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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

प्रश्न- ब्राउन ने शिक्षा के अभिकरणों को कितने भागों में बाँटा है? प्रत्येक का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

ब्राउन का शिक्षा के अभिकरणों का वर्गीकरण
(Brown's Classification of Agencies of Education)

ब्राउन महोदय ने शिक्षा के समस्त अभिकरणों को चार वर्गों में विभाजित किया है - औपचारिक, अनौपचारिक, व्यावसायिक और अव्यावसायिक।

शिक्षा के औपचारिक अभिकरण- ब्राउन महोदय के अनुसार इस वर्ग में अभिकरण आते हैं जिनका निर्माण कोई समाज बच्चों के ज्ञानवर्द्धन और व्यवहार को प्रभावित करने की दृष्टि से ही करता है जैसे - विद्यालय, पुस्तकालय, वाचनालय, संग्रहालय, आर्ट गैलरी और धार्मिक संस्थाएँ।

शिक्षा के अनौपचारिक अभिकरण - ब्राउन महोदय के अनुसार इस वर्ग में वे अभिकरण आते हैं जिनका निर्माण कोई समाज बच्चों को प्रत्यक्ष रूप से शिक्षा देने के लिए नहीं करता, पर वे किसी न किसी रूप में बच्चों को प्रभावित करते हैं, जैसे- परिवार, खेल समूह और समाज और राज्य।
शिक्षा के व्यावसायिक अभिकरण - ब्राउन महोदय ने इस वर्ग में उन साधनों को रखा है। जिनका निर्माण व्यावसायिक दृष्टि से किया जाता है पर वे हमारी शिक्षा के लिए भी प्रयोग किये जाते हैं जैसे - समाचार पत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविजन, नृत्यगृह, नाट्यशाला और चलचित्र। उनके अनुसार ये ऐसे साधन हैं जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में हमारे ज्ञान में वृद्धि करते हैं और आचरण को प्रभावित करते हैं। समाचार पत्र और पत्रिकाओं में हमें जो कुछ पढ़ते हैं, रेडियो पर जो कुछ सुनते हैं और टेलीविजन, नृत्यगृह, नाट्यशाला और चलचित्र पर जो कुछ सुनते और देखते हैं, उन सबसे हमारे ज्ञान में वृद्धि होती है और हमारा आचरण प्रभावित होता है।
आज इन सब साधनों का प्रयोग नियोजित शिक्षा के क्षेत्र में भी किया जाता है। समाज की आवश्यकताओं और उनकी पूर्ति के साधनों पर प्रचार आज प्रायः इन्हीं साधनों के माध्यम से किया जाता है। आज रेडियो, टेलीविजन और चलचित्रों के द्वारा देश-विदेश के समाचार और विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रसारण ही नहीं होता अपितु भाषा, इतिहास, भूगोल, विज्ञान और अन्यान्य विषयों की शिक्षा कक्षाओं के लिए विभिन्न विषयों में पाठ शिक्षण का प्रसारण होता है। इससे न केवल विद्यार्थी ही सीखते हैं अपितु अध्यापक भी पाठ शिक्षण की नई-नई विधियों से परिचित होते हैं। हमारी केन्द्रीय और प्रान्तीय सभी सरकारें शैक्षिक चित्र बनाने के लिए भी प्रयत्नशील हैं। इन चित्रों के माध्यम से हम शिक्षा भी देने लगे हैं।
शिक्षा के अव्यावसायिक अभिकरण - इस वर्ग के अन्तर्गत ब्राउन महोदय ने उन अभिकरणों को रखा है जिनका निर्माण समाज की सेवा के लिए किया जाता है और जिनका न तो व्यावसायिक दृष्टि से निर्माण किया जाता है और न ही उनका प्रयोग किसी व्यावसायिक कार्य के लिए किया जाता है। इस वर्ग में उन्होंने खेल, संघ, समाज कल्याण केन्द्र, प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र, युवक कल्याण संगठन, स्काउट संस्था आदि को रखा है। ये सभी अभिकरण बच्चे का समाजीकरण करने में बड़ी सहायता करते हैं। इनके द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने वाले समाज सेवा का सच्चा पाठ पढते हैं और उनके कार्यों से अन्य लोग भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों रूपों में सामाजिक आचरण की शिक्षा प्राप्त करते हैं।
एक स्पष्टीकरण - ब्राउन महोदय ने भी शिक्षा के अभिकरणों और शिक्षा के साधनों में भेद नहीं किया है। यूँ तो अनेक विद्वान आज भी ब्राउन के उपर्युक्त वर्गीकरण से सहमत हैं और अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में इन्हें स्थान भी मिला हुआ है लेकिन हमारी दृष्टि से यह एक भूल है। शिक्षा जगत के विद्वानों को इस भूल का सुधार कर लेना चाहिए।
उपसंहार - शिक्षा के अभिकरणों के उपर्युक्त तीनों वर्गीकरणों के पीछे न तो कोई ठोस आधार है और न ही उसके अनुसार यथा अभिकरणों के बीच कोई तार्किक सीमा नहीं है। ब्राउन द्वारा प्रस्तुत वर्गीकरण तो बड़ा भ्रामक है। उन्होंने तो शिक्षण साधनों को भी शिक्षा के अभिकरण मान लिया है। हमें सावधानी से काम लेना चाहिए। आज हमें शिक्षाशास्त्र का विकास केवल पाश्चात्य शिक्षा साहित्य के आधार पर ही नहीं करना चाहिए, अपितु अपने भारतीय साहित्य और अपने अनुभवों को भी उसका आधार बनाना चाहिए। यदि हम अपनी बुद्धि से काम लें तो इस प्रकार की अनेक भूलों का सुधार सम्भव है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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