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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

17

भारतीय संविधान में शिक्षा के लिए अनुबन्ध
(Constitutional Provisions for Education)

 

प्रश्न- मौलिक अधिकारों का क्या अर्थ है? मौलिक अधिकार व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।

उत्तर-

मौलिक अधिकारों का महत्व

सामाजिक जीवन पद्धति में व्यक्ति और राज्य के पारस्परिक सम्बन्धों में अधिकारों का एवं कर्त्तव्यों का महत्वपूर्ण स्थान है। शान्ति और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति को राज्य के बनाये कानूनों एवं नियमों के अनुसार व्यवहार करना चाहिए, किन्तु साथ ही राज्य की शक्ति एवं अधिकारों को परिसीमित करना भी आवश्यक है। मौलिक अधिकारों के तात्पर्य को निम्न अर्थों में व्यक्त किया गया है-
1. मौलिक अधिकार व्यक्ति के पूर्ण मौलिक और मानसिक विकास के लिए अपरिहार्य हैं। इनके अभाव में व्यक्ति का यथोचित विकास नहीं हो सकता है। ये वे न्यूतनम अधिकार हैं जो किसी भी लोकतान्त्रिक शासन पद्धति में व्यक्ति को प्राप्त होने चाहिए।
2. इन्हें मौलिक अधिकार इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इनका उल्लेख देश की मौलिक विधि संविधान में किया गया है।
3. मौलिक अधिकार अनुल्लेखनीय हैं, अर्थात् व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका द्वारा इनका अतिक्रमण या उल्लघन नहीं किया जा सकता है।
प्रो० लास्की के अनुसार - "अधिकार राज्य की आधारशिला है। ये वे गुण हैं जो राज्य द्वारा शक्ति के प्रयोग को नैतिक रूप देते हैं और वे प्राकृतिक अधिकार इस अर्थ में हैं कि अच्छे जीवन के लिए उनका अस्तित्व आवश्यक है।' इस प्रकार मूल अधिकार नागरिकों के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास तथा राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक हैं।

भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकारों की विशेषताएँ -

भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकार की व्यवस्था की कुछ निम्नलिखित विशेषताएँ हैं.
1. विस्तृत अधिकार पत्र है - भारतीय संविधान के पूरे एक भाग अर्थात् भाग 3 के पूरे हिस्से में मौलिक अधिकारों का विस्तृत विवेचन किया गया है। अनुच्छेद 12 से 30 तथा अनुच्छेद 32 से 35 कुल 22 अनुच्छेदों में मौलिक अधिकारों की व्याख्या की गई है।
2. मूल अधिकार निरपेक्ष नहीं हैं - मूल अधिकार निरपेक्ष नहीं है अर्थात् उन पर प्रतिबन्ध भी लगाए जा सकते हैं। जैसे-
(i) संसद सशस्त्र दल या पुलिस के सन्दर्भ में मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को कर सकती है ताकि वे अपने कर्तव्यों का सम्यक रूप से पालन कर सके।
(ii) सामान्यतः मौलिक अधिकारों को सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, सदाचार आदि के अधीन रखा गया है।
3. कुछ मौलिक अधिकार केवल नागरिकों के लिए हैं - मौलिक अधिकारों की व्याख्या में संविधान में कहीं पर व्यक्ति तथा कहीं पर नागरिक शब्द का प्रयोग किया गया है। निम्न मौलिक अधिकार केवल भारत के नागरिकों को प्राप्त है -
(अ) अनुच्छेद 15 के तहत धर्म देश जाति लिंग अथवा जन्म स्थान के आधार पर विभेद।
(ब) अनुच्छेद 16 के तहत सार्वजनिक नौकरियों में अवसर की समानता।
(स) अनुच्छेद 29 व 30 के तहत अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक अधिकार।
4. मौलिक अधिकार व्यावहारिकता पर आधारित है - भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार मात्र आदर्श लक्ष्य या विचार ही नहीं है अपितु ये वास्तविकता एवं व्यावहारिकता पर भी आधारित हैं और सम्पूर्ण समाज मानवता एवं सभ्यता के लिए आवश्यक है मौलिक अधिकार लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली की सफलता के लिए अपरिहार्य भी है।
5. मूल अधिकारों के हनन पर न्यायालय का आश्रय है - संविधान के द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के हनन होने की स्थिति पर न्यायालय की शरण या आश्रय लिया जा सकता है। संविधान की धारा 132 के अनुसार “प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार है कि वह अपने अधिकारों के हनन होने पर वह उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय की शरण ले सकता है।"

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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