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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 हिन्दी - हिन्दी का राष्ट्रीय काव्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :200
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2785
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 हिन्दी - हिन्दी का राष्ट्रीय काव्य - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- गुप्त जी के काव्य के कला-पक्ष की समीक्षा कीजिए।

अथवा
गुप्त जी के काव्य में भाषा-शैली, अलंकार और छन्द-योजना की समीक्षा कीजिए। 

उत्तर -

कला-पक्ष

शैली: शैलियों के निर्वाचन में गुप्त जी ने विविधता दिखायी है किन्तु प्रधानता प्रबन्धात्मक इतिवृत्तमय शैली की है। गुप्त जी के अधिकांश काव्य इसी शैली में है रंग में भंग, जयद्रथ वध, नहुष, सिद्धराज त्रिपथगा, साकेत आदि प्रबन्ध शैली में हैं।

यह शैली दो प्रकार की है खण्डकाव्यात्मक तथां महाकाव्यात्मक। 'साकेत' महाकाव्य है तथा शेष सभी काव्य खण्डकाव्य के अन्तर्गत आयेंगे।

गुप्त जी की एक शैली विवरण शैली भी है। 'भारत-भारती' और 'हिन्दू' इसी शैली में है।

गुप्त जी की तीसरी शैली गीति नाट्य शैली है। इसी शैली में गुप्त जी ने नाटकीय प्रणाली का अनुगमन किया है। अनघ इसका उदाहरण है।

उनकी चौथी शैली गीत शैली है। इस शैली में गुप्त जी ने 'झंकार' की रचना की। उनकी पाँचवीं शैली आत्मोद्गार प्रणाली की है। इसमें गुप्त जी ने 'द्वापर' की रचना की।

उनकी छठी शैली नाटक, गीत, प्रबन्ध, पद्य और गद्य सभी के मिश्रण के परिणामस्वरूप बनी हुई मिश्रित है। इस शैली में गुप्त जी ने 'यशोधरा' की रचना की।

इन सभी शैलियों में गुप्त जी को समान रूप से सफलता नहीं मिली। गीत और गीति नाट्य शैली में गुप्त जी अवश्य ही सफल रहे हैं।

गुप्त जी की शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसमें उनका व्यक्तित्व झलकता है। उसमें पूर्ण प्रवाह है। भावों और प्रसंग के अनुसार वह परिवर्तित होती रहती है। शैली सदैव ही भावों की अभिव्यक्ति में सहायक होकर उपस्थित हुई है।

भाषा - गुप्त जी की काव्य-भाषा खड़ी बोली है, इस पर उन्हें पूर्ण अधिकार है। भावों को अभिव्यक्त करने के लिए गुप्त जी के पास अत्यन्त व्यापक शब्दावली है।

गुप्त जी की प्रारम्भिक रचनाओं की भाषा तत्सम है। वह पूर्ण रूप से सीधी-सादी है। 'भारत- भारती की भाषा में खड़ी बोली की खड़खड़ाहट है, किन्तु गुप्त जी की भाषा क्रमशः विकास करती हुई सरस होती गयी है।

गुप्त जी की भाषा में संस्कृत की तत्समता है। संस्कृत के शब्द भण्डार से ही उन्होंने अपनी भाषा का भण्डार भरा है। भाषा में संस्कृत शब्दावली की प्रचुरता होते हुए भी 'प्रियप्रवास' की भाषा की तरह गुप्त जी की भाषा संस्कृत- बहुल नहीं होने पायी है। उसका प्रकृत रूप सर्वथा उभरा हुआ है। भाव व्यंजना को स्पष्ट और प्रभावपूर्ण बनाने के लिए ही संस्कृत पदावली का सहारा लिया गया है।

संस्कृत के साथ-साथ गुप्त जी की भाषा पर प्रान्तीयता का भी प्रभाव है। झींमना, धड़ाम, तती, छींटना, लंघन, डिडकर आदि प्रान्तीय शब्दों का भी प्रयोग मिलता है। कहीं-कहीं पर तो भाषा-सौन्दर्य के लिए इन शब्दों का प्रयोग बहुत सन्दर बन पड़ा है -

कहकर हाय धड़ाम गिरी।

उर्दू शब्दों का प्रयोग गुप्त जी ने नहीं किया है। पर यह बात उनकी प्रौढ़ रचनाओं के विषय में है। 'किसान', 'रंग में भंग' आदि रचनाओं में उर्दू के प्रचलित शब्द प्रचुर मात्रा में हैं। व्याकरण की दृष्टि से गुप्त जी की भाषा पूर्ण रूप से व्याकरणसम्मत है। गुप्त जी की परिष्कृत भाषा सौन्दर्य और माधुर्य के साथ सदैव भाव की अनुवर्तिनी रही है। भावों की अनुकूलता के साथ ही गुप्त जी ने पात्र और प्रसंग के अनुसार भी भाषा का प्रयोग किया है। लक्ष्मण की भाषा में ओज है; उर्मिला की वाणी में यौवन का चांचल्य और शील का मार्दव है, राम की भाषा गम्भीर है, कैकेयी के शब्दों में उच्छ्वास है और राहुल की बातों में बाल-सुलभ सारल्य तथा यशोधरा की भाषा में वेदना की कसक है।

भावनुकूलता के साथ गुप्त जी की भाषा में लाक्षणिक समृद्धि, मूतिमत्ता और चित्रोपमता प्रचुर मात्रा में है। अपनी भाषा में गुप्त जी ने लोकोक्तियों और मुहावरों का कम प्रयोग किया है। जो भी प्रयोग हैं वे अपने सहज रूप में नहीं हैं। फलतः भाषा-सौन्दर्य की अभिवृद्धि में उनसे अधिक सहायता नहीं मिली है।

संवादों की भाषा में अंग्रेजी शैली का प्रभाव है। संवादों की इस भाषा में एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता भी है। यहाँ कवि ने समास पद्धति की सहायता से थोड़े में बहुत कहने का प्रयास किया है। बिहारी का-सा अर्थ गौरव उसमें लक्षित है। सब मिलाकर भाषा की दृष्टि से गुप्त जी की काव्य-साधना प्रौढ़, परिष्कृत और परिमार्जित है।

छन्द-योजना : छन्द-योजना की दृष्टि से गुप्त जी के काव्य पूर्ण रूप से सफल हैं। गुप्त जी में भाव और विषय के अनुकूल छन्द-चयन करने की अनोखी शक्ति है। इसलिए उनके भावों की सशक्त और मार्मिक व्यंजना का श्रेय बहुत कुछ छन्दों को है। उन्होंने तुकान्त, अतुकान्त, गीत सभी प्रकार के छन्दों को अपनाया है। जो छन्द काव्य - साहित्य से बहिष्कृत हो गये थे, उन्हें बड़ी उदारता के साथ गुप्त जी ने अपनाया और काव्य के नवीन सौन्दर्य से उन्हें अभिभूत किया। उन्होंने रोला, छप्पय, सवैया, कवित्त, दोहा आदि रीतिकालीन छन्द, हरिगीतिका, आर्यागीत, पद, पादांकुलक आदि मात्रिक छन्द, शार्दूलविक्रीड़ित, शिखरिणी, मालिनी, द्रुतविलम्बित आदि संस्कृत छन्दों का आश्रय लिया है। 'सोहनी' नाम से उन्होंने उर्दू गजलों का हिन्दी रूपान्तर किया और इसमें भी संदेह नहीं कि उर्दू की लावनियों को हिन्दी की ही पद्धति में पूर्ण रूप से ढाल दिया है। तुकान्त छन्दों में गुप्त जी तुक मिलाने में सिद्धहस्त हैं। अतुकान्त छन्द कहीं शिथिल नहीं हैं। भावों की तीव्रता ने अतुकान्त छन्द विधान में कहीं भी लचरपन नहीं आने दिया है। सभी छन्दों का प्रयोग प्रसंग के अनुकूल है और वे अपूर्व गति एवं लय लिए हुए हैं। भावनाओं का तारतम्य उनमें भली प्रकार प्रकट हुआ है।

अलंकार - योजना : काव्य में अलंकारों का प्रयोग भावों के स्पष्टीकरण के लिए होना आवश्यक है। अलंकारों का प्रयोग किसी व्यापार, क्रिया, रूप अथवा घटना की तीव्रता, प्रभाव अथवा सामर्थ्य दिखलाने के लिए हुआ है। यद्यपि गुप्त जी स्वाभाविक अलंकारों का प्रयोग भाव - साधक की भाँति करते हैं, फिर भी कहीं-कहीं सजावट भर के लिए भी अलंकारों ने आकर व्याघात उपस्थित किया है। उर्मिला के विरह की भूमिका में निम्नलिखित छन्द इसी प्रकार का है-

उस रुदन्ती विरहिणी के हृदय रस के लेप से,
            X         X         X          X
क्यों न बनते कवि जनों के तामपत्र सुवर्ण के।
सामान्य विशेषताएँ : सारांश यह है कि गुप्त जी का काव्य भाव तथा कला दोनों ही पक्षों की दृष्टि से सफल है। उनके काव्य की विशेषताओं का संक्षेप में विश्लेषण निम्न प्रकार से कर सकते हैं -

1. गुप्त जी की कविता में राष्ट्रीयता और गाँधीवाद की प्रधानता है, उसमें प्राचीन गौरवमय अतीत के इतिहास और भारतीय संस्कृति की महत्ता प्रतिपादित की गई है।

2. गुप्त जी ने राष्ट्रीय जीवन के साथ पारिवारिक जीवन को भी यथोचित महत्ता दी है।

3. गुप्त जी अनन्य रामभक्त होते हुए भी साम्प्रदायिकता से अछूते हैं। उन्होंने सभी धर्मों से सम्बन्धित काव्य लिखे हैं।

4. गुप्त जी ने साहित्य की उपेक्षिताओं को ही नहीं वरन् नारी मात्र को विशेष महत्व दिया है।

5: गुप्त जी ने प्रबन्ध और मुक्तक दोनों ही लिखे हैं और वे समय की गति के साथ कदम मिलाते हैं।

6. गुप्त जी की भाषा 'प्रियप्रवास' की-सी संस्कृत-प्रधान नहीं है। संस्कृतगर्भित होते हुए भी प्रसाद जी की कविता की भाँति गुप्त जी की कविता दुरूह नहीं हो पायी है।

7. गुप्त जी ने शब्द-शक्तियों तथा अलंकारों से पूरा लाभ उठाया है, कहीं-कहीं मुहावरों की ओर भी काव्यमय संकेत हैं।

8. गुप्त जी ने बड़े सुन्दर शब्द-चित्र दिये हैं-

चूमता था भूमिदल को अर्द्ध-विधु सा भाल,
X             X             X             X
हो रही थी प्रकृति अपने-आप पूर्ण सनाथ।

6. गुप्त जी के संवाद बड़े ही सजीव, सरल और प्रत्युत्पन्नमतिपूर्ण हैं।

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    अनुक्रम

  1. अध्याय - 1 चंदबरदाई : पृथ्वीराज रासो के रेवा तट समय के अंश
  2. प्रश्न- रासो की प्रमाणिकता पर विचार कीजिए।
  3. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो महाकाव्य की भाषा पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
  4. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो को जातीय चेतना का महाकाव्य कहना कहाँ तक उचित है। तर्क संगत उत्तर दीजिए।
  5. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो के सत्ताइसवें सर्ग 'रेवा तट समय' का सारांश लिखिए।
  6. प्रश्न- रासो शब्द की व्युत्पत्ति के सम्बन्ध में प्राप्त मतों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
  7. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो' में अभिव्यक्त इतिहास पक्ष की विवेचना कीजिए।
  8. प्रश्न- विद्यापति भोग के कवि हैं? क्यों?
  9. अध्याय - 2 जगनिक : आल्हा खण्ड
  10. प्रश्न- जगनिक के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  11. प्रश्न- जगनिक कृत 'आल्हाखण्ड' का उल्लेख कीजिए।
  12. प्रश्न- आल्हा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  13. प्रश्न- कवि जगनिक द्वारा आल्हा ऊदल की कथा सृजन का उद्देश्य वर्णित कीजिए। उत्तर -
  14. प्रश्न- 'आल्हा' की कथा का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  15. प्रश्न- कवि जगनिक का हिन्दी साहित्य में स्थान निर्धारित कीजिए।
  16. अध्याय - 3 गुरु गोविन्द सिंह
  17. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  18. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह की रचनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
  19. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह' की भाषा पर प्रकाश डालिए।
  20. प्रश्न- सिख धर्म में दशम ग्रन्थ का क्या महत्व है?
  21. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह के पश्चात् सिख धर्म में किस परम्परा का प्रचलन हुआ?
  22. अध्याय - 4 भूषण
  23. प्रश्न- महाकवि भूषण का संक्षिप्त जीवन और साहित्यिक परिचय दीजिए।
  24. प्रश्न- भूषण ने किन काव्यों की रचना की?
  25. प्रश्न- भूषण की वीर भावना का स्वरूप क्या है?
  26. प्रश्न- वीर भावना कितने प्रकार की होती है?
  27. प्रश्न- भूषण की युद्ध वीर भावना की उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।
  28. अध्याय - 5 भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  29. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की शैलीगत विशेषताओं को निरूपित कीजिए।
  30. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के काव्य की भाव-पक्षीय विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  31. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की भाषागत विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
  32. प्रश्न- भारतेन्दु जी के काव्य की कला पक्षीय विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  33. प्रश्न- भीतर भीतर सब रस चूस पद की व्याख्या कीजिए।
  34. अध्याय - 6 अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  35. प्रश्न- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जीवन परिचय दीजिए।
  36. प्रश्न- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' के काव्य की भाव एवं कला की भाव एवं कलापक्षीय विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  37. प्रश्न- सिद्ध कीजिए अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि हैं।
  38. प्रश्न- हरिऔध जी का रचना संसार एवं रचना शिल्प पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  39. प्रश्न- प्रिय प्रवास की छन्द योजना पर विचार कीजिए।
  40. प्रश्न- 'जन्मभूमि' कविता में कवि हरिऔध जी का देश की भूमि के प्रति क्या भावना लक्षित होती है?
  41. अध्याय - 7 मैथिलीशरण गुप्त
  42. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त का जीवन-परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
  43. प्रश्न- 'गुप्त जी राष्ट्रीय कवि की अपेक्षा जातीय कवि अधिक हैं। उपर्युक्त कथन की युक्तिपूर्ण विवेचना कीजिए।
  44. प्रश्न- गुप्त जी के काव्य के कला-पक्ष की समीक्षा कीजिए।
  45. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त की कविता मातृभूमि का भाव व्यक्त कीजिए।
  46. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त किस कवि के रूप में विख्यात हैं? उल्लेख कीजिए।
  47. प्रश्न- 'मातृभूमि' कविता में मैथिलीशरण गुप्त ने क्या पिरोया है?
  48. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त के प्रथम काव्य संग्रह का क्या नाम है? साकेत की कथावस्तु का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  49. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त ने आर्य शीर्षक कविता में क्या उल्लेख किया है?
  50. अध्याय - 8 जयशंकर प्रसाद
  51. प्रश्न- सिद्ध कीजिए "प्रसाद का प्रकृति-चित्रण बड़ा सजीव एवं अनूठा है।'
  52. प्रश्न- महाकवि जयशंकर प्रसाद के काव्य में राष्ट्रीय चेतना का निरूपण कीजिए।
  53. प्रश्न- 'प्रसाद' के कलापक्ष का विश्लेषण कीजिए।
  54. प्रश्न- 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' कविता का सारांश / सार/ कथ्य अपने शब्दों में लिखिए।
  55. प्रश्न- प्रसाद जी द्वारा रचित राष्ट्रीय काव्यधारा से ओत-प्रोत 'प्रयाण गीत' का सारांश लिखिए।
  56. प्रश्न- जयशंकर प्रसाद जी का हिन्दी साहित्य में स्थान निर्धारित कीजिए।
  57. प्रश्न- प्रसाद जी के काव्य में नवजागरण की मुख्य भूमिका रही है। तथ्यपूर्ण उत्तर दीजिए।
  58. अध्याय - 9 सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
  59. प्रश्न- 'सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' एक क्रान्तिकारी कवि थे।' इस दृष्टि से उनकी काव्यगत प्रवृत्तियों की समीक्षा कीजिए।
  60. प्रश्न- 'निराला ओज और सौन्दर्य के कवि हैं। इस कथन की विवेचना कीजिए।
  61. प्रश्न- निराला के काव्य-भाषा पर एक निबन्ध लिखिए। यथोचित उदाहरण भी दीजिए।
  62. प्रश्न- निराला के जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  63. प्रश्न- निराला के काव्य में अभिव्यक्त वैयक्तिकता पर प्रकाश डालिए।
  64. प्रश्न- निराला के काव्य में प्रकृति का किन-किन रूपों में चित्रण हुआ है? स्पष्ट कीजिए।
  65. प्रश्न- निराला के साहित्यिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  66. प्रश्न- निराला की सांस्कृतिक चेतना पर प्रकाश डालिए।
  67. प्रश्न- निराला की विद्रोहधर्मिता पर प्रकाश डालिए।
  68. प्रश्न- महाकवि निराला जी की 'भारती जय-विजय करे' कविता का सारांश लिखिए।
  69. अध्याय - 10 माखनलाल चतुर्वेदी
  70. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  71. प्रश्न- "कवि माखनलाल चतुर्वेदी जी के काव्य में राष्ट्रीय चेतना लक्षित होती है।" इस कथन की सोदाहरण पुष्टि कीजिए।
  72. प्रश्न- 'माखनलाल जी' की साहित्यिक साधना पर प्रकाश डालिए?
  73. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी ने साहित्य रचना का महत्व किस प्रकार प्रकट किया?
  74. प्रश्न- साहित्य पत्रकारिता में माखन लाल चतुर्वेदी का क्या स्थान है
  75. प्रश्न- 'पुष्प की अभिलाषा' कविता का सारांश लिखिए।
  76. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित 'जवानी' कविता का सारांश लिखिए।
  77. अध्याय - 11 सुभद्रा कुमारी चौहान
  78. प्रश्न- कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  79. प्रश्न- सुभद्रा कुमारी चौहान किस कविता के माध्यम से क्रान्ति का स्मरण दिलाती हैं?
  80. प्रश्न- 'वीरों का कैसा हो वसंत' कविता का सारांश लिखिए।
  81. प्रश्न- 'झाँसी की रानी' गीत का सारांश लिखिए।
  82. अध्याय - 12 बालकृष्ण शर्मा नवीन
  83. प्रश्न- पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' जी का जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  84. प्रश्न- कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' जी की राष्ट्रीय चेतना / भावना पर प्रकाश डालिए।
  85. प्रश्न- 'विप्लव गायन' गीत का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  86. प्रश्न- नवीन जी के 'हिन्दुस्तान हमारा है' गीत का सारांश लिखिए।
  87. प्रश्न- कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' स्वाधीनता के पुजारी हैं। इस कथन को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
  88. अध्याय - 13 रामधारी सिंह 'दिनकर'
  89. प्रश्न- दिनकर जी राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण के कवि हैं। विवेचना कीजिए।
  90. प्रश्न- "दिनकर" के काव्य के भाव पक्ष को निरूपित कीजिए।
  91. प्रश्न- 'दिनकर' के काव्य के कला पक्ष का विवेचन कीजिए।
  92. प्रश्न- रामधारी सिंह दिनकर का संक्षिप्त जीवन-परिचय दीजिए।
  93. प्रश्न- दिनकर जी द्वारा विदेशों में किए गए भ्रमण पर प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- दिनकर जी की काव्यधारा का क्रमिक विकास बताइए।
  95. प्रश्न- शहीद स्तवन (कलम आज उनकी जयबोल) का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  96. प्रश्न- दिनकर जी की 'हिमालय' कविता का सारांश लिखिए।
  97. अध्याय - 14 श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
  98. प्रश्न- कवि श्यामलाल गुप्त का जीवन परिचय एवं राष्ट्र चेतना पर प्रकाश डालिए।
  99. प्रश्न- झण्डा गीत का सारांश लिखिए।
  100. प्रश्न- पार्षद जी ने स्वाधीनता आन्दोलन में शामिल होने के कारण क्या-क्या कष्ट सहन किये।
  101. प्रश्न- श्यामलाल गुप्त पार्षद के हिन्दी साहित्य में योगदान के लिए क्या सम्मान मिला?
  102. अध्याय - 15 श्यामनारायण पाण्डेय
  103. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डे के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  104. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डेय ने राष्ट्रीय चेतना का संचार किस प्रकार किया?
  105. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित 'चेतक की वीरता' कविता का सार लिखिए।
  106. प्रश्न- 'राणा की तलवार' कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  107. अध्याय - 16 द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी
  108. प्रश्न- प्रसिद्ध बाल कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  109. प्रश्न- 'उठो धरा के अमर सपूतों' का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  110. प्रश्न- वीर तुम बढ़े चलो गीत का सारांश लिखिए।
  111. अध्याय - 17 गोपालप्रसाद व्यास
  112. प्रश्न- कवि गोपालप्रसाद 'व्यास' का एक राष्ट्रीय कवि के रूप में परिचय दीजिए।
  113. प्रश्न- कवि गोपाल प्रसाद व्यास किस भाषा के मर्मज्ञ माने जाते थे?
  114. प्रश्न- गोपाल प्रसाद व्यास द्वारा रचित खूनी हस्ताक्षर कविता का सारांश लिखिए।
  115. प्रश्न- "शहीदों में तू अपना नाम लिखा ले रे" कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  116. अध्याय - 18 सोहनलाल द्विवेदी
  117. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी जी का जीवन और साहित्य क्या था? स्पष्ट कीजिए।
  118. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी के काव्य में समाहित राष्ट्रीय चेतना का उल्लेख कीजिए।
  119. प्रश्न- 'मातृभूमि' कविता का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
  120. प्रश्न- 'तुम्हें नमन' कविता का सारांश लिखिए।
  121. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी जी ने महात्मा गाँधी को अपने काव्य में क्या स्थान दिया है?
  122. प्रश्न- सोहनलाल द्विवेदी जी की रचनाएँ राष्ट्रीय जागरण का पर्याय हैं। स्पष्ट कीजिए।
  123. अध्याय - 19 अटल बिहारी वाजपेयी
  124. प्रश्न- कवि अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  125. प्रश्न- अटल बिहारी वाजपेयी के कवि रूप पर प्रकाश डालिए।
  126. प्रश्न- अटल जी का काव्य जन सापेक्ष है। सिद्ध कीजिए।
  127. प्रश्न- अटल जी की रचनाओं में भारतीयता का स्वर मुखरित हुआ है। स्पष्ट कीजिए।
  128. प्रश्न- कदम मिलाकर चलना होगा कविता का सारांश लिखिए।
  129. प्रश्न- उनकी याद करें कविता का सारांश लिखिए।
  130. अध्याय - 20 डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'
  131. प्रश्न- डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  132. प्रश्न- निशंक जी के साहित्य के विषय में अन्य विद्वानों के मतों पर प्रकाश डालिए।
  133. प्रश्न- डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डालिए।
  134. प्रश्न- हम भारतवासी कविता का सारांश लिखिए।
  135. प्रश्न- मातृवन्दना कविता का सारांश लिखिए।
  136. अध्याय - 21 कवि प्रदीप
  137. प्रश्न- कवि प्रदीप के जीवन और साहित्य का चित्रण कीजिए।
  138. प्रश्न- कवि प्रदीप की साहित्यिक अभिरुचि का परिचय दीजिए।
  139. प्रश्न- कवि प्रदीप किस विचारधारा के पक्षधर थे?
  140. प्रश्न- 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत का आधार क्या था?
  141. प्रश्न- गीतकार और गायक के रूप में कवि प्रदीप की लोकप्रियता कब हुई?
  142. प्रश्न- स्वतन्त्रता आन्दोलन में कवि प्रदीप की क्या भूमिका रही?
  143. अध्याय - 22 साहिर लुधियानवी
  144. प्रश्न- साहिर लुधियानवी का साहित्यिक परिचय दीजिए।
  145. प्रश्न- 'यह देश है वीर जवानों का' गीत का सारांश लिखिए।
  146. प्रश्न- साहिर लुधियानवी के गीतों में किन सामाजिक समस्याओं को उठाया गया है?
  147. अध्याय - 23 प्रेम धवन
  148. प्रश्न- गीतकार प्रेम धवन के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  149. प्रश्न- गीतकार प्रेम धवन के गीत देशभक्ति से ओतप्रोत हैं। स्पष्ट कीजिए।
  150. प्रश्न- 'छोड़ों कल की बातें' गीत किस फिल्म से लिया गया है? कवि ने इसमें क्या कहना चाहा है?
  151. प्रश्न- 'ऐ मेरे प्यारे वतन' गीत किस पृष्ठभूमि पर आधारित है?
  152. अध्याय - 24 कैफ़ी आज़मी
  153. प्रश्न- गीतकार कैफी आज़मी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  154. प्रश्न- "सर हिमालय का हमने न झुकने दिया।" इस पंक्ति का क्या भाव है?
  155. प्रश्न- "कर चले हम फिदा जानोतन साथियों" गीत का प्रतिपाद्य / सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  156. प्रश्न- सैनिक अपनी मातृभूमि के प्रति क्या भाव रखता है?
  157. अध्याय - 25 राजेन्द्र कृष्ण
  158. प्रश्न- गीतकार राजेन्द्र कृष्ण के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  159. प्रश्न- 'जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती हैं बसेरा' गीत का मूल भाव क्या है?
  160. अध्याय - 26 गुलशन बावरा
  161. प्रश्न- गीतकार गुलशन बावरा के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  162. प्रश्न- 'मेरे देश की धरती सोना उगले गीत का प्रतिपाद्य लिखिए। '
  163. अध्याय - 27 इन्दीवर
  164. प्रश्न- गीतकार इन्दीवर के जीवन और फिल्मी कैरियर का वर्णन कीजिए।
  165. प्रश्न- 'है प्रीत जहाँ की रीत सदा' गीत का मुख्य भाव क्या है?
  166. प्रश्न- गीतकार इन्दीवर ने किन प्रमुख फिल्मों में गीत लिखे?
  167. अध्याय - 28 प्रसून जोशी
  168. प्रश्न- गीतकार प्रसून जोशी के जीवन और साहित्य का चित्रण कीजिए।
  169. प्रश्न- 'देश रंगीला रंगीला' गीत में गीतकार प्रसून जोशी ने क्या चित्रण किया है?
  170. प्रश्न- 'देश रंगीला रंगीला' गीत में कवि ने इश्क का रंग कैसा बताया है?

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