाता है। भारत में कई प्रकार के पूर्व प्राथमिक विद्यालय देखने को मिलते हैं जैसे कि - नर्सरी स्कूल / किण्डरगार्टन / मान्टेसरी स्कूल / बेसिक स्कूल / गरीबों के लिए स्कूल / एकांगी शिक्षा हेतु स्कूल / न्यूनतम बाल शिक्षा संघ स्कूल। यह विभिन्न प्रकार के विद्यालय विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रमों का आयोजन करते हैं। किण्डरगार्टेन विद्यालय फ्रोबेल के शिक्षा सिद्धान्तों पर आधारित है। जबकि नर्सरी विद्यालय श्रीमती मैकमिलन शैक्षिक विचारधारा पर आधारित पायी जाती है तथा इसके अन्तर्गत ऐसे पाठ्यक्रम का आयोजन किया जाता है जिससे कि बच्चों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास हो वहीं पर देखा जाए तो मान्टेसरी विद्यालय डॉक्टर मेरिया माण्टेसरी द्वारा स्थापित बाल विद्यालय है। जिसका पाठ्यक्रम इस प्रकार है कि छात्र में अच्छी आदतों का विकास हो। पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए कोई भी निर्धारित विषय नहीं है परन्तु इस स्तर में बालक को खेल-खेल के माध्यम से ज्ञान कराया जाता है अब जहाँ तक प्रश्न उठता है शिक्षण पद्धति का तो किण्डरगार्टन, नर्सरी और माण्टेसरी शिक्षा पद्धति अलग-अलग होती है। भारत में पूर्व प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में इन पद्धतियों को अपनाया जा रहा है और साथ में ही ऐसी नवीन पद्धतियों को भी अपनाया जा रहा है जो कि भारत की परिस्थितियों के अनुकूल हैं।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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