लोगों की राय

बी ए - एम ए >> बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 राजनीति विज्ञान

बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 राजनीति विज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2795
आईएसबीएन :0

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

तुलनात्मक सरकार और राजनीति : यू के, यू एस ए, स्विटजरलैण्ड, चीन

प्रश्न- दबाव अथवा हित समूह से आप क्या समझते हैं? दबाव समूह के प्रमुख लक्षण एवं साधनों पर प्रकाश डालिए।

अथवा
दबाव समूह का अर्थ एवं परिभाषा दीजिए तथा इनके तरीकों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

सम्बन्धित लघु / अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. दबाव समूह से आप क्या समझते हैं?
अथवा
हितसमूह क्या है?
2. दबाव समूह के प्रमुख लक्षण बताइये।
3. दबाव समूह के प्रमुख साधन क्या हैं?
4. दबाव समूह की भूमिका एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
5. राजनीतिक दल एवं दबाव समूह में क्या अन्तर है?

उत्तर -

दबाव समूह को विभिन्न नामों से सम्बोधित किया गया है- हित समूह, गैर सरकारी संगठन, लॉबीज, औपचारिक संगठन इकाई।

वर्तमान समय में प्रत्येक देश में दबाव समूह राजनैतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लोकतांत्रिक पद्धति मंि इनका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। लोकतंत्र के विकास और सुदृढ़ता के साथ-साथ इन दबाव समूहों का भी विकास हुआ है। यद्यपि लोकतंत्र में जनमत की अभिव्यक्ति के प्रमुख साधन राजनीतिक दल हैं परन्तु दबाव समूह भी उनके कम महत्वपूर्ण नहीं है। फ्रेडरिक ने लिखा है कि, "क्या कूड़ा ढोने वाले और राजनीतिशास्त्र के गंभीर छात्र सभी इन दबाव समूहों को घटिया व तुच्छ दृष्टि से देखते थे।'

परिभाषा - दबाव समूहों की प्रमुख परिभाषायें निम्नांकित हैं-

आर्थर बेंटल के अनुसार, "समूह समाज के लोगों का एक भाग है जो किसी ऐसे भौतिक पुंज के रूप में नहीं है जोकि व्यक्तियों के अन्य पुंजों से पृथक हो, वरन् सामूहिक क्रिया के रूप में माना गया है, जो सहभागी व्यक्तियों पर इसी प्रकार की अन्य सामूहिक क्रियाओं में भाग लेने पर कोई रुकावट उत्पन्न नहीं करता।"

एच जेगलर के शब्दों में, "यह एक संगठित समूह है जो सरकारी निर्णयों के संदर्भ को सरकार में अपने प्रतिनिधियों को स्थापित किये बिना भी प्रभावित करना चाहता है।

लक्षण - दबाव समूहों में निम्नांकित लक्षण होते है-

1. दबाव समूहों का किसी देश विशेष की सामाजिक और राजनीतिक विकास की स्थिति के अनुसार परिवर्तन होता रहता है इनके विकास का एक क्रम होता है।

2. इनकी प्रकृति सर्वव्यापक होती है और ये सभी प्रकार की राजनीतिक व्यवस्थाओं में पाये जाते हैं।

3. ये राजनीति और प्रशासन को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। प्रो० जौहरी का मत है कि, "दबाव समूह राजनीति के साथ लुका-छिपी का खेल खेलते हैं।

4. इनका निश्चित व सीमित उद्देश्य होता है जो विशेष वर्ग के हित से सम्बन्धित होता है।

दबाव समूहों के साधन - दबाव समूहों के विभिन्न साधन निम्नलिखित हैं-

1 सामूहिक प्रचार - दबाव समूह अपने उद्देश्यों का अधिक से अधिक प्रचार करते हैं। जिससे उन्हें अधिक से अधिक जन समर्थन प्राप्त हो सके।

2. हड़ताल व प्रदर्शन - दबाव समूह हड़ताल व प्रदर्शनों के द्वारा एक ओर जनसमर्थन प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, दूसरी ओर सरकार पर अपनी मांगों को पूरा करने के लिए दबाव डालते हैं।

3. संगठन निर्माण - दबाव समूह यद्यपि संगठित और असंगठित दोनों प्रकार के हो सकते हैं परन्तु संगठित दबाव समूह एक निश्चित योजना के आधार पर काम करते हैं और अधिक प्रभावी होते हैं।

4. पत्र-पत्रिकाओं द्वारा प्रचार - दबाव समूह पत्र-पत्रिकाओं में लेखों व खबरों के द्वारा अपने उद्देश्यों का प्रचार करते हैं।

5. प्रकोष्ठ क्रिया - यह दबाव समूहों के कार्य करने का सर्वाधिक प्रचलित तरीका है। लॉबिंग से अभिप्राय है 'सरकार को प्रभावित करना।

दबाव अथवा हित समूहों की भूमिका एवं महत्व - दबाव अथवा हित समूहों की भूमिका किसी भी प्रकार की व्यवस्था में महत्वपूर्ण होती है। वे प्रत्येक व्यवस्था में पाये जाते हैं। राबर्ट सी. बोन का मत है, "दबाव समूह सभी राजनीतिक व्यवस्थाओं में, यहाँ तक कि सर्वाधिकारवादी राज्यों में भी पाये जाते हैं, केवल यह तथ्य कि दबाव समूह साम्यवादी राज्यों में भी होते हैं, इनकी सर्वव्यापकता का प्रमाण है।' इसके निम्न महत्व है -

1. सदस्यों के हितों का प्रयास - दबाव अथवा हित समूह अपने सदस्यों के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक हितों को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है। इनके द्वारा हितों की विविधता और उनमें प्रतिस्पर्धा को सहज प्रश्रय दिया जाता है।

2. जनमत की अभिव्यक्ति के साधन - लोकतंत्र की सफलता के लिए लोकमत तैयार करना आवश्यक है ताकि विशिष्ट नीतियों का समर्थन अथवा विरोध किया जा सके। दबाव समूह जनमत की अभिव्यक्ति के साधन आते हैं।

3. लोकतंत्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ता प्रदान करना - दबाव अथवा हित समूह लोकतंत्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विशेषकर निर्वाचन काल के दौरान दबाव समूहों द्वारा लोकतंत्र प्रणाली को जीवित व जाग्रत रखा जाता है।

राजनीतिक दल एवं दबाव समूह में अन्तर

क्र.सं.
राजनीतिक दल
दबाव समूह
1. राजनैतिक दलों का प्रमुख उद्देश्य राजनीतिक सत्ता पर वर्चस्व स्थापित करना होता है। दबाव समूहों का कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक उद्देश्य नहीं होता।
2. राजनैतिक दलों का स्वरूप व सदस्य अधिक व्यापक होते हैं। दबाव समूहों का स्वरूप व सदस्य राजनैतिक दलों की तुलना में कम व्यापक होता हैं।
3. राजनीतिक दल का संबंध राष्ट्रीय हित के सभी प्रश्नों से होता है एवं उनका दृष्टिकोण व्यापक होता है। दबाव समूहों का उद्देश्य सीमित होता है, वे वर्गीय हितों से संबंधित होते हैं।
4. राजनैतिक दल निर्वाचन में भाग लेते हैं। दबाव समूह सामान्यतया निर्वाचन में भाग नहीं लेते।
5. राजनीतिक दलों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु संवैधानिक साधनों को ही अपनाये। दबाव समूह संवैधानिक एवं संविधानेत्तर सभी साधनों का आवश्यकतानुसार प्रयोग करते हैं।

 

 

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

    अनुक्रम

  1. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
  2. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन क्षेत्र की विवेचना कीजिए।
  3. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति से आप क्या समझते हैं? इसकी प्रकृति को स्पष्ट कीजिए।
  4. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति और तुलनात्मक सरकार में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  5. प्रश्न- उदार लोकतन्त्र से आप क्या समझते हैं? इसकी विशेषताएँ लिखिए।
  6. प्रश्न- पूँजीवाद से आप क्या समझते हैं, इसके गुण-दोष क्या हैं?
  7. प्रश्न- समाजवादी राज्य क्या है, इसकी कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालिए।
  8. प्रश्न- समाजवाद की परिभाषा दीजिए। विवेचना कीजिए।
  9. प्रश्न- उपनिवेशवाद क्या है? इसकी विशेषताएँ बताइये।
  10. प्रश्न- विकासशील देशों में राज्य की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  11. प्रश्न- रूढ़ियों से क्या अभिप्राय है? इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  12. प्रश्न- रूढ़ियों कानून से किस प्रकार भिन्न हैं? प्रमुख अभिसमयों का वर्णन कीजिए।
  13. प्रश्न- रूढ़ियों का पालन क्यों होता है? स्पष्ट कीजिये।
  14. प्रश्न- राजपद से आपका क्या अभिप्राय है? इसकी शक्तियों की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- राजा एवं राजपद अन्तर को स्पष्ट कीजिये।
  16. प्रश्न- मन्त्रिमण्डलात्मक प्रणाली का उद्भव एवं विकास का वर्णन कीजिए।
  17. प्रश्न- मन्त्रिमंडल के संगठन एवं मंत्रिमण्डल व्यवस्था की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  18. प्रश्न- मन्त्रिमंडल के कार्यों का वर्णन कीजिए।
  19. प्रश्न- बिटिश प्रधानमंत्री सारे शासन तंत्र की धुरी है।' इस कथन की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- ग्रेट ब्रिटेन की सम्प्रभुता की विवेचना कीजिए तथा इस प्रभुसत्ता की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
  21. प्रश्न- लार्ड सभा की रचना कार्यों व उनकी शक्तियों का वर्णन कीजिए।
  22. प्रश्न- इंग्लैंड की समिति प्रणाली के बारे में आप क्या जानते हैं? इसके कितने प्रकार होते हैं?
  23. प्रश्न- कामन्स सभा क्या है? इसके संगठन एवं पदाधिकारियों का वर्णन कीजिए।
  24. प्रश्न- कामन्स सभा की शक्तियों, कार्यों एवं व्यावहारिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
  25. प्रश्न- कामन सभा के स्पीकर एवं उसकी शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  26. प्रश्न- ब्रिटिश समिति व्यवस्था की विवेचना कीजिए।
  27. प्रश्न- ब्रिटेन में विधेयकों का वर्गीकरण कीजिए एवं व्यवस्थापन प्रक्रिया पर प्रकाश डालिये।
  28. प्रश्न- न्यायपालिका से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
  29. प्रश्न- ब्रिटिश न्यायपालिका के संगठन पर प्रकाश डालिए।
  30. प्रश्न- ब्रिटिश न्याय व्यवस्था की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- विधि का शासन ब्रिटिश संविधान का एक विशिष्ट लक्षण है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  32. प्रश्न- राजनीतिक दलों से क्या तात्पर्य है? राजनीतिक दलों की भूमिका एवं महत्व को समझाइये।
  33. प्रश्न- राजनीतिक दल प्रणाली के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
  34. प्रश्न- ब्रिटेन में राजनीतिक दलों के संगठन, कार्यक्रम एवं उनकी भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
  35. प्रश्न- ग्रेट ब्रिटेन में राजनीतिक दलों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  36. प्रश्न- ब्रिटिश दल पद्धति की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  37. प्रश्न- रूढ़ियों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
  38. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के ऐतिहासिक कारणों का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के राजनैतिक कारणों का उल्लेख कीजिए।
  40. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के मनोवैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट कीजिए।
  41. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के अन्तर्राष्ट्रीय कारणों का वर्णन कीजिए।
  42. प्रश्न- मंत्रिमण्डल की कानूनी स्थिति का वर्णन कीजिए।
  43. प्रश्न- मंत्रिमण्डल की व्यावहारिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
  44. प्रश्न- मंत्रिमण्डल एवं क्राउन के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।
  45. प्रश्न- मन्त्रिमंडल का ब्रिटिश की संवैधानिक व्यवस्था में क्या महत्व है?
  46. प्रश्न- मंत्रिमंडल की महत्ता के औचित्य को स्पष्ट कीजिए।
  47. प्रश्न- मंत्रिमण्डल की महत्ता के कारण बताइये।
  48. प्रश्न- लार्ड सभा ने सुधार के क्या प्रयास किये?
  49. प्रश्न- क्या ग्रेट ब्रिटेन में संसद संप्रभु है?
  50. प्रश्न- 'संसदीय प्रभुता' के सिद्धान्त का मूल्यांकन कीजिए।
  51. प्रश्न- विपक्षी दल की भूमिका का वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- प्रिवी काउन्सिल की न्यायिक समिति का वर्णन कीजिए।
  53. प्रश्न- लार्ड सभा एवं प्रिवी काउन्सिल की न्यायिक समिति में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  54. प्रश्न- ब्रिटिश कानून कितने प्रकार से प्रयोग में लाये जाते हैं?
  55. प्रश्न- राजनीतिक दलों के कार्यों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  56. प्रश्न- राजनीतिक दल मतदाताओं में अपना समर्थन बढाने के लिये कौन-कौन से साधनों का प्रयोग करते हैं।
  57. प्रश्न- ब्रिटेन तथा फ्राँस की दलीय प्रणाली का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए।
  58. प्रश्न- अमेरिका के राष्ट्रपति के कार्यों, शक्तियों की विवेचना कीजिए।
  59. प्रश्न- अमेरिकी राष्ट्रपति की वृद्धि एवं उसके कारणों की विवेचना कीजिये।
  60. प्रश्न- अमेरिकी व ब्रिटिश मंत्रिमंडल की तुलना कीजिए।
  61. प्रश्न- ब्रिटिश संप्रभु (क्राउन) प्रधानमंत्री तथा अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
  62. प्रश्न- अमेरिका के सीनेट के गठन, उसकी शक्ति एवं कार्यों की विवेचना कीजिए।
  63. प्रश्न- प्रतिनिधि सभा के संगठन, शक्ति एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  64. प्रश्न- अमेरिकी कांग्रेस की शक्ति एवं कार्यों का उल्लेख कीजिए।
  65. प्रश्न- अमेरिका का उच्चतम न्यायालय व्यवस्थापिका का तृतीय सदन बनता जा रहा है। स्पष्ट कीजिए।
  66. प्रश्न- सर्वोच्च के महत्व का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  67. प्रश्न- न्यायिक पुनर्निरीक्षण से आप क्या समझते हैं? अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के संदर्भ में इसकी व्याख्या कीजिए।
  68. प्रश्न- सर्वोच्च न्यायालय की कार्य-प्रणाली का विवेचना कीजिए।
  69. प्रश्न- अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के गठन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति में क्या अन्तर है?
  70. प्रश्न- अमेरिका में राजनीतिक दलों के उद्भव एवं विकास का वर्णन कीजिए।
  71. प्रश्न- अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की क्या भूमिका है?
  72. प्रश्न- अमेरिका तथा ब्रिटेन के राजनीतिक दलों की समानता और असमानताओं का वर्णन कीजिए।
  73. प्रश्न- दबाव अथवा हित समूह से आप क्या समझते हैं? दबाव समूह के प्रमुख लक्षण एवं साधनों पर प्रकाश डालिए।
  74. प्रश्न- संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  75. प्रश्न- अमेरिकी राष्ट्रपति को दलीय अथवा राष्ट्रीय नेता के रूप में पर टिप्पणी कीजिए।
  76. प्रश्न- राष्ट्रपति एवं मन्त्रिमण्डल के सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
  77. प्रश्न- जैरीमैण्डरिंग पर संछिप्त टिप्पणी लिखिए।
  78. प्रश्न- सीनेट के महत्व पर प्रकाश डालिये।
  79. प्रश्न- यू. एस. ए. 'सीनेट की शिष्टता' का क्या अर्थ है?
  80. प्रश्न- प्रतिनिधि सभा की दुर्बलता के कारण बताइये।
  81. प्रश्न- संघीय न्यायपालिका कितने प्रकार की होती है?
  82. प्रश्न- संघीय न्यायलय क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
  83. प्रश्न- जिला न्यायालय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  84. प्रश्न- संघीय अपील न्यायालय पर प्रकाश डालिये।
  85. प्रश्न- अमेरिका में राजनीतिक दलों के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
  86. प्रश्न- अमेरिका में राजनीतिक दलों की कमियों का वर्णन कीजिए।
  87. प्रश्न- अमरीका और इंग्लैण्ड की दल- प्रणाली की तुलना कीजिए।
  88. प्रश्न- अमेरिका के राजनीतिक दलों की कार्य प्रणाली का वर्णन कीजिए।
  89. प्रश्न- माओवाद क्या है? माओवाद के प्रमुख सिद्धान्त कौन-कौन से हैं?
  90. प्रश्न- कन्फ्यूशियसवाद क्या है? इसके प्रमुख सिद्धान्त कौन-कौन से हैं?
  91. प्रश्न- चीनी विधानमंडल राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस के गठन, शक्ति एवं कार्यों पर प्रकाश डालिए।
  92. प्रश्न- जनवादी कांग्रेस की स्थायी समिति के बारे में आप क्या जानते हंत उसकी शक्ति एवं कार्यों को स्पष्ट कीजिए।
  93. प्रश्न- स्थायी समिति की शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  94. प्रश्न- जनवादी चीन के राष्ट्रपति के कार्यों एवं अधिकारों की विवेचना कीजिए।
  95. प्रश्न- चीन में न्याय व्यवस्था की प्रमुख विशेषतायें बताते हुये न्यायपालिका के संगठन एवं उसकी शक्तियों का वर्णन कीजिए।
  96. प्रश्न- जनवादी चीन में साम्यवादी दल के संगठन का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- जनवादी चीन में साम्यवादी दल की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  98. प्रश्न- एक देश दो प्रणाली नीति से आप क्या समझते हैं?
  99. प्रश्न- राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस की स्थायी समिति पर टिप्पणी लिखिए।
  100. प्रश्न- राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस की वास्तविक स्थिति का वर्णन कीजिए।
  101. प्रश्न- चीन में कांग्रेस के सदस्यों के अधिकारों एवं दायित्वों की विवेचना कीजिए।
  102. प्रश्न- चीन राज्य परिषद के गठन पर प्रकाश डालिये।
  103. प्रश्न- चीन के सैनिक केन्द्रीय आयोग पर टिप्पणी लिखिए।
  104. प्रश्न- चीन के राज्य परिषद की वास्तविक स्थिति की विवेचना कीजिए।
  105. प्रश्न- चीन के राज्य परिषद की शक्ति एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  106. प्रश्न- जनवादी चीन में प्रोक्यूरेटोरेट पद की व्यवस्था का विवेचना कीजिए।
  107. प्रश्न- स्विट्जरलैण्ड के वर्तमान संविधान की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- स्विट्जरलैण्ड के संविधान की संशोधन प्रकिया का वर्णन कीजिए।
  109. प्रश्न- प्रत्यक्ष लोकतन्त्र से आप क्या समझते हैं? स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष लोकतन्त्र की सफलता के कारणों को इंगित कीजिए।
  110. प्रश्न- स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली का वर्णन कीजिए।
  111. प्रश्न- स्विट्जरलैंड की कार्यपालिका के बारे में बताइये।
  112. प्रश्न- स्विस व्यवस्थापिका के बारे में बताइये।

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book