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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 भूगोल - सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के मूल तत्व

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :200
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2777
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 भूगोल - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- डिजिटल इमेज प्रक्रमण के तहत इमेज उच्चीकरण तकनीक की विस्तृत व्याख्या कीजिए।

उत्तर -

इमेज उच्चीकरण तकनीक
(Image Enhancement Techniques)

रिमोट सेंसिंग तकनीक से बेहतर छवि हासिल करना प्रमुख उद्देश्य होता है, लेकिन कई बार इमेज स्पष्ट रूप से प्राप्त नही हो पाती है। ऐसे में उच्चीकरण तकनीक का प्रयोग करके उस इमेज को उपयोग में लाने लायक बनाया जाता है। इमेज उच्चीकरण किसी दृश्य में धरातलीय लक्षणों के मध्य दृश्य विभेदन को बढ़ाता है। इस तकनीक का उपयोग करने के पश्चात् निर्मित इमेज से सूचनाओं को एकत्र करने की क्षमता बढ़ती है। देखकर भी आँकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है। धरातलीय लक्षणों में भेद स्थापित करने को विपर्यास (Contrast ) कहते हैं।

विपर्यास - इमेज में प्रकाश पुंज अथवा ग्रेस्तर के मानों में भेद अथवा विषमता को दर्शाने के लिए विपर्यास का प्रयोग होता है। इसका अर्थ यह है कि विपर्यास किसी इमेज में अधिकतम तथा न्यूनतम प्रकाश गहनता का आनुपातिक सम्बन्ध है।

                                           / Maximum (अधिकतम गहनता)
विपर्यास (Contrast) C =  --------------------------------------------
                                          / Minimum (न्यूनतम गहनता)

विपर्यास अनुपात के द्वारा किसी इमेज में विभिन्न लक्षणों में भेद स्थापित किया जा सकता है। अधिकतम विपर्यास मान इमेज के विश्लेषण में सरल और सहायक होते हैं।

विपर्यास कम होने के कारण (Reasons for Low Contrast) - उपग्रह आँकड़ों से सीधे निर्मित इमेज में प्रायः विपर्यास की कमी पाई जाती है। इमेज में विपर्यास कम होने के प्रमुख कारण निम्न प्रकार हैं-

(1) वायुमण्डलीय प्रकीर्णन द्वारा - वायुमण्डल में विद्युत-चुम्बकीय ऊर्जा के प्रकीर्णन. का प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से संवेदक पर पड़ता है। प्रायः लघुतरंग दैर्ध्य भाग में इस प्रकार का प्रभाव स्पष्ट होता है।

(2) दृश्य द्वारा - कभी-कभी इमेज दृश्य में किसी लक्षण या वस्तु या उसके पृष्ठ भाग का विद्युत-चुम्बकीय विकिरण समान होता है। ऐसी दशा में दोनों में भेद स्थापित करना कठिन होता है। कम विपर्यास का दूसरा कारण सुदूर संवेदन प्रणाली है जो कभी-कभी सम्पूर्ण दृश्य में स्वतः ही कम विपर्यास अनुपात को दर्शाती है।

(3) स्पॉट विपर्यास - कई बार संवेदक प्रणालियों में इतनी क्षमता नहीं होती है कि वह किसी दृश्य के विपर्यास को पहचान या अंकित कर सके। इसी प्रकार कभी-कभी गलत अंकन विधियों के द्वारा भी किसी दृश्य में कम विपर्यास अंकित होता है जबकि स्वयं दृश्य अधिक इमेज लिये हुये होता है। किसी दृश्य में कम विपर्यास अनुपात को स्पॉट विपर्यास (Washed out) कहते हैं। इसमें सभी ग्रेमान एक तरह के होते हैं।

विपर्यास उच्चीकरण तकनीकियाँ - विपर्यास को बढ़ाने के लिए निम्न तकनीकों उपयोग किया गया है-

1. रेखीय विपर्यास पसरन - रेखीय विपर्यास पसरन मूल अन्तर्गामी ग्रे-मानों को बढ़ाने का कार्य करता है। विश्लेषणकर्ता इमेज हिस्टोग्राम का निरीक्षण करता है जो रेखीय पसरन समीकरण के उपयोग से निर्गतगामी इमेज के निर्माण में सहायक होती है। इस दौरान डिजिटल नम्बरों को आरेखीय प्रतिरूपों में वितरित किया जाता है। आरेखीय विपर्यास विधि में मूल इमेज तथा परिवर्तित इमेज के डिजिटल संख्याओं में रेखीय सम्बन्ध होते हैं।

2. हिस्टोग्राम - हिस्टोग्राम प्रसामान्यीकरण एकरेखीय विपर्यास उच्चीकरण तकनीक है जो अधिकांश प्रयोग की जाती है। मूल इमेज तथा परिवर्तित इमेज में अरेखीय सम्बन्ध होते हैं। इस विधि में मूल इमेज के हिस्टोग्राम में समान घनत्व दर्शाने के लिये ग्रेमानों को पुनर्वितरित किया जाता है। इमेज पिक्सल मानों को 0 से 255 की रेन्ज में वितरित किया जाता है जिन्हें निकटवर्ती ग्रेमानों के समूहों द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह स्वतः ही इमेज के प्रकाशयुक्त व अंधकारयुक्त भाग में विपर्यास कम कर देता है। विपर्यास उच्चीकरण एल्गोरिथम का चुनाव, मूल हिस्टोग्राम की प्रकृति तथा दृश्य में निहित तत्वों पर निर्भर करता है।

3. घनत्व खण्डों का विभाजन - इस विधि के माध्यम से किसी इमेज के सतत् ग्रे-टोन को अलग-अलग घनत्व स्तरखण्डों में विभाजित किया जाता है। विभिन्न स्तरखण्डों को अलग-अलग रंगों में भी प्रसारित किया जा सकता है। यह तकनीक अतिसूक्ष्म ग्रे-मापक अन्तरों को महत्व देती है।

4. कोर उच्चीकरण - इमेज में दो श्रेणियों के मध्य के वसाव स्थिति को किनारा या कोर कहते हैं। विभिन्न लक्षणों की श्रेणियों में भेद स्थापित करने तथा सीमांकन करने के लिये किनारों की सूचनायें अति महत्वपूर्ण होती हैं। किनारा उच्चीकरण तकनीक को धारदार या स्पष्ट तकनीक भी कहते हैं। किनारों पर ग्रे-मानों की गहनता को उठाने के लिये उच्च मार्ग फिल्टर का उपयोग किया जाता है। कोर उच्चीकरण तकनीक धरातलीय विभेदून को बढ़ाने की क्षमता रखती है।

5. वानस्पतिक सूचकांक - धरातलीय लक्षणों में प्रकीर्णन एवं चमक में भिन्नता, धरातलीय ढाल, पहलू, छाया, सूर्य प्रकाश का परावर्तन कोण तथा उसकी गहनता आदि के कारण उत्पन्न होती हैं। चमक के कारण इमेजरी में सही आकलन नहीं हो पाता है। इस प्रकार के प्राकृतिक प्रभावों को कम करने के लिये आनुपातिक रूपान्तरण का उपयोग किया जाता है। आनुपातिक इमेज में एक स्पेक्ट्रल बैंड के मानों को दूसरे स्पेक्ट्रल बैंड के आनुपातिक मानों से विभाजित किया जाता है। इस तकनीक में किसी दृश्य के दो स्पेक्ट्रल इमेज में पिक्सल से पिक्सल को विभाजित किया जाता है। इसका अधिकतर उपयोग वनस्पति सूचकांक की गणना के लिये किया जाता है। बैंड आनुपातीकरण पर आधारित यह सूचकांक प्रासामान्यीकरण अन्तरीय वानस्पतिक सूचकांक कहलाती है। इस सूचकांक का उपयोग विस्तृत रूप में किसी दृश्य में वनस्पति के वितरण तथा प्रकारों के अध्ययन के लिये किया जाता है।

6. धरातलीय निश्यन्दन - सुदूर संवेदन इमेज की विशेषता धरातलीय आवृत्तियाँ हैं। यह प्रति इकाई दूरी के हिसाब से चमकीले मानों में कई परिवर्तन दर्शाती है। यदि किसी क्षेत्र के चमक मानों में आंशिक परिवर्तन है तो इसका अर्थ है कि यह निम्न आवृत्ति वाला क्षेत्र है। इसके विपरीत अधिक आवृत्ति वाले भाग में चमक मान दूरी पर नाटकीय ढंग से परिवर्तित होते हैं। इस प्रकार धरातलीय निस्यन्दन की सहायता से इन विसंगतियों को दूर किया जा सकता है।

धरातलीय निस्यन्दन - इमेज की आकृतियों को पहचानने में मदद करता है। इस माध्यम से विश्लेषणकर्ता के लिए इमेज में निहित वस्तुओं को आसानी से पहचाना जा सकता है। सुदूर संवेदक आँकड़ों की प्रक्रिया के लिये मुख्यतः निम्न प्रकार के फिल्टर का उपयोग किया गया है-

(1) मन्द मार्ग फिल्टर - इसका उपयोग आँकड़ों में निहित बेतरतीव अथवा सामान्य से उठे हुये भिन्न मानों को सामान्य करने के लिये किया जाता है। किसी दृश्य में कील की भाँति उठे हुये भिन्न आँकड़ों को शोर (Noise) कहते हैं। शोर मान अन्य सामान्य मानों की तुलना में अचानक परिवर्तित होते हैं जो कि अधिक धरातलीय मानों को दर्शाते हैं। प्रक्रिया के दौरान उच्च आकृतियों के मानों को बन्द कर दिया जाता है। इसी प्रक्रिया को मन्द मार्ग फिल्टर कहते हैं। मन्द मार्ग फिल्टर में धरातलीय विभेदन कम होता है परन्तु यह विश्लेषण के लिये उपयोगी है। इसमें 3x 3 पिक्सल की खिड़की का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक पिक्सल के मान को औसत मान से परिकलन किया जाता है।

(2) उच्च प्रबल मार्ग फिल्टर (High Pass Filter ) - दिशात्मक फिल्टर का उपयोग किसी इमेज में विशिष्ट रेखीय प्रवृत्तियों को उच्च करने के लिये किया जाता है।

(3) अदिशात्मक फिल्टर (Non Directional Filter ) - लाप्लासियन एक अदिशात्मक फिल्टर है क्योंकि यह किसी भी दिशा में निहित रेखीय आकृतियों को उठाने में सहायक होती है। लाप्लासियन फिल्टर केन्द्र का मान अत्यधिक होता है। इसके प्रत्येक किनारों पर शून्य तथा केन्द्र के चारों ओर -1 होता है।

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लाप्लेसियन केरनेल 3x 3 पिक्सल के आकार का होता है। इसके प्रत्येक पिक्सल को प्रतिस्थापित मानों से गुणा किया जाता है। तत्पश्चात् 9 ज्ञात मानों को जोड़ा जाता है। ज्ञात मान को केन्द्र के पिक्सल मान में जोड़ा जाता है। इसके परिणामस्वरूप जो मान ज्ञात होता है वही केन्द्रीय पिक्सल का मान होता है जो कि मूल डिजिटल नम्बर के स्थान पर रखा जाता है। (चित्र में देखें)।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- सुदूर संवेदन से आप क्या समझते हैं? विभिन्न विद्वानों के सुदूर संवेदन के बारे में क्या विचार हैं? स्पष्ट कीजिए।
  2. प्रश्न- भूगोल में सुदूर संवेदन की सार्थकता एवं उपयोगिता पर विस्तृत लेख लिखिए।
  3. प्रश्न- सुदूर संवेदन के अंतर्राष्ट्रीय विकास पर टिप्पणी कीजिए।
  4. प्रश्न- सुदूर संवेदन के भारतीय इतिहास एवं विकास पर प्रकाश डालिए।
  5. प्रश्न- सुदूर संवेदन का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
  6. प्रश्न- सुदूर संवेदन को परिभाषित कीजिए।
  7. प्रश्न- सुदूर संवेदन के लाभ लिखिए।
  8. प्रश्न- सुदूर संवेदन के विषय क्षेत्र पर टिप्पणी लिखिए।
  9. प्रश्न- भारत में सुदूर संवेदन के उपयोग पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
  10. प्रश्न- सुदूर संवेदी के प्रकार लिखिए।
  11. प्रश्न- सुदूर संवेदन की प्रक्रियाएँ एवं तत्व क्या हैं? वर्णन कीजिए।
  12. प्रश्न- उपग्रहों की कक्षा (Orbit) एवं उपयोगों के आधार पर वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
  13. प्रश्न- भारत के कृत्रिम उपग्रहों के कुछ उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
  14. प्रश्न- कार्य के आधार पर उपग्रहों का विभाजन कीजिए।
  15. प्रश्न- कार्यप्रणाली के आधार पर सुदूर संवेदी उपग्रह कितने प्रकार के होते हैं?
  16. प्रश्न- अंतर वैश्विक स्थान निर्धारण प्रणाली से आप क्या समझते हैं?
  17. प्रश्न- भारत में उपग्रहों के इतिहास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  18. प्रश्न- भू-स्थाई उपग्रह किसे कहते हैं?
  19. प्रश्न- ध्रुवीय उपग्रह किसे कहते हैं?
  20. प्रश्न- उपग्रह कितने प्रकार के होते हैं?
  21. प्रश्न- सुदूर संवेदन की आधारभूत संकल्पना का वर्णन कीजिए।
  22. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के सम्बन्ध में विस्तार से अपने विचार रखिए।
  23. प्रश्न- वायुमण्डलीय प्रकीर्णन को विस्तार से समझाइए।
  24. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रमी प्रदेश के लक्षण लिखिए।
  25. प्रश्न- ऊर्जा विकिरण सम्बन्धी संकल्पनाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। ऊर्जा
  26. प्रश्न- स्पेक्ट्रल बैण्ड से आप क्या समझते हैं?
  27. प्रश्न- स्पेक्ट्रल विभेदन के बारे में अपने विचार लिखिए।
  28. प्रश्न- सुदूर संवेदन की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  29. प्रश्न- सुदूर संवेदन की कार्य प्रणाली को चित्र सहित समझाइये |
  30. प्रश्न- सुदूर संवेदन के प्रकार और अनुप्रयोगों का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  32. प्रश्न- सुदूर संवेदन के प्लेटफॉर्म से आपका क्या आशय है? प्लेटफॉर्म कितने प्रकार के होते हैं?
  33. प्रश्न- सुदूर संवेदन के वायुमण्डल आधारित प्लेटफॉर्म की विस्तृत विवेचना कीजिए।
  34. प्रश्न- भू-संसाधन उपग्रहों को विस्तार से समझाइए।
  35. प्रश्न- 'सुदूर संवेदन में प्लेटफार्म' से आप क्या समझते हैं?
  36. प्रश्न- वायुयान आधारित प्लेटफॉर्म उपग्रह के लाभ और कमियों का वर्णन कीजिये।
  37. प्रश्न- विभेदन से आपका क्या आशय है? इसके प्रकारों का भी विस्तृत वर्णन कीजिए।
  38. प्रश्न- फोटोग्राफी संवेदक (स्कैनर ) क्या है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- सुदूर संवेदन में उपयोग होने वाले प्रमुख संवेदकों (कैमरों ) का वर्णन कीजिए।
  40. प्रश्न- हवाई फोटोग्राफी की विधियों की व्याख्या कीजिए एवं वायु फोटोचित्रों के प्रकार बताइये।
  41. प्रश्न- प्रकाशीय संवेदक से आप क्या समझते हैं?
  42. प्रश्न- सुदूर संवेदन के संवेदक से आपका क्या आशय है?
  43. प्रश्न- लघुतरंग संवेदक (Microwave sensors) को समझाइये |
  44. प्रश्न- प्रतिबिंब निर्वचन के तत्वों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
  45. प्रश्न- सुदूर संवेदन में आँकड़ों से क्या तात्पर्य है?
  46. प्रश्न- उपग्रह से प्राप्त प्रतिबिंबों का निर्वचन किस प्रकार किया जाता है?
  47. प्रश्न- अंकिय बिम्ब प्रणाली का वर्णन कीजिए।
  48. प्रश्न- डिजिटल इमेज प्रक्रमण से आप क्या समझते हैं? डिजिटल प्रक्रमण प्रणाली को भी समझाइए।
  49. प्रश्न- डिजिटल इमेज प्रक्रमण के तहत इमेज उच्चीकरण तकनीक की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
  50. प्रश्न- बिम्ब वर्गीकरण प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए।
  51. प्रश्न- इमेज कितने प्रकार की होती है? समझाइए।
  52. प्रश्न- निरीक्षणात्मक बिम्ब वर्गीकरण और अनिरीक्षणात्मक बिम्ब वर्गीकरण के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
  53. प्रश्न- भू-विज्ञान के क्षेत्र में सुदूर संवेदन ने किस प्रकार क्रांतिकारी सहयोग प्रदान किया है? विस्तार से समझाइए।
  54. प्रश्न- समुद्री अध्ययन में सुदूर संवेदन किस प्रकार सहायक है? विस्तृत विवेचना कीजिए।
  55. प्रश्न- वानिकी में सुदूर संवेदन के अनुप्रयोगों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  56. प्रश्न- कृषि क्षेत्र में सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी की भूमिका का सविस्तार वर्णन कीजिए। साथ ही, भारत में कृषि की निगरानी करने के लिए सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने हेतु सरकार द्वारा आरम्भ किए गए विभिन्न कार्यक्रमों को भी सूचीबद्ध कीजिए।
  57. प्रश्न- भूगोल में सूदूर संवेदन के अनुप्रयोगों पर टिप्पणी लिखिए।
  58. प्रश्न- मृदा मानचित्रण के क्षेत्र में सुदूर संवेदन के अनुप्रयोगों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
  59. प्रश्न- लघु मापक मानचित्रण और सुदूर संवेदन के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
  60. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र का अर्थ, परिभाषा एवं कार्यक्षेत्र की व्याख्या कीजिए।
  61. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के भौगोलिक उपागम से आपका क्या आशय है? इसके प्रमुख चरणों का भी वर्णन कीजिए।
  62. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के विकास की विवेचना कीजिए।
  63. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली का व्याख्यात्मक वर्णन प्रस्तुत कीजिए।
  64. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग क्या हैं? विस्तृत विवरण दीजिए।
  65. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र (GI.S.)से क्या तात्पर्य है?
  66. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  67. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के उद्देश्य बताइये।
  68. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र का कार्य क्या है?
  69. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के प्रकार समझाइये |
  70. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र की अभिकल्पना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  71. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के क्या लाभ हैं?
  72. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों का वर्णन कीजिए।
  73. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में कम्प्यूटर के उपयोग का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कीजिए।
  74. प्रश्न- GIS में आँकड़ों के प्रकार एवं संरचना पर प्रकाश डालिये।
  75. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के सन्दर्भ में कम्प्यूटर की संग्रहण युक्तियों का वर्णन कीजिए।
  76. प्रश्न- आर्क जी०आई०एस० से आप क्या समझते हैं? इसके प्रशिक्षण और लाभ के संबंध में विस्तृत व्याख्या कीजिए।
  77. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में प्रयोग होने वाले हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  78. प्रश्न- ERDAS इमेजिन सॉफ्टवेयर की अपने शब्दों में समीक्षा कीजिए।
  79. प्रश्न- QGIS (क्यू०जी०आई०एस०) के संबंध में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  80. प्रश्न- विश्वस्तरीय सन्दर्भ प्रणाली से आपका क्या आशय है? निर्देशांक प्रणाली के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  81. प्रश्न- डाटा मॉडल अर्थात् आँकड़ा मॉडल से आप क्या समझते हैं? इसके कार्य, संकल्पना और उपागम का वर्णन कीजिए।
  82. प्रश्न- रॉस्टर मॉडल की विवेचना कीजिए। इस मॉडल की क्षमताओं का भी वर्णन कीजिए।
  83. प्रश्न- विक्टर मॉडल की विस्तृत विवेचना कीजिए।
  84. प्रश्न- कार्टोग्राफिक संकेतीकरण त्रिविम आकृति एवं मानचित्र के प्रकार मुद्रण विधि का वर्णन कीजिए।
  85. प्रश्न- रॉस्टर मॉडल की कमियों और लाभ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  86. प्रश्न- विक्टर मॉडल की कमियों और लाभ के सम्बन्ध में अपने विचार लिखिए।
  87. प्रश्न- रॉस्टर और विक्टर मॉडल के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  88. प्रश्न- डेटाम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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