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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

प्रश्न- स्वतन्त्रता, न्याय, समता एवं बन्धुत्व की संवैधानिक वचनबद्धता के संदर्भ में शिक्षा की विवेचना कीजिए।

उत्तर-
स्वतन्त्रता, न्याय, समता एवं बन्धुत्व की संवैधानिक वचनबद्धता के संदर्भ में शिक्षा -
प्राचीन काल से ही शिक्षा समाज का प्रमुख आधार रही है क्योंकि शिक्षा के द्वारा ही कोई भी देश अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप ही विकास कर सकता है।
स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत में लोकतान्त्रिक शासन पद्धति को अपनाया गया था। भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुरूप देश में लोकतन्त्रात्मक, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी समाज की स्थापना के लक्ष्य पर ध्यान रखा गया, जिसके लिए स्वतन्त्रता न्याय, समता एवं बंधुत्व की संवैधानिक वचनबद्धता है। अतः देश की शिक्षा का उद्देश्य वर्गविहीन, जातिविहीन, धर्मनिरपेक्ष एवं कल्याणकारी समाज की रचना करना है ताकि देश को कुशल, देशभक्त एवं निष्ठावान नागरिक मिलें, इसके लिए शिक्षा व्यवस्था के अन्तर्गत परिवर्तन एवं संशोधन की दृष्टि से विभिन्न आयोगों का गठन किया गया -
(A) विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (University Education Commission 1948- 49) - स्वतन्त्रता के पश्चात् देश में गठित प्रथम शिक्षा आयोग के रूप में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का विशेष महत्व है। इसके सम्बन्ध में आयोग ने लिखा है - "ज्ञान के प्रसार, नवीन ज्ञान के लिए सतत् खोज, जीवन के अर्थ को साधने के सतत् प्रयास, अपने समाज की व्यावसायिक आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए व्यावसायिक शिक्षा का प्रावधान, उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण कार्य हैं।' अतः आयोग ने उपयुक्त कार्यो को क्रियान्वित करने की दृष्टि से विश्वविद्यालय शिक्षा के निम्नलिखित शिक्षा के उद्देश्यों का उल्लेख किया-
(1) इस शिक्षा के द्वारा ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना चाहिए जो राजनीति, प्रशासन, व्यवसाय और वाणिज्य आदि में नेतृत्व प्रदान कर सकें।
(2) विश्वविद्यालय को छात्रों के मानसिक व शारीरिक विकास पर ध्यान देना चाहिए।
(3) विश्वविद्यालय शिक्षा का एक मुख्य कार्य छात्रों का चारित्रिक उत्थान होना चाहिए।
(4) विश्वविद्यालय शिक्षा द्वारा छात्रों में विश्व बन्धुत्व भावना का विकास करना चाहिए।
(5) संविधान में समानता, स्वतन्त्रता एवं बन्धुत्व के आदर्श का संरक्षण करना विश्वविद्यालय का उद्देश्य होना चाहिए।
(B) माध्यमिक शिक्षा आयोग - इनके अनुसार, "शिक्षा व्यवस्था को आदतों, अभिवृत्तियों एवं चारित्रिक गुणों के विकास के लिए अपना योगदान देना चाहिए, जिससे यहाँ के नागरिक लोकतान्त्रिक नागरिकता के उत्तरदायित्वों को योग्यतापूर्वक वहन करने के सुयोग्य हो सकें और उन सभी ध्वंसात्मक प्रवृत्तियों का विरोध करे।
आयोग ने माध्यमिक शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य प्रस्तावित किए हैं -
(1) व्यक्तित्व का विकास - यह माध्यमिक शिक्षा का अन्य उद्देश्य है। माध्यमिक शिक्षा को अपने छात्रों में रचनात्मक शक्ति के स्रोतों का विकास करना चाहिए जिससे कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत का आनन्द लेने के लिए सुयोग्य बनेंगे।
(2) व्यावसायिक कुशलता की उन्नति करना माध्यमिक शिक्षकों को अपने छात्रों की उत्पादक, प्रौद्योगिक एवं व्यावसायिक कुशलता की वृद्धि पर ध्यान देना चाहिए जिससे वे राष्ट्र की समृद्धि में सहायता कर सकें।
(3) लोकतान्त्रिक नागरिकता का विकास करना - भारत में धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणतन्त्र को अंगीकृत किया गया है। अतः माध्यमिक शिक्षा द्वारा नागरिकों में बौद्धिक, सामाजिक एवं नैतिक गुणों का विकास करना चाहिए जिससे कि वे लोकतान्त्रिक नागरिकता के उत्तरदायित्वों को समझ सकें।
(4) नेतृत्व के लिए शिक्षा व्यक्तियों को प्रशिक्षित करना माध्यमिक शिक्षा का एक मुख्य कार्य होना चाहिए जो सामाजिक, राजनीतिक, औद्योगिक अथवा सांस्कृतिक क्षेत्रों में नेतृत्व के उत्तरदायित्व को वहन करने में समर्थ हों।
(C) शिक्षा आयोग - शिक्षा आयोग के द्वारा शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार यह है कि इसे परिवर्तित करके व्यक्तियों के जीवन, आवश्यकताओं और आकांक्षाओं में इसके सम्बन्ध को स्थापित किया जाए और सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक परिवर्तन का सशक्त साधन बनाया जाए, इस प्रकार शिक्षा एवं राष्ट्रीय लक्ष्यों को निर्धारित किया गया -
(i) शिक्षा के द्वारा समाज का आधुनिकीकरण।
(ii) सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना।
(iii) शिक्षा को उत्पादकता से जोड़ा जाना।
(iv) सामाजिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का बिकास करना।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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