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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 राजनीति विज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2795
आईएसबीएन :0

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तुलनात्मक सरकार और राजनीति : यू के, यू एस ए, स्विटजरलैण्ड, चीन

प्रश्न- मन्त्रिमण्डलात्मक प्रणाली का उद्भव एवं विकास का वर्णन कीजिए।

सम्बन्धित लघु / अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. प्रिवी काउन्सिल का वर्णन कीजिए।
2. प्रिवी काउन्सिल के कार्य लिखिए।
3. मंत्रिमण्डल के विकास का वर्णन कीजिए।
4. मंत्रिपरिषद एवं मंत्रिमण्डल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
5. इंग्लैण्ड के संदर्भ में मन्त्रिपरिषद व मन्त्रिमंडन के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर -

मंत्रिमंडलात्मक प्रणाली का उदभव एवं विकास
(Origin and Development of the Cabinet System)

मंत्रिमंडलात्मक व्यवस्था का उद्भव 'प्रिवी काउन्सिल' से हुआ। ब्रिटेन की मंत्रिमंडलात्मक व्यवस्था को समझने के लिए प्रिवी काउन्सिल, मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल का अध्ययन आवश्यक है।

प्रिवी काउन्सिल
(Privy Council)

वर्तमान समय में ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था में प्रिवी काउन्सिल का महत्व बहुत कम हो गया है। प्रजातंत्र के प्रारम्भिक समय में राजा के पास एक परिषद हुआ करती थी जो राजा के सहायकों का एक समूह थी। इनका कार्य अपने दायित्वों का निर्वाह एवं राजा को परामर्श देना था। 'प्रिवी काउन्सिल इसे दिया गया कानूनी एवं आधिकारिक नाम था जिससे तात्पर्य उन सलाहकारों की समिति से था जो संप्रभु के सलाहाकर थे। प्रिवी काउन्सिल की उत्पत्ति नार्मन काल में क्यूरिया रेजिस (Curia Regis) से हुई।

प्रिवी काउन्सिल का इतिहास काफी पुराना है। इसके स्वरूप में भी समय-समय पर कुछ परिवर्तन होते रहे। लंकास्ट्रियन काल में इसे पार्लियामेंट के प्रति उत्तरदायी बनाने का प्रयत्न किया गया लेकिन वह सफल नहीं हुआ। टयूडर काल के निरंकुश राजतंत्र में सोलहवीं शताब्दी में यह संस्था बहुत अधिक शक्तिशाली रही। सत्रहवीं शताब्दी में इसकी शक्तियाँ काफी कम हो गयीं क्योंकि धीरे-धीरे राजा के काउंसिलरों की संख्या में इतनी अधिक वृद्धि हो गई कि राजा केवल चुने हुय सलाहकारों को ही बुलाने लगा। इस प्रकार 'प्रिवी काउन्सिल' में से ही राजा की अंतरंग समिति के रूप में 'कैबिनेट' का अस्तित्व सामने आया। 1679 ई. में यह एक नियमित व्यवहार बन गया कि प्रिवी काउन्सिल केवल औपचारिक कार्य करने लगी। वास्तविक कार्य कैबिनेट' करने लगी।

संगठन - प्रिवी काउन्सिल में इस समय 300 से अधिक सदस्य हैं। मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य प्रिवी काउन्सिल के सदस्य होते हैं। एक बार इसका सदस्य बनने के बाद इसकी सदस्यता आजीवन रहती है। इसमें सभी भूतपूर्व व वर्तमान मंत्री, अधिराज्यों के प्रधानमंत्री, 'प्रिंस आफ वेल्स' रायल डयूक्स, आर्कबिशप, लंदन का विशप, ख्याति प्राप्त न्यायाधीश, न्यायिक लार्ड, अवकाश प्राप्त उच्चाधिकारी व राजदूत, कला, विज्ञान और साहित्य के विद्वान, स्पीकर इसके सदस्य होते हैं।

प्रिवी काउन्सिल का क्लर्क - इसकी बैठक बुलाता है और ब्रिटिश संप्रभु के द्वारा इसकी अध्यक्षता की जाती है। इसकी गणपूर्ति तीन हैं। किन्तु नियमानुसार चार से कम सदस्यों को की भी इसकी बैठक में उपस्थित होने के लिए नहीं बुलाया गया। ऑग के अनुसार 'संपूर्ण प्रिवी काउन्सिल की बैठक एक साथ केवल संप्रभु के देहावसान के समय अथवा संप्रभु के विवाह के इरादे के समय एवं सिंहासनारोहण के समय बुलाई जाती है।

प्रिवी काउन्सिल के कार्य प्रिवी काउन्सिल संप्रभु के प्रति उत्तरदायी हैं और उसके आदेशों की पुष्टि करती है। वह मंत्रिपरिषद आदेश' प्रिवी काउन्सिल के नाम से जारी करती है। संसद के अधिवेशन को बुलाना, स्थगित करना एवं सत्रावसान करना तथा लोक सदन का विघटन करना सपरिषद राजा या रानी का ही कार्य है। युद्ध, तटस्थता, नाकेबन्दी, संधि आदि की उद्घोषणायें भी इसी के नाम से की जाती हैं। संवैधानिक आदेश भी संप्रभु प्रिवी काउन्सिल द्वारा ही जारी करता है। वह चार छह प्रिवी काउन्सिलरों, जो कैबिनेट मंत्री होते हैं, को बुलाकर काउन्सिल के नाम से कोई भी निर्णय कर सकता है। संप्रभु की अनुपस्थिति में प्रिवी काउन्सिल की कोई बैठक नहीं हो सकती।

प्रिवी काउन्सिल की एक न्यायिक समिति उपनिवेशों के न्यायालयों की अपीलें सुनती है। वस्तुतः यह न्यायिक लार्डस की एक समिति है जिसके सदस्य भी वही न्यायाधीश हैं जो ब्रिटिश न्यायालयों की अपीलें सुनते हैं। इसकी कुछ समितियाँ आक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और स्कॉटिश विश्वविद्यालयों तथा नगरपालिका के चार्ट्स पर विचार करती हैं। परन्तु प्रिवी काउन्सिल की सबसे महत्वपूर्ण समिति मंत्रिमंडल ही है।

मंत्रिमंडल का विकास
(Growth of the Cabinet)

मंत्रिमंडल का उद्भव प्रिवी काउन्सिल से हुआ। 1689 में जब चार्ल्स प्रथम के समय से ही प्रिवी काउन्सिल की विस्तृत संख्या के कारण राजा के मुख्य सलाहकारों की समिति अस्तित्व में आई जिसमें प्रिवी काउन्सिल में से राजा के विश्वस्त काउन्सिलर होते थे। इसे 'कैबिनेट काउन्सिल' कहा गया। चार्ल्स द्वितीय ने पाँच प्रमुख विश्वस्त सलाहकारों की समिति को अपनी सहायता के लिए प्रिवी काउन्सिल से मनोनीत किया जिसे कबाल कहा गया। जो उक्त पाँच व्यक्तियों में प्रथम अक्षर से बना था। ये पाँच व्यक्ति थे क्लीफोर्ड एशले बकिंघम, आरलिंगटन एवं लाडरडेल। इस (कबाल ) को मंत्रिमंडल का जनमदाता कहा जा सकता है। यह समिति राजा के प्रति ही उत्तरदायी थी अतः संसद ने इसका विरोध किया। परन्तु इसका विकास होता गया।

सन् 1688 ई. तक संप्रभु अपने सहायकों (मंत्रियों) को अपनी इच्छा से अपने मित्रों व विश्वस्तों में से चुनता था। राजतंत्र की पुनर्स्थापना के बाद 'विलियम एवं मेरी' ने अपने सहायकों का तत्कालीन दो प्रमुख राजनैतिक दलों व्हिग एवं टोरी में से चुनना प्रारंभ किया परंतु इससे समिति में ही मतभेद होने लगें अतः यह तय किया गया कि सारे सहायक (मंत्री) एक ही दल से चुने जायेंगे। 1697 ई. का ब्रिटिश मंत्रिमंडल इस सिद्धांत पर आधारित पहला मंत्रिमंडल था।

पर इस समय तक राजा ही मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है। 1714 में एक ऐतिहासिक संयोग बना जबकि हैनोवर वंश सत्ता में आया और जार्ज प्रथम राजा बना जो अंग्रेजी भाषा और रीति-रिवाजों से अनभिज्ञ थे। अतः उसने अपने मंत्रियों में एक 'सर राबर्ट वालपोल' को मंत्रिमंडल का अध्यक्ष नियुक्त किया जोकि राजा के स्थान पर मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करने लगा। जार्ज द्वितीय के समय भी यही स्थिति रही। इससे प्रधानमंत्री के पद का प्रारंभ हुआ। पर इस समय तक मंत्रिमंडल के निर्णयों पर राजा की सहमति जरूरी था और अक्सर राजा उनकी बात अक्सर नहीं मानता था। पर धीरे-धीरे राजा का प्रभाव बढ़ा और मंत्रिमंडल का प्रभाव कम हुआ।

1721 ई. में सर राबर्ट वालपोल के प्रयासों से यह नियम बना कि मंत्री राजा की अप्रसन्नता के कारण नहीं बल्कि लोक सदन के अविश्वास के आधार पर त्याग पत्र देंगे। इस प्रकार मंत्रिमंडलीय उत्तरदायित्व की प्रथा का प्रारंभ हुआ। जार्ज तृतीय के शासनकाल में कैबिनेट के विकास में बाधा आयी परन्तु 1783 ई. में पिट के नेतृत्व में प्रधानमंत्री के पद को पुनः प्रतिष्ठा प्राप्त हुई 1841 ई. के बाद से मंत्रिमंडल का लोकसदन के प्रति उत्तरदायित्व स्वीकार कर लिया गया। मंत्रियों के लिये संसद का सदस्य होना अनवार्य कर दिया गया।

इस प्रकार मंत्रिमंडलात्मक व्यवस्था ब्रिटेन में क्रमिक विकास का परिणाम है। मंत्रिमंडल का अस्तित्व 18वीं शताब्दी से वहां पर बना हुआ है। सर आइवर जेनिग्स ने इस संदर्भ में टिप्पणी की "यह हमारे संविधान की ही अद्वितीयता है कि मंत्रिमंडल के निर्माण व उसके संचालन के सिद्धांत तथा संसद के साथ उसके संबंध बिना किसी कानून के सन्दर्भ के व्यक्त किये जा सकते हैं।

लगभग दो सौ वर्षों के विकास के बाद एक ब्रिटिश कानून द्वारा 1937 ई. में मंत्रिमंडल को अप्रत्यक्ष मान्यता 'मिनिस्टर्स आफ क्राउन एक्ट के द्वारा स्वीकार किया गया जिसके द्वारा मंत्रियों के वेतन व भत्ते निश्चित किये गये।

मंत्रिपरिषद एवं मंत्रिमंडल (Ministry and Cabinet ) - मंत्रिपरिषद एवं मंत्रिमंडल दोनों शब्द प्रायः समानार्थी रूप में प्रयुक्त किये जाते हैं पर दोनों में सूक्ष्म अंतर है।

मंत्रिपरिषद (Ministry) - के अन्तर्गत राजपद से संबोधित वे सभी अधिकारी आते हैं जो संसद के सदस्य हैं, जो राजनैतिक प्रकृति के पद को धारण किये हैं, जो हाउस ऑफ कामन्स के प्रति उत्तरदायी हैं और उसके द्वारा अविश्वास व्यक्त होने पर मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र दे देते हैं।

मंत्रिमंडल (Cabinet ) - मंत्रिपरिषद का ही एक छोटा भाग है जिसमें मंत्रिपरिषद के वे सदस्य होते हैं जिन्हें प्रधानमंत्री (जोकि मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद दोनों का प्रधान होता है।) चयनित करता है।

मंत्रिपरिषद में वर्तमान समय में ब्रिटेन में लगभग 70-80 सदस्य होते हैं जिसमें कैबिनेट स्तर के मंत्री, अविभागीय मंत्री, राज्य मंत्री, कनिष्ठ मंत्री, लार्ड चांसलर एवं विधि अधिकारी गण, निजी संसदीय सचिव होते हैं जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कार्य करते हैं।

मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री सहित कैबिनेट स्तर के मंत्री आते हैं।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
  2. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन क्षेत्र की विवेचना कीजिए।
  3. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति से आप क्या समझते हैं? इसकी प्रकृति को स्पष्ट कीजिए।
  4. प्रश्न- तुलनात्मक राजनीति और तुलनात्मक सरकार में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  5. प्रश्न- उदार लोकतन्त्र से आप क्या समझते हैं? इसकी विशेषताएँ लिखिए।
  6. प्रश्न- पूँजीवाद से आप क्या समझते हैं, इसके गुण-दोष क्या हैं?
  7. प्रश्न- समाजवादी राज्य क्या है, इसकी कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालिए।
  8. प्रश्न- समाजवाद की परिभाषा दीजिए। विवेचना कीजिए।
  9. प्रश्न- उपनिवेशवाद क्या है? इसकी विशेषताएँ बताइये।
  10. प्रश्न- विकासशील देशों में राज्य की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  11. प्रश्न- रूढ़ियों से क्या अभिप्राय है? इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  12. प्रश्न- रूढ़ियों कानून से किस प्रकार भिन्न हैं? प्रमुख अभिसमयों का वर्णन कीजिए।
  13. प्रश्न- रूढ़ियों का पालन क्यों होता है? स्पष्ट कीजिये।
  14. प्रश्न- राजपद से आपका क्या अभिप्राय है? इसकी शक्तियों की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- राजा एवं राजपद अन्तर को स्पष्ट कीजिये।
  16. प्रश्न- मन्त्रिमण्डलात्मक प्रणाली का उद्भव एवं विकास का वर्णन कीजिए।
  17. प्रश्न- मन्त्रिमंडल के संगठन एवं मंत्रिमण्डल व्यवस्था की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  18. प्रश्न- मन्त्रिमंडल के कार्यों का वर्णन कीजिए।
  19. प्रश्न- बिटिश प्रधानमंत्री सारे शासन तंत्र की धुरी है।' इस कथन की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- ग्रेट ब्रिटेन की सम्प्रभुता की विवेचना कीजिए तथा इस प्रभुसत्ता की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
  21. प्रश्न- लार्ड सभा की रचना कार्यों व उनकी शक्तियों का वर्णन कीजिए।
  22. प्रश्न- इंग्लैंड की समिति प्रणाली के बारे में आप क्या जानते हैं? इसके कितने प्रकार होते हैं?
  23. प्रश्न- कामन्स सभा क्या है? इसके संगठन एवं पदाधिकारियों का वर्णन कीजिए।
  24. प्रश्न- कामन्स सभा की शक्तियों, कार्यों एवं व्यावहारिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
  25. प्रश्न- कामन सभा के स्पीकर एवं उसकी शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  26. प्रश्न- ब्रिटिश समिति व्यवस्था की विवेचना कीजिए।
  27. प्रश्न- ब्रिटेन में विधेयकों का वर्गीकरण कीजिए एवं व्यवस्थापन प्रक्रिया पर प्रकाश डालिये।
  28. प्रश्न- न्यायपालिका से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
  29. प्रश्न- ब्रिटिश न्यायपालिका के संगठन पर प्रकाश डालिए।
  30. प्रश्न- ब्रिटिश न्याय व्यवस्था की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- विधि का शासन ब्रिटिश संविधान का एक विशिष्ट लक्षण है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  32. प्रश्न- राजनीतिक दलों से क्या तात्पर्य है? राजनीतिक दलों की भूमिका एवं महत्व को समझाइये।
  33. प्रश्न- राजनीतिक दल प्रणाली के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
  34. प्रश्न- ब्रिटेन में राजनीतिक दलों के संगठन, कार्यक्रम एवं उनकी भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
  35. प्रश्न- ग्रेट ब्रिटेन में राजनीतिक दलों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  36. प्रश्न- ब्रिटिश दल पद्धति की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  37. प्रश्न- रूढ़ियों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
  38. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के ऐतिहासिक कारणों का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के राजनैतिक कारणों का उल्लेख कीजिए।
  40. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के मनोवैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट कीजिए।
  41. प्रश्न- ब्रिटेन में राजपद के अन्तर्राष्ट्रीय कारणों का वर्णन कीजिए।
  42. प्रश्न- मंत्रिमण्डल की कानूनी स्थिति का वर्णन कीजिए।
  43. प्रश्न- मंत्रिमण्डल की व्यावहारिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
  44. प्रश्न- मंत्रिमण्डल एवं क्राउन के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।
  45. प्रश्न- मन्त्रिमंडल का ब्रिटिश की संवैधानिक व्यवस्था में क्या महत्व है?
  46. प्रश्न- मंत्रिमंडल की महत्ता के औचित्य को स्पष्ट कीजिए।
  47. प्रश्न- मंत्रिमण्डल की महत्ता के कारण बताइये।
  48. प्रश्न- लार्ड सभा ने सुधार के क्या प्रयास किये?
  49. प्रश्न- क्या ग्रेट ब्रिटेन में संसद संप्रभु है?
  50. प्रश्न- 'संसदीय प्रभुता' के सिद्धान्त का मूल्यांकन कीजिए।
  51. प्रश्न- विपक्षी दल की भूमिका का वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- प्रिवी काउन्सिल की न्यायिक समिति का वर्णन कीजिए।
  53. प्रश्न- लार्ड सभा एवं प्रिवी काउन्सिल की न्यायिक समिति में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  54. प्रश्न- ब्रिटिश कानून कितने प्रकार से प्रयोग में लाये जाते हैं?
  55. प्रश्न- राजनीतिक दलों के कार्यों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  56. प्रश्न- राजनीतिक दल मतदाताओं में अपना समर्थन बढाने के लिये कौन-कौन से साधनों का प्रयोग करते हैं।
  57. प्रश्न- ब्रिटेन तथा फ्राँस की दलीय प्रणाली का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए।
  58. प्रश्न- अमेरिका के राष्ट्रपति के कार्यों, शक्तियों की विवेचना कीजिए।
  59. प्रश्न- अमेरिकी राष्ट्रपति की वृद्धि एवं उसके कारणों की विवेचना कीजिये।
  60. प्रश्न- अमेरिकी व ब्रिटिश मंत्रिमंडल की तुलना कीजिए।
  61. प्रश्न- ब्रिटिश संप्रभु (क्राउन) प्रधानमंत्री तथा अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
  62. प्रश्न- अमेरिका के सीनेट के गठन, उसकी शक्ति एवं कार्यों की विवेचना कीजिए।
  63. प्रश्न- प्रतिनिधि सभा के संगठन, शक्ति एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  64. प्रश्न- अमेरिकी कांग्रेस की शक्ति एवं कार्यों का उल्लेख कीजिए।
  65. प्रश्न- अमेरिका का उच्चतम न्यायालय व्यवस्थापिका का तृतीय सदन बनता जा रहा है। स्पष्ट कीजिए।
  66. प्रश्न- सर्वोच्च के महत्व का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  67. प्रश्न- न्यायिक पुनर्निरीक्षण से आप क्या समझते हैं? अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के संदर्भ में इसकी व्याख्या कीजिए।
  68. प्रश्न- सर्वोच्च न्यायालय की कार्य-प्रणाली का विवेचना कीजिए।
  69. प्रश्न- अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के गठन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति में क्या अन्तर है?
  70. प्रश्न- अमेरिका में राजनीतिक दलों के उद्भव एवं विकास का वर्णन कीजिए।
  71. प्रश्न- अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की क्या भूमिका है?
  72. प्रश्न- अमेरिका तथा ब्रिटेन के राजनीतिक दलों की समानता और असमानताओं का वर्णन कीजिए।
  73. प्रश्न- दबाव अथवा हित समूह से आप क्या समझते हैं? दबाव समूह के प्रमुख लक्षण एवं साधनों पर प्रकाश डालिए।
  74. प्रश्न- संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  75. प्रश्न- अमेरिकी राष्ट्रपति को दलीय अथवा राष्ट्रीय नेता के रूप में पर टिप्पणी कीजिए।
  76. प्रश्न- राष्ट्रपति एवं मन्त्रिमण्डल के सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
  77. प्रश्न- जैरीमैण्डरिंग पर संछिप्त टिप्पणी लिखिए।
  78. प्रश्न- सीनेट के महत्व पर प्रकाश डालिये।
  79. प्रश्न- यू. एस. ए. 'सीनेट की शिष्टता' का क्या अर्थ है?
  80. प्रश्न- प्रतिनिधि सभा की दुर्बलता के कारण बताइये।
  81. प्रश्न- संघीय न्यायपालिका कितने प्रकार की होती है?
  82. प्रश्न- संघीय न्यायलय क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
  83. प्रश्न- जिला न्यायालय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  84. प्रश्न- संघीय अपील न्यायालय पर प्रकाश डालिये।
  85. प्रश्न- अमेरिका में राजनीतिक दलों के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
  86. प्रश्न- अमेरिका में राजनीतिक दलों की कमियों का वर्णन कीजिए।
  87. प्रश्न- अमरीका और इंग्लैण्ड की दल- प्रणाली की तुलना कीजिए।
  88. प्रश्न- अमेरिका के राजनीतिक दलों की कार्य प्रणाली का वर्णन कीजिए।
  89. प्रश्न- माओवाद क्या है? माओवाद के प्रमुख सिद्धान्त कौन-कौन से हैं?
  90. प्रश्न- कन्फ्यूशियसवाद क्या है? इसके प्रमुख सिद्धान्त कौन-कौन से हैं?
  91. प्रश्न- चीनी विधानमंडल राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस के गठन, शक्ति एवं कार्यों पर प्रकाश डालिए।
  92. प्रश्न- जनवादी कांग्रेस की स्थायी समिति के बारे में आप क्या जानते हंत उसकी शक्ति एवं कार्यों को स्पष्ट कीजिए।
  93. प्रश्न- स्थायी समिति की शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  94. प्रश्न- जनवादी चीन के राष्ट्रपति के कार्यों एवं अधिकारों की विवेचना कीजिए।
  95. प्रश्न- चीन में न्याय व्यवस्था की प्रमुख विशेषतायें बताते हुये न्यायपालिका के संगठन एवं उसकी शक्तियों का वर्णन कीजिए।
  96. प्रश्न- जनवादी चीन में साम्यवादी दल के संगठन का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- जनवादी चीन में साम्यवादी दल की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  98. प्रश्न- एक देश दो प्रणाली नीति से आप क्या समझते हैं?
  99. प्रश्न- राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस की स्थायी समिति पर टिप्पणी लिखिए।
  100. प्रश्न- राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस की वास्तविक स्थिति का वर्णन कीजिए।
  101. प्रश्न- चीन में कांग्रेस के सदस्यों के अधिकारों एवं दायित्वों की विवेचना कीजिए।
  102. प्रश्न- चीन राज्य परिषद के गठन पर प्रकाश डालिये।
  103. प्रश्न- चीन के सैनिक केन्द्रीय आयोग पर टिप्पणी लिखिए।
  104. प्रश्न- चीन के राज्य परिषद की वास्तविक स्थिति की विवेचना कीजिए।
  105. प्रश्न- चीन के राज्य परिषद की शक्ति एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  106. प्रश्न- जनवादी चीन में प्रोक्यूरेटोरेट पद की व्यवस्था का विवेचना कीजिए।
  107. प्रश्न- स्विट्जरलैण्ड के वर्तमान संविधान की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- स्विट्जरलैण्ड के संविधान की संशोधन प्रकिया का वर्णन कीजिए।
  109. प्रश्न- प्रत्यक्ष लोकतन्त्र से आप क्या समझते हैं? स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष लोकतन्त्र की सफलता के कारणों को इंगित कीजिए।
  110. प्रश्न- स्विट्जरलैण्ड में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली का वर्णन कीजिए।
  111. प्रश्न- स्विट्जरलैंड की कार्यपालिका के बारे में बताइये।
  112. प्रश्न- स्विस व्यवस्थापिका के बारे में बताइये।

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