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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 मनोविज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2789
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 मनोविज्ञान - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में निरीक्षण विधि का विस्तार से वर्णन कीजिए।

सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. निरीक्षण विधि से आप क्या समझते हैं?
2. निरीक्षण विधि के विभिन्न सोपानों का वर्णन कीजिए।
3. प्रेक्षण कितने प्रकार का होता है?
4. प्रेक्षण विधि की उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
5. प्रेक्षण विधि की सीमाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर - 

मानव विकास की निरीक्षण (प्रेक्षण) विधि
(Observation Method of Human Development)

सामाजिक विज्ञानों में अध्ययन के प्रायः प्रयोग की जाने वाली विधि प्रेक्षण या निरीक्षण विधि (Observation method) है। इस विधि के द्वारा विकासात्मक प्रतिमानों का अध्ययन सरलतापूर्वक किया जा सकता है। निरीक्षण विधि को भिन्न-भिन्न विद्वानों ने विभिन्न रूपों में परिभाषित किया है, जिसमें से कुछ प्रमुख परिभाषायें निम्नलिखित हैं-

 

" निरीक्षण से तात्पर्य व्यवहार को उसी रूप में देखने से है, जिस रूप में वह प्रदर्शित हो रहा है।'     -शैफर (Shaffer, 1994)

"प्रेक्षण विधि की अवधारणा से तात्पर्य परिकल्पनाविहीन जाँच, प्राकृतिक परिवेश में घटना का निरीक्षण, शोधकर्ता द्वारा हस्तक्षेप का अभाव, अचयनात्मक रूप में विवरण संग्रह और स्वतन्त्र परिवर्त्यो में प्रहस्तन न करना है।

"The term observation method is often used to refer to hypothesis free inquiry, working at events in natural surrounding, non-intervention by the resercher, unselective recording and avoidance of manipulation of independent variables." -वीक (Weick, 1969)

इस प्रकार स्पष्ट है कि प्रेक्षण विधि के द्वारा विकास या व्यवहार का अध्ययन बालक के प्राकृतिक परिवेश में, ज्यों का त्यों निरीक्षण करके किया जाता है। जैसे घर के भीतर, विद्यालय में या खेल के मैदानों में बालकों के व्यवहारों तथा विकासात्मक प्रतिमानों का निरीक्षण तथा विश्लेषण करके उपयोग निष्कर्ष प्रस्तुत किये जा सकते हैं।

प्रेक्षण विधि के सोपान
(Steps of Observation Method)

प्रेक्षण विधि से अध्ययन करते समय निम्नलिखित सोपानों का प्रयोग किया जाता है-

1. प्रेक्षण योजना (Observation Schedule) - सबसे पहले जिस व्यवहार का निरीक्षण या प्रेक्षण करना होता है उसकी कार्य योजना बनाई जाती है। इसके अन्तर्गत प्रतिदर्श, प्रेक्षण स्थल, उपकरण, व्यवहार अंकण विधि आदि का निर्धारण किया जाता है।

2. व्यवहार का प्रेक्षण (Observation of Behaviour) - प्रेक्षण के इस चरण के अन्तर्गत व्यवहार का निर्धारित कार्य योजना के अनुसार, प्रक्रिया परिवेश में निरीक्षण किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर कैमरा आदि का भी प्रयोग किया जा सकता है।

3. व्यवहार का अंकण (Recording of Behaviour) - प्रेक्षण से प्राप्त सूचनाओं का पूर्व निर्धारित तथा तात्कालिक उद्देश्यों के अनुरूप अंकण किया जाता है। इस कार्य के लिये भी आवश्यकतानुसार कैमरा आदि का प्रयोग किया जाता है।

4. सारणीयन एवं विश्लेषण (Tabulation and Analysis) - यदि सूचनायें मात्रात्मक हैं तो उन्हें सारणीबद्ध कर दिया जाता है। इसके पश्चात् सूचनाओं का विश्लेषण किया जाता है ।

5. व्याख्यात्मक निष्कर्ष (Interpretation and Conclusion ) - प्राप्त सूचनाओं तथा प्रदत्तों के विश्लेषण से जो परिणाम मिलते हैं उनकी यथोचित व्याख्या की जाती है और व्यवहार एवं विकास के बारे में निष्कर्ष एवं अनुवाद आदि प्रस्तुत किये जाते हैं।

प्रेक्षण के प्रकार
(Types of Observation)

प्रेक्षण निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-

1. अनियंत्रित प्रेक्षण (Uncontrolled Observation ) - इस विधि में अध्ययनकर्ता व्यवहार का अध्ययन क्रमबद्ध रूप में तो करता है. परन्तु परिस्थिति में कोई परिवर्तन या नियंत्रण नहीं करता है । अनियंत्रित प्रेक्षण विभिन्न प्रकार से किया जाता है जैसे- प्रतिदिन प्रेक्षण, परिस्थितिजन्य प्रतिदर्श प्रेक्षण, खेल तकनीकि प्रेक्षण, समय प्रतिदर्श प्रेक्षण आदि । इस प्रकार के प्रेक्षण में अध्ययनकर्ता प्रयोज्य या प्रतिदर्श के व्यवहार का निरीक्षण प्राकृतिक एवं स्वाभाविक परिस्थितियों में करता है।

2. नियंत्रित प्रेक्षण (Controlled Observation) - नियन्त्रित प्रेक्षण का विकास के अध्ययन में विशेष महत्व है। इस प्रकार के प्रेक्षण में परिस्थितियों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि बालक के व्यवहार में इसका प्रभाव न पड़ने पाये और व्यवहार का प्रदर्शन बराबर बिना बाधा के होता रहे और उस पर प्रायोगिक विधि की कृत्तिमता का भी प्रभाव नहीं पड़ता है। वाटसन (1925), गेसेल (1932, 35), बुलहर (1930), लुमिस (1931) तक बारकर (1930) आदि ने इस विधि का प्रयोग अपने अध्ययन में व्यापक रूप में किया है।

प्रेक्षण विधि की उपयोगिता
(Utility of Observation Method)

प्रेक्षण विधि की उपयोगिता निम्नलिखित है-

1. व्यवहार का प्रेक्षण पूर्णतः स्वाभाविक परिस्थितियों में किया जाता है। इसमें कृत्रिमता नहीं होती है।

2. अध्ययन की योजना बनाने के लिए यह एक अत्यन्त उपयोगी विधि है।
3. इस विधि में परिस्थितियों को व्यवस्थित करके ठोस परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं ।
4. प्रेक्षकों की संख्या में वृद्धि करके परिणामों को विश्वसनीय बनाया जा सकता है।
5. बड़े प्रतिदर्श का अध्ययन करके परिणामों की विश्वसनीयता को बढ़ाया जा सकता है।
6. विधिवत् प्रेक्षण करके सूक्ष्म परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं ।

7. प्रेक्षण विधि के द्वारा कारण तथा प्रभाव के सम्बन्ध को ज्ञात किया जा सकता है। प्रेक्षण विधि की सीमायें

(Limitations of Observation Method)
प्रेक्षण विधि की सीमाएँ निम्नलिखित हैं-

1. यदि प्रेक्षण सूक्ष्मता से न किया जाय तो प्राप्त परिणामों की विश्वसनीयता संदिग्ध होती है।

2. अध्ययनकर्ता के विचारों से प्रभावित होने के कारण निष्कर्ष आत्मनिष्ठ होते हैं ।

3. अलग-अलग निरीक्षणकर्ता एक ही घटना की अलग-अलग व्याख्या कर सकते हैं।

4. इस विधि में यदि प्रेक्षक निष्क्रिय रहता है तो निष्क्रिया के कारण प्रदत्त संग्रह पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है ।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- मानव विकास को परिभाषित करते हुए इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रश्न- विकास सम्प्रत्यय की व्याख्या कीजिए तथा इसके मुख्य नियमों को समझाइए।
  3. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में अनुदैर्ध्य उपागम का वर्णन कीजिए तथा इसकी उपयोगिता व सीमायें बताइये।
  4. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में प्रतिनिध्यात्मक उपागम का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में निरीक्षण विधि का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  6. प्रश्न- व्यक्तित्व इतिहास विधि के गुण व सीमाओं को लिखिए।
  7. प्रश्न- मानव विकास में मनोविज्ञान की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  8. प्रश्न- मानव विकास क्या है?
  9. प्रश्न- मानव विकास की विभिन्न अवस्थाएँ बताइये।
  10. प्रश्न- मानव विकास को प्रभावित करने वाले तत्वों का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- मानव विकास के अध्ययन की व्यक्ति इतिहास विधि का वर्णन कीजिए
  12. प्रश्न- विकासात्मक अध्ययनों में वैयक्तिक अध्ययन विधि के महत्व पर प्रकाश डालिए?
  13. प्रश्न- चरित्र-लेखन विधि (Biographic method) पर प्रकाश डालिए ।
  14. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में सीक्वेंशियल उपागम की व्याख्या कीजिए ।
  15. प्रश्न- प्रारम्भिक बाल्यावस्था के विकासात्मक संकृत्य पर टिप्पणी लिखिये।
  16. प्रश्न- गर्भकालीन विकास की विभिन्न अवस्थाएँ कौन-सी है ? समझाइए ।
  17. प्रश्न- गर्भकालीन विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक कौन-से है। विस्तार में समझाइए।
  18. प्रश्न- नवजात शिशु अथवा 'नियोनेट' की संवेदनशीलता का उल्लेख कीजिए।
  19. प्रश्न- क्रियात्मक विकास से आप क्या समझते है ? क्रियात्मक विकास का महत्व बताइये ।
  20. प्रश्न- क्रियात्मक विकास की विशेषताओं पर टिप्पणी कीजिए।
  21. प्रश्न- क्रियात्मक विकास का अर्थ एवं बालक के जीवन में इसका महत्व बताइये ।
  22. प्रश्न- संक्षेप में बताइये क्रियात्मक विकास का जीवन में क्या महत्व है ?
  23. प्रश्न- क्रियात्मक विकास को प्रभावित करने वाले तत्व कौन-कौन से है ?
  24. प्रश्न- क्रियात्मक विकास को परिभाषित कीजिए।
  25. प्रश्न- प्रसवपूर्व देखभाल के क्या उद्देश्य हैं ?
  26. प्रश्न- प्रसवपूर्व विकास क्यों महत्वपूर्ण है ?
  27. प्रश्न- प्रसवपूर्व विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं ?
  28. प्रश्न- प्रसवपूर्व देखभाल की कमी का क्या कारण हो सकता है ?
  29. प्रश्न- प्रसवपूर्ण देखभाल बच्चे के पूर्ण अवधि तक पहुँचने के परिणाम को कैसे प्रभावित करती है ?
  30. प्रश्न- प्रसवपूर्ण जाँच के क्या लाभ हैं ?
  31. प्रश्न- विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन हैं ?
  32. प्रश्न- नवजात शिशु की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करो।
  33. प्रश्न- शैशवावस्था में (0 से 2 वर्ष तक) शारीरिक विकास एवं क्रियात्मक विकास के मध्य अन्तर्सम्बन्धों की चर्चा कीजिए।
  34. प्रश्न- नवजात शिशु की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- शैशवावस्था में बालक में सामाजिक विकास किस प्रकार होता है?
  36. प्रश्न- शिशु के भाषा विकास की विभिन्न अवस्थाओं की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
  37. प्रश्न- शैशवावस्था क्या है?
  38. प्रश्न- शैशवावस्था में संवेगात्मक विकास क्या है?
  39. प्रश्न- शैशवावस्था की विशेषताएँ क्या हैं?
  40. प्रश्न- शिशुकाल में शारीरिक विकास किस प्रकार होता है?
  41. प्रश्न- शैशवावस्था में सामाजिक विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
  42. प्रश्न- सामाजिक विकास से आप क्या समझते है ?
  43. प्रश्न- सामाजिक विकास की अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं ?
  44. प्रश्न- संवेग क्या है? बालकों के संवेगों का महत्व बताइये ।
  45. प्रश्न- बालकों के संवेगों की विशेषताएँ बताइये।
  46. प्रश्न- बालकों के संवेगात्मक व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं? समझाइये |
  47. प्रश्न- संवेगात्मक विकास को समझाइए ।
  48. प्रश्न- बाल्यावस्था के कुछ प्रमुख संवेगों का वर्णन कीजिए।
  49. प्रश्न- बालकों के जीवन में नैतिक विकास का महत्व क्या है? समझाइये |
  50. प्रश्न- नैतिक विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक कौन-से हैं? विस्तार पूर्वक समझाइये?
  51. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास क्या है? बाल्यावस्था में संज्ञानात्मक विकास किस प्रकार होता है?
  53. प्रश्न- बाल्यावस्था क्या है?
  54. प्रश्न- बाल्यावस्था की विशेषताएं बताइयें ।
  55. प्रश्न- बाल्यकाल में शारीरिक विकास किस प्रकार होता है?
  56. प्रश्न- सामाजिक विकास की विशेषताएँ बताइये।
  57. प्रश्न- संवेगात्मक विकास क्या है?
  58. प्रश्न- संवेग की क्या विशेषताएँ होती है?
  59. प्रश्न- बाल्यावस्था में संवेगात्मक विकास की विशेषताएँ क्या है?
  60. प्रश्न- कोहलबर्ग के नैतिक सिद्धान्त की आलोचना कीजिये।
  61. प्रश्न- पूर्व बाल्यावस्था में बच्चे अपने क्रोध का प्रदर्शन किस प्रकार करते हैं?
  62. प्रश्न- बालक के संज्ञानात्मक विकास से आप क्या समझते हैं?
  63. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास की विशेषताएँ क्या हैं?
  64. प्रश्न- किशोरावस्था की परिभाषा देते हुये उसकी अवस्थाएँ लिखिए।
  65. प्रश्न- किशोरावस्था में यौन शिक्षा पर एक निबन्ध लिखिये।
  66. प्रश्न- किशोरावस्था की प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डालिये।
  67. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास से आप क्या समझते हैं? किशोरावस्था में संज्ञानात्मक विकास किस प्रकार होता है एवं किशोरावस्था में संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का उल्लेख कीजिए?
  68. प्रश्न- किशोरावस्था में संवेगात्मक विकास का वर्णन कीजिए।
  69. प्रश्न- नैतिक विकास से आप क्या समझते हैं? किशोरावस्था के दौरान नैतिक विकास की विवेचना कीजिए।
  70. प्रश्न- किशोरवस्था में पहचान विकास से आप क्या समझते हैं?
  71. प्रश्न- किशोरावस्था को तनाव या तूफान की अवस्था क्यों कहा गया है?
  72. प्रश्न- अनुशासन युवाओं के लिए क्यों आवश्यक होता है?
  73. प्रश्न- किशोरावस्था से क्या आशय है?
  74. प्रश्न- किशोरावस्था में परिवर्तन से सम्बन्धित सिद्धान्त कौन-से हैं?
  75. प्रश्न- किशोरावस्था की प्रमुख सामाजिक समस्याएँ लिखिए।
  76. प्रश्न- आत्म विकास में भूमिका अर्जन की क्या भूमिका है?
  77. प्रश्न- स्व-विकास की कोई दो विधियाँ लिखिए।
  78. प्रश्न- किशोरावस्था में पहचान विकास क्या हैं?
  79. प्रश्न- किशोरावस्था पहचान विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समय क्यों है ?
  80. प्रश्न- पहचान विकास इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
  81. प्रश्न- एक किशोर के लिए संज्ञानात्मक विकास का क्या महत्व है?
  82. प्रश्न- प्रौढ़ावस्था से आप क्या समझते हैं? प्रौढ़ावस्था में विकासात्मक कार्यों का वर्णन कीजिए।
  83. प्रश्न- वैवाहिक समायोजन से क्या तात्पर्य है ? विवाह के पश्चात् स्त्री एवं पुरुष को कौन-कौन से मुख्य समायोजन करने पड़ते हैं ?
  84. प्रश्न- एक वयस्क के कैरियर उपलब्धि की प्रक्रिया और इसमें शामिल विभिन्न समायोजन को किस प्रकार व्याख्यायित किया जा सकता है?
  85. प्रश्न- जीवन शैली क्या है? एक वयस्क की जीवन शैली की विविधताओं का वर्णन कीजिए।
  86. प्रश्न- 'अभिभावकत्व' से क्या आशय है?
  87. प्रश्न- अन्तरपीढ़ी सम्बन्ध क्या है?
  88. प्रश्न- विविधता क्या है ?
  89. प्रश्न- स्वास्थ्य मनोविज्ञान में जीवन शैली क्या है?
  90. प्रश्न- लाइफस्टाइल साइकोलॉजी क्या है ?
  91. प्रश्न- कैरियर नियोजन से आप क्या समझते हैं?
  92. प्रश्न- युवावस्था का मतलब क्या है?
  93. प्रश्न- कैरियर विकास से क्या ताप्पर्य है ?
  94. प्रश्न- मध्यावस्था से आपका क्या अभिप्राय है ? इसकी विभिन्न विशेषताएँ बताइए।
  95. प्रश्न- रजोनिवृत्ति क्या है ? इसका स्वास्थ्य पर प्रभाव एवं बीमारियों के संबंध में व्याख्या कीजिए।
  96. प्रश्न- मध्य वयस्कता के दौरान होने बाले संज्ञानात्मक विकास को किस प्रकार परिभाषित करेंगे?
  97. प्रश्न- मध्यावस्था से क्या तात्पर्य है ? मध्यावस्था में व्यवसायिक समायोजन को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डालिए।
  98. प्रश्न- मिडलाइफ क्राइसिस क्या है ? इसके विभिन्न लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
  99. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था में स्वास्थ्य पर टिप्पणी लिखिए।
  100. प्रश्न- स्वास्थ्य के सामान्य नियम बताइये ।
  101. प्रश्न- मध्य वयस्कता के कारक क्या हैं ?
  102. प्रश्न- मध्य वयस्कता के दौरान कौन-सा संज्ञानात्मक विकास होता है ?
  103. प्रश्न- मध्य वयस्कता में किस भाव का सबसे अधिक ह्रास होता है ?
  104. प्रश्न- मध्यवयस्कता में व्यक्ति की बुद्धि का क्या होता है?
  105. प्रश्न- मध्य प्रौढ़ावस्था को आप किस प्रकार से परिभाषित करेंगे?
  106. प्रश्न- प्रौढ़ावस्था के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष के आधार पर दी गई अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
  107. प्रश्न- मध्यावस्था की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- क्या मध्य वयस्कता के दौरान मानसिक क्षमता कम हो जाती है ?
  109. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था (50-60) वर्ष में मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक समायोजन पर संक्षेप में प्रकाश डालिये।
  110. प्रश्न- उत्तर व्यस्कावस्था में कौन-कौन से परिवर्तन होते हैं तथा इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप कौन-कौन सी रुकावटें आती हैं?
  111. प्रश्न- पूर्व प्रौढ़ावस्था की प्रमुख विशेषताओं के बारे में लिखिये ।
  112. प्रश्न- वृद्धावस्था में नाड़ी सम्बन्धी योग्यता, मानसिक योग्यता एवं रुचियों के विभिन्न परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
  113. प्रश्न- सेवा निवृत्ति के लिए योजना बनाना क्यों आवश्यक है ? इसके परिणामों की चर्चा कीजिए।
  114. प्रश्न- वृद्धावस्था की विशेषताएँ लिखिए।
  115. प्रश्न- वृद्धावस्था से क्या आशय है ? संक्षेप में लिखिए।
  116. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था (50-60 वर्ष) में हृदय रोग की समस्याओं का विवेचन कीजिए।
  117. प्रश्न- वृद्धावस्था में समायोजन को प्रभावित करने वाले कारकों को विस्तार से समझाइए ।
  118. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था में स्वास्थ्य पर टिप्पणी लिखिए।
  119. प्रश्न- स्वास्थ्य के सामान्य नियम बताइये ।
  120. प्रश्न- रक्तचाप' पर टिप्पणी लिखिए।
  121. प्रश्न- आत्म अवधारणा की विशेषताएँ क्या हैं ?
  122. प्रश्न- उत्तर प्रौढ़ावस्था के कुशल-क्षेम पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
  123. प्रश्न- संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  124. प्रश्न- जीवन प्रत्याशा से आप क्या समझते हैं ?
  125. प्रश्न- अन्तरपीढ़ी सम्बन्ध क्या है?
  126. प्रश्न- वृद्धावस्था में रचनात्मक समायोजन पर टिप्पणी लिखिए।
  127. प्रश्न- अन्तर पीढी सम्बन्धों में तनाव के कारण बताओ।

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