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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 इतिहास - भारत में राष्ट्रवाद

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :128
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2786
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 इतिहास - भारत में राष्ट्रवाद - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- उग्रवादी तथा उदारवादी विचारधारा में अंतर बताइए।

उत्तर -

सन् 1885-1905 ई. तक कांग्रेस की कार्यप्रणाली व इसका प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं की विचारधारा एवं कार्यशैली के आधार पर इस अवधि को कांग्रेस के उदारवादी युग की संज्ञा दी जाती है। इस चरण में आन्दोलन का नेतृत्व मुख्यतया उदारवादी नेताओं के हाथों में रहा। इनमें दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, दिनशा वाचा, डब्ल्यू. सी. बैनर्जी, एस.एन. बैनर्जी, रासबिहारी घोष, आर. सी. दत्त, बदरुद्दीन तैय्यबजी, गोपालकृष्ण गोखले, आनन्द चालू, मदनमोहन मालवीय इत्यादि प्रमुख थे। ये नेता उदारवादी नीतियों एवं अहिंसक विरोध प्रदर्शन में विश्वास रखते थे। इनकी यह विशेषता इन्हें 20वीं शताब्दी के प्रथम दशक में उभरने वाले जिन्हें उग्रवादी कहते थे से पृथक करती है।

उदारवादी कानून के दायरे में रहकर अहिंसक एवं संवैधानिक प्रदर्शनों के पक्षधर थे। यद्यपि उदारवादियों की यह नीति अत्यन्त धीमी थी किन्तु इससे क्रमबद्ध राजनैतिक विकास की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। उदारवादियों का मत था कि अंग्रेज भारतीयों को शिक्षित बनाना चाहते हैं तथा वे भारतीयों की वास्तविक समस्याओं से बेखबर नहीं हैं। अतः यदि सर्वसम्मति से सभी देशवासी प्रार्थना पत्रों याचिकाओं एवं सभाओं इत्यादि के माध्यम से सरकार से अनुरोध करें तो सरकार धीरे-धीरे उनकी माँगें स्वीकार कर लेगी। अपने इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उदारवादियों ने दो प्रकार की नीतियों का अनुसरण किया। पहला भारतीयों में राष्ट्रप्रेम एवं चेतना जागृत कर राजनीतिक मुद्दों पर उन्हें शिक्षित करना एवं उनमें एकता स्थापित करना, दूसरा ब्रिटिश जनमत एवं ब्रिटिश सरकार को भारतीय पक्ष में करके भारत में सुधारों की प्रक्रिया प्रारम्भ करना।

उदारवादियों की अनुनय-विनय की नीति से ब्रिटिश सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वे शासन में मनमानी करते रहे इसके प्रतिक्रियास्वरूप इस भावना का जन्म हुआ कि स्वराज्य माँगने से नहीं अपितु संघर्ष से प्राप्त होगा। संवैधानिक आन्दोलनों से भारतीयों का विश्वास उठ गया। अतः संघर्ष द्वारा स्वतंत्रता प्राप्त करने की जिस भावना का जन्म हुआ उसे ही उग्र राष्ट्रवाद की भावना कहते हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का यह दल इसी भावना का ध्येय स्वराज्य होना चाहिए न कि स्वशासन जिसे वे आत्म विश्वास या आत्मनिर्भरता से प्राप्त करें, न कि भिक्षा माँगने, प्रार्थना करने या याचिका देने से। बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, विपिन चन्दपाल ने इस उग्रवादी दल का नेतृत्व किया।

अंग्रेजी राज्य के सही स्वरूप की पहचान उग्रवादियों ने की। अंग्रेजों द्वारा कांग्रेस के प्रार्थना पत्रों एवं भागों पर ध्यान न दिये जाने के कारण राजनीतिक रूप से जागृत कांग्रेस का एक वर्ग असन्तुष्ट हो गया तथा वह राजनीतिक आन्दोलन का कोई दूसरा रास्ता अपनाने पर विचार करने लगा। इनको विश्वास था कि स्वशासन ही भारत के विकास एवं आत्म-निर्भरता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। ब्रिटिश सरकार की आर्थिक शोषण की नीति ने देश को विपन्नता के कगार पर पहुँचा दिया था। ब्रिटिश सरकार भारतीयों को अधिक अधिकार देने के स्थान पर वर्तमान अधिकारों को भी वापस लेने का कुत्सित प्रयास कर रही है। उदारवादियों एवं उग्रवादी विचारधारा में निम्न अंतर है-

(1) उदारवादियों का सामाजिक आधार जमींदार एवं शहरी उच्च मध्यमवर्गीय लोगों के बीच रहा। ये जनसामान्य से जुड़ने का प्रयास नहीं किये जबकि उग्रवादी दल का सामाजिक आधार शहरों के शिक्षित एवं निम्न मध्यमवर्गीय लोगों के बीच रहा।

(2) उदारवादियों का सैद्धान्तिक प्रेरणास्रोत पाश्चात्य उदार विचार एवं यूरोपीय इतिहास रहा है जबकि उग्रवादियों का सैद्धान्तिक प्रेरणास्रोत भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत तथा परम्परागत हिन्दू मूल्य रहा है।

(3) उदारवादी ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास करते थे। अतः इनकी नीतियों में ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठा की नीति का प्रमुख स्थान रहा। उदारवादियों के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति कृतज्ञता के भाव थे क्योंकि वे मानते थे कि अंग्रेजी शासन के कारण ही भारत में शान्ति की स्थापना हुई है और प्रगतिशील विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस सन्दर्भ में डब्लू. सी. बैनर्जी के वक्तव्य का विशेष रूप से उल्लेख किया जा सकता है- "मैं कहता हूँ कि ब्रिटिश सरकार को मेरे और यहाँ बैठे हुए मेरे दोस्तों की अपेक्षा अधिक गहरे व पक्के राजभक्त मिलना असम्भव है।" जबकि उग्रवादियों को ब्रिटिश न्यायप्रियता में कोई विश्वास या निष्ठा नहीं था।

(4) उदारवादियों को विश्वास था कि ब्रिटेन के साथ राजनैतिक संबंध भारत के सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक हितों के लिए लाभप्रद होगा किन्तु उग्रवादियों का मानना था कि ब्रिटेन के साथ राजनैतिक संबंध रहने से भारत का आर्थिक शोषण जारी रहेगा। उदारवादी नेता किसी भी प्रकार ब्रिटेन से संबंध विच्छेद करने के पक्ष में नहीं थे। वे ब्रिटिश संबंध को भारतीयों के लिए वरदान स्वरूप मानते थे। उनका मानना था कि इसी के परिणामस्वरूप भारत में प्रगतिशील सभ्यता का उदय हुआ। अंग्रेजी साहित्य, शिक्षा पद्धति, आवागमन के साधन, न्याय प्रणाली, स्थानीय स्वशासन इत्यादि अंग्रेजों की ओर से भारतीयों की अमूल्य देन है। गोपालकृष्ण गोखले ने कहा था- "हमारा भाग्य अंग्रेजों के साथ मिला हुआ है चाहे वह अच्छे के लिए हो या बुरे के लिए।"

(5) ब्रिटिश ताज के प्रति उदारवादी पूर्ण निष्ठावान थे जबकि उग्रवादी दल का विश्वास था कि ब्रिटिश ताज भारतीय निष्ठा के प्रति अयोग्य है। उदारवादी युग में कांग्रेसी नेता ब्रिटिश सरकार के प्रति अत्यधिक निष्ठावान थे। वे ब्रिटिश शासन के अत्यधिक प्रशंसक थे।

(6) उदारवादियों का मानना था कि सरकार विरोधी आन्दोलन मध्यवर्गीय शिक्षित वर्ग तक ही सीमित रहना चाहिए क्योंकि जनसामान्य अभी राजनीतिक कार्यों में सक्रिय भागेदारी निभाने के लिए तैयार नहीं है। जबकि उग्रवादियों को जनसामान्य की शक्ति एवं त्याग की भावना में पूर्ण निष्ठा थी।

(7) उदारवादी सरकारी सेवाओं में भारतीयों की सहभागिता बढ़ाने एवं संवैधानिक सुधारों की माँग की किन्तु उग्रवादियों ने भारतीय दुर्दशा को दूर करने हेतु स्वराज्य की माँग की।

(8) उदारवादी केवल संवैधानिक दायरे में रहकर लक्ष्य पाने में विश्वास रखते थे जबकि उग्रवादी आवश्यकता पड़ने पर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए असंवैधानिक तरीकों जैसे बहिष्कार एवं अहिंसात्मक प्रतिरोध से परहेज नहीं करते थे।

(9) उदारवादी पाश्चात्य शिक्षा एवं सभ्यता के प्रबल समर्थक थे जबकि उग्रवादी भारतीय समारोहों के आयोजन तथा प्रेस, शिक्षा एवं भारतीय साहित्य के समर्थक थे।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- 1857 के विद्रोह के कारणों की समीक्षा कीजिए।
  2. प्रश्न- 1857 के विद्रोह के स्वरूप पर एक निबन्ध लिखिए। उनके परिणाम क्या रहे?
  3. प्रश्न- सन् 1857 ई. की क्रान्ति के प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
  4. प्रश्न- सन् 1857 ई. के विद्रोह का दमन करने में अंग्रेज किस प्रकार सफल हुए, वर्णन कीजिये?
  5. प्रश्न- सन् 1857 ई० की क्रान्ति के परिणामों की विवेचना कीजिये।
  6. प्रश्न- 1857 ई० के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए।
  7. प्रश्न- 1857 के विद्रोह की असफलता के क्या कारण थे?
  8. प्रश्न- 1857 के विद्रोह में प्रशासनिक और आर्थिक कारण कहाँ तक उत्तरदायी थे? स्पष्ट कीजिए।
  9. प्रश्न- 1857 ई० के विद्रोह के राजनीतिक एवं सामाजिक कारणों का वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- 1857 के विद्रोह ने राष्ट्रीय एकता को किस प्रकार पुष्ट किया?
  11. प्रश्न- बंगाल में 1857 की क्रान्ति की प्रकृति का वर्णन कीजिए।
  12. प्रश्न- 1857 के विद्रोह के लिए लार्ड डलहौजी कहां तक उत्तरदायी था? स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- सन् 1857 ई. के विद्रोह के राजनीतिक कारण बताइये।
  14. प्रश्न- सन् 1857 ई. की क्रान्ति के किन्हीं तीन आर्थिक कारणों का उल्लेख कीजिये।
  15. प्रश्न- सन् 1857 ई. की क्रान्ति में तात्याटोपे के योगदान का विवेचन कीजिये।
  16. प्रश्न- सन् 1857 ई. के महान विद्रोह में जमींदारों की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
  17. प्रश्न- सन् 1857 ई. के विद्रोह के यथार्थ स्वरूप को संक्षिप्त में बताइये।
  18. प्रश्न- सन् 1857 ई. के झाँसी के विद्रोह का अंग्रेजों ने किस प्रकार दमन किया, वर्णन कीजिये?
  19. प्रश्न- सन् 1857 ई. के विप्लव में नाना साहब की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  20. प्रश्न- प्रथम स्वाधीनता संग्राम के परिणामों एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
  21. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रवाद के प्रारम्भिक चरण में जनजातीय विद्रोहों की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
  22. प्रश्न- भारत में मध्यम वर्ग के उदय के कारणों पर प्रकाश डालिए। भारतीय राष्ट्रवाद के प्रसार में मध्यम वर्ग की क्या भूमिका रही?
  23. प्रश्न- भारत में कांग्रेस के पूर्ववर्ती संगठनों व इसके कार्यों पर प्रकाश डालिए।
  24. प्रश्न- भारत में क्रान्तिकारी राष्ट्रवाद के उदय में 'बंगाल विभाजन' की घटना का क्या योगदान रहा? भारत में क्रान्तिकारी आन्दोलन के प्रारम्भिक इतिहास का उल्लेख कीजिए।
  25. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदय की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कांग्रेस की स्थापना के उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।
  26. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के प्रारम्भिक वर्षों में कांग्रेस की नीतियाँ क्या थी? सविस्तार उल्लेख कीजिए।
  27. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उग्रपंथियों के उदय के क्या कारण थे?
  28. प्रश्न- उग्रपंथियों द्वारा किन साधनों को अपनाया गया? सविस्तार समझाइए।
  29. प्रश्न- भारत में मध्यमवर्गीय चेतना के अग्रदूतों में किन महापुरुषों को माना जाता है? इनका भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन व राष्ट्रवाद में क्या योगदान रहा?
  30. प्रश्न- गदर पार्टी आन्दोलन (1915 ई.) पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  31. प्रश्न- कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में कांग्रेस के द्वारा घोषित किये गये उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
  32. प्रश्न- कांग्रेस सच्चे अर्थों में राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व करती थी, स्पष्ट कीजिये।
  33. प्रश्न- जनजातियों में ब्रिटिश शासन के प्रति असन्तोष का सर्वप्रमुख कारण क्या था?
  34. प्रश्न- महात्मा गाँधी के प्रमुख विचारों पर प्रकाश डालते हुए उनके भारतीय राजनीति में पदार्पण को 'चम्पारण सत्याग्रह' के विशेष सन्दर्भ में उल्लिखित कीजिए।
  35. प्रश्न- राष्ट्रीय आन्दोलन में महात्मा गाँधी की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  36. प्रश्न- असहयोग आन्दोलन के प्रारम्भ होने प्रमुख कारणों की सविस्तार विवेचना कीजिए।
  37. प्रश्न- 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन का प्रारम्भ कब और किस प्रकार हुआ? सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कार्यक्रम पर प्रकाश डालिए।
  38. प्रश्न- 'भारत छोड़ो आन्दोलन' के प्रारम्भ होने के प्रमुख कारणों की सविस्तार विवेचना कीजिए।
  39. प्रश्न- राष्ट्रीय आन्दोलन में टैगोर की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  40. प्रश्न- राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद पर टैगोर तथा गाँधी जी के विचारों की तुलना कीजिए।
  41. प्रश्न- 1885 से 1905 के की भारतीय राष्ट्रवाद के विकास का पुनरावलोकन कीजिए।
  42. प्रश्न- महात्मा गाँधी द्वारा 'खिलाफत' जैसे धार्मिक आन्दोलन का समर्थन किन आधारों पर किया गया था?
  43. प्रश्न- 'बारडोली सत्याग्रह' पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- गाँधी-इरविन समझौता (1931 ई.) पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- 'खेड़ा सत्याग्रह' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  46. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारपंथी चरण के विषय में बताते हुए उदारवादियों की प्रमुख नीतियों का उल्लेख कीजिये।
  47. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारपंथी चरण की सफलताओं एवं असफलताओं का उल्लेख कीजिए।
  48. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उग्रपंथियों के उदय के क्या कारण थे?
  49. प्रश्न- उग्रपंथियों द्वारा पूर्ण स्वराज्य के लिए किन साधनों को अपनाया गया? सविस्तार समझाइए।
  50. प्रश्न- उग्रवादी तथा उदारवादी विचारधारा में अंतर बताइए।
  51. प्रश्न- बाल -गंगाधर तिलक के स्वराज और राज्य संबंधी विचारों का वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- प्रारम्भ में कांग्रेस के क्या उद्देश्य थे? इसकी प्रारम्भिक नीति को उदारवादी नीति क्यों कहा जाता है? इसका परित्याग करके उग्र राष्ट्रवाद की नीति क्यों अपनायी गयी?
  53. प्रश्न- उदारवादी युग में कांग्रेस के प्रति सरकार का दृष्टिकोण क्या था?
  54. प्रश्न- भारत में लॉर्ड कर्जन की प्रतिक्रियावादी नीतियों ने किस प्रकार उग्रपंथी आन्दोलन के उदय व विकास को प्रेरित किया?
  55. प्रश्न- उदारवादियों की सीमाएँ एवं दुर्बलताएँ संक्षेप में लिखिए।
  56. प्रश्न- उग्रवादी आन्दोलन का मूल्यांकन कीजिए।
  57. प्रश्न- भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के 'नरमपन्थियों' और 'गरमपन्थियों' में अन्तर लिखिए।
  58. प्रश्न- स्वदेशी आन्दोलन पर विस्तृत विवेचना कीजिए।
  59. प्रश्न- कांग्रेस के सूरत विभाजन पर प्रकाश डालिए।
  60. प्रश्न- अखिल भारतीय काँग्रेस (1907 ई.) में 'सूरत की फूट' के कारणों एवं परिस्थितियों का विवरण दीजिए।
  61. प्रश्न- कांग्रेस में 'सूरत फूट' की घटना पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  62. प्रश्न- स्वदेशी आन्दोलन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  63. प्रश्न- कांग्रेस की स्थापना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  64. प्रश्न- स्वदेशी आन्दोलन की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
  65. प्रश्न- स्वदेशी विचार के विकास का वर्णन कीजिए।
  66. प्रश्न- स्वदेशी आन्दोलन के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
  67. प्रश्न- स्वराज्य पार्टी की स्थापना किन कारणों से हुई?
  68. प्रश्न- स्वराज्य पार्टी के पतन के प्रमुख कारणों को बताइए।
  69. प्रश्न- कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में कांग्रेस के द्वारा घोषित किये गये उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
  70. प्रश्न- कांग्रेस सच्चे अर्थों में राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व करती थी, स्पष्ट कीजिये।
  71. प्रश्न- दाण्डी यात्रा का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
  72. प्रश्न- मुस्लिम लीग की स्थापना एवं नीतियों पर प्रकाश डालिए।
  73. प्रश्न- मुस्लिम लीग साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए कहाँ तक उत्तरदायी थी? स्पष्ट कीजिए।
  74. प्रश्न- साम्प्रदायिक राजनीति के उत्पत्ति में ब्रिट्रिश एवं मुस्लिम लीग की भूमिका की विवेचना कीजिये।
  75. प्रश्न- मुहम्मद अली जिन्ना द्वारा मुस्लिम लीग को किस प्रकार संगठित किया गया?
  76. प्रश्न- लाहौर प्रस्ताव' क्या था? भारत के विभाजन में इसकी क्या भूमिका रही?
  77. प्रश्न- मुहम्मद अली जिन्ना ने किस प्रकार भारत विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार की?
  78. प्रश्न- मुस्लिम लीग के उद्देश्य बताइये। इसका भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम पर क्या प्रभाव पड़ा?
  79. प्रश्न- मुहम्मद अली जिन्ना के राजनीतिक विचारों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  80. प्रश्न- मुस्लिम लीग तथा हिन्दू महासभा जैसे राजनैतिक दलों ने खिलाफत आन्दोलन का विरोध क्यों किया था?
  81. प्रश्न- प्रथम विश्व युद्ध के क्या कारण थे?
  82. प्रश्न- प्रथम विश्व युद्ध के क्या परिणाम हुए?
  83. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन पर प्रथम विश्व युद्ध का क्या प्रभाव पड़ा, संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
  84. प्रश्न- प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उत्पन्न हुए होमरूल आन्दोलन पर प्रकाश डालिए। इसकी क्या उपलब्धियाँ रहीं?
  85. प्रश्न- गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन क्यों प्रारम्भ किया? वर्णन कीजिए।
  86. प्रश्न- लखनऊ समझौते के विषय में आप क्या जानते हैं? विस्तृत विवेचन कीजिए।
  87. प्रश्न- प्रथम विश्वयुद्ध का उत्तरदायित्व किस देश का था?
  88. प्रश्न- प्रथम विश्वयुद्ध में रोमानिया का क्या योगदान था?
  89. प्रश्न- 'लखनऊ समझौता, पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  90. प्रश्न- 'रॉलेक्ट एक्ट' पर संक्षित टिपणी कीजिए।
  91. प्रश्न- राष्ट्रीय जागृति के क्या कारण थे?
  92. प्रश्न- होमरूल आन्दोलन पर संक्षित टिपणी दीजिए।
  93. प्रश्न- भारतीय राष्ट्रवादी और प्रथम विश्वयुद्ध पर संक्षित टिपणी लिखिए।
  94. प्रश्न- अमेरिका के प्रथम विश्व युद्ध में शामिल होने के कारणों की व्याख्या कीजिए।
  95. प्रश्न- प्रथम विश्व युद्ध के बाद की गई किसी एक शान्ति सन्धि का विवरण दीजिए।
  96. प्रश्न- प्रथम विश्व युद्ध का पराजित होने वाले देशों पर क्या प्रभाव पड़ा?
  97. प्रश्न- प्रथम विश्व युद्ध का उत्तरदायित्व किस देश का था? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  98. प्रश्न- गदर पार्टी आन्दोलन (1915 ई.) पर संक्षित प्रकाश डालिए।
  99. प्रश्न- 1919 का रौलट अधिनियम क्या था?
  100. प्रश्न- असहयोग आन्दोलन के सिद्धान्त, कार्यक्रमों का संक्षित वर्णन कीजिए।
  101. प्रश्न- श्रीमती ऐनी बेसेन्ट के कार्यों का मूल्यांकन व महत्व समझाइये |
  102. प्रश्न- थियोसोफिकल सोसायटी का उद्देश्य बताइये।

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