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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

प्रश्न- औपचारिक, निरौपचारिक और अनौपचारिक अभिकरणों के सापेक्षिक सम्बन्धों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-

औपचारिक, निरौपचारिक और अनौपचारिक अभिकरणों में सन्तुलन

बच्चे के विकास में शिक्षा के औपचारिक, निरौपचारिक और अनौपचारिक तीनों प्रकार के अभिकरणों का बड़ा हाथ रहता है। यदि विचार करके देखें तो हमें यह पता चलेगा कि बच्चों की शिक्षा उनके अपने घर से प्रारम्भ होती है। घर, पड़ोस और अन्य सामाजिक समूहों का उनके विकास पर कितना प्रभाव पड़ता है, इसकी चर्चा हमने आगे के अध्यायों में की है। यहाँ हम इतना ही लिखना पर्याप्त समझते हैं कि शिक्षा की ये संस्थाएँ बच्चे की शिक्षा में बड़ा महत्व रखती हैं और शिक्षा के औपचारिक अभिकरणों के निर्माण का श्रेय भी इन्हीं को होता है। शिक्षा के क्षेत्र में इनके महत्व को स्वीकार करना ही चाहिए।
दूसरी ओर आज हमारा सामाजिक विकास एक जटिल स्थिति को प्राप्त हो चुका है। हमने प्रायः सभी क्षेत्रों में आशातीत उन्नति की है। इन सबके समझने के लिए हमें व्यवस्था शिक्षा की आवश्यकता होती है। व्यवस्थित शिक्षा का प्रबन्ध औपचारिक, अभिकरणों और विशेषकर विद्यालयों में ही किया जाता है। विद्यालयों को बच्चों को अपनी रुचि, रुझान एवं आवश्यकताओं के अनुसार विकास करने के समान अवसर देने चाहिए।
लाख प्रयत्न करने के बाद भी कुछ लोग औपचारिक शिक्षा का लाभ नहीं उठा पाते। आज ऐसे लोगों को साक्षर बनाने और उन्हें अपने-अपने कार्यक्षेत्र में दक्ष करने के लिए प्रत्येक देश में निरौपचारिक शिक्षा की व्यवस्था की जाती है।
परन्तु औपचारिक तथा निरौपचारिक अभिकरण अपने कार्यों में तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक उन्हें शिक्षा के अनौपचारिक अभिकरणों का सहयोग प्राप्त नहीं होता। घर और विद्यालयों की मान्यताएँ समान होनी चाहिए भिन्न मान्यताओं के बीच बच्चे उचित निर्णय लेने में असमर्थ रहते हैं। बहुत सम्भव है कि वे दो विरोधी विचारधाराओं में से किसी को भी पूर्ण रूप से ग्रहण न करें। विद्यालयों में किये जाने वाले कार्यों की यदि घर और समुदायों में आवृत्ति नही होती तो बच्चों में अच्छी आदतें और उचित स्थायी भावों का निर्माण नहीं किया जा सकता। आज के युग में औपचारिक, निरौपचारिक और अनौपचारिक तीनों प्रकार के अभिकरणों का अपना-अपना महत्व है। तीनों की सफलता एक-दूसरे पर निर्भर करती है। उन्हें आपस में सहयोग के साथ कार्य करना चाहिए। यदि औपचारिक निरौपचारिक और अनौपचारिक अभिकरण एक-दूसरे का सहयोग करेंगे तो हमारी शिक्षा व्यवस्था निश्चित रूप से बड़ी प्रभावशाली एवं फलदायक होगी। हमें इसके लिए प्रयत्न करना चाहिए।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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